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वर्ड ऑफ द डे : दिल्ली दरबार

बात दरबार की चले और दिल्ली का जिक्र नहीं हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। आखिर दिल्ली हिन्दुस्तान का दिल जो ठहरी। बात चाहे...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 08:46 AM IST
Ras - word of the day delhi darbar
बात दरबार की चले और दिल्ली का जिक्र नहीं हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। आखिर दिल्ली हिन्दुस्तान का दिल जो ठहरी। बात चाहे देश के किसी भी कोने की हो दिल्ली ही निर्णायक रही है। अब कांग्रेस हो या भाजपा... कार्यकर्ताओं की रायशुमारी, जनता की भावना की लाख बातें कर लें, टिकट तो दिल्ली से ही तय होते हैं। दिल्ली में आलाकमान की मुहर ही टिकटार्थियों के भाग्य का फैसला करती है। यह सब भाई लोग भी जानते हैं। सो वार-त्योहार भूलकर दिल्ली दरबार की चौखट पर डेरा डाले हुए हैं। खुद के साथ समर्थकों की फौज को टिकाए हैं। क्या पता कब और कैसे जरूरत पड़ जाए। दिल्ली दरबार की महत्ता आज चुनावों के वक्त बढ़ी है, ऐसा नहीं है। महाभारत काल से ही दिल्ली भारत का दिल रही है। उस वक्त इस शहर का नाम इन्द्रप्रस्थ था। जो पांडवों की राजधानी था। यहीं के दरबार में महाभारत के युद्ध की नींव पड़ी थी। वहां से आगे भी दिल्ली दरबार की महत्ता कम नहीं हुई। आखिरी हिन्दु सम्राट पृथ्वीराज चौहान का दरबारी कवि चंद्रबरदाई बड़ा मशहूर था। इसके बाद से अब तक दिल्ली का दरबार अखंड रहा है। पहली मुस्लिम महिला शासक रजिया सुल्तान से लेकर महान मुगल अकबर से होते हुए ब्रिटिश शासक जार्ज पंचम तक के दिल्ली दरबार बड़े विख्यात रहे हैं।

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