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शाही रेल 20 किमी तक रहेगी डीजल से ‘आजाद’

3 वर्ष पहले
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दिल्ली से रवाना होकर प्रदेश के कई शहरों में शाही यात्रा कराने वाली पैलेस ऑन व्हील्स में 29 साल बाद फिर ‘स्टीम इंजन’ जोड़ा गया है। बुधवार को दिल्ली से रवाना हुई यात्रियों को ‘छुक-छुक’ वाली पारंपरिक धुन सुनाई दी। इससे पहले 1982 से 1989 तक शाही रेल डबल स्टीम इंजन के साथ यात्रा करती थी। लेकिन बेहद खर्चीला और हेरिटेज स्वरूप समय के साथ बदल दिया गया। लेकिन रेल में ब्रिटिशर्स टूरिस्ट की काफी समय से रेल को उसी स्वरूप में देखने की मांग थी, जिसको आरटीडीसी के अफसरों ने रेलवे बोर्ड के सामने रखी। आखिरकार बोर्ड के हेरिटेज डिपार्टमेंट ने प्रमोशन और पावणों को फीलगुड कराने के लिए बड़ी जद्दोजहद कर हर टूर की शुरुआत में 20 किमी तक स्टीम इंजन से रेल शुरू करने की मांग मान ली। इसके बाद रेल अब दिल्ली में सफदरगंज स्टेशन से पटेल नगर तक स्टीम से चलेगी। बुधवार को रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी से ‘आजाद’ नाम के इंजन पर चढ़कर इसको हरी झंडी दिखाई। उनके साथ इस पहल को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाले शाही रेल के कंसल्टेंट जनरल मैनेजर प्रदीप बोहरा साथ थे, जिन्होंने शाही मेहमानों की मांग स्वीकार कर रेल की लोकप्रियता में चार चांद लगाने के लिए लोहानी का आभार जताया।

ब्रिटिशर्स को फीलगुड कराने के िलए 29 साल बाद स्टीम इंजन करेगा छुक-छुक
क्यों मानी ब्रिटिशर्स टूरिस्ट की मांग? क्योंकि रेल में 55% से ज्यादा यात्री ब्रिटिशर्स

बोहरा ने कहा कि शाही सफर के दीवानों में ब्रिटिशर्स की तादात शुरु से ही सर्वाधिक रही है। अभी भी कुल यात्रियों में 55 प्रतिशत से ज्यादा उन्हीं की बुकिंग रहती है। रेल में शुरुआती सफर करने वाले ब्रिटिशर्स अपनी पीढ़ियों के साथ इसके स्टीम इंजन की यादों को ताजा करते हैं। लेकिन जब वो यात्री यहां कर डीजल इंजन की सवारी करते हैं तो हमसे पुरानी यादें ताजा करते हैं। उनकी भावनाओं को देखते हुए हमने रेलवे बोर्ड के सामने मांग की। लगातार उनको याद दिलाते रहे। आखिरकार जैसे-तैसे रिवाड़ी यार्ड से स्टीम इंजन की व्यवस्था की गई, जो हर सफर में पावणों को फीलगुड कराएगी।

पहले का डेजर्ट क्वीन अब का आजाद 1982 से 1989 तक डेजर्ट क्वीन नाम का डबल स्टीम इंजन शाही रेल में था। अब जो इंजन लगाया गया है उसका नाम आजाद है। हालांकि, अब न तो ऐसे इंजन हैं और न ही चलाने वाले। रेलवे ने जैसे तैसे एक ड्राइवर को पुराने अनुभव के साथ नई ट्रेनिंग देकर जिम्मेदारी दी है। शाही रेल के अलावा अभी प्रदेश में कभी कबार दिल्ली से अलवर तक फेरी क्वीन में यह इंजन है। जानकारी हो कि स्टीम इंजन में कोयला और पानी से स्टीम की एनर्जी बनती है। लेकिन काफी मशक्कत वाली यह व्यवस्था समय के साथ आउटडेटेड मान ली गई।

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