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परबतसर के तेजाजी मंदिर के लिए अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे ने की थी जीर्णोद्धार की घोषणा, नहीं हुई पूरी

परबतसर के वीर तेजाजी के प्राचीन मंदिर से कई ऐतिहासिक तथ्य जुड़े हैं। एशिया महाद्वीप स्तर का पशु मेला यहां तेजाजी...

Danik Bhaskar | May 20, 2018, 05:50 AM IST
परबतसर के वीर तेजाजी के प्राचीन मंदिर से कई ऐतिहासिक तथ्य जुड़े हैं। एशिया महाद्वीप स्तर का पशु मेला यहां तेजाजी मेले के नाम से लंबे समय से लगता रहा है। खारिया तालाब आस्था का केंद्र रहा है।

यहां पर शिवजी एवं अन्य देवी देवताओं के भव्य मंदिर स्थित हैं। परंतु तेजाजी महाराज का मंदिर सबसे प्राचीन है। यह अराजकीय प्रन्यास है। इसलिए सरकारी सहमति के बिना इस मंदिर का निर्माण संभव नहीं है। इसी कारण 1891 में बना तेजाजी महाराज का मंदिर आज भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। 22 अगस्त 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ रुपए की स्वीकृति की घोषणा की थी। परंतु आज तक अमल नहीं हुआ है। वसुंधरा राजे ने सुराज संकल्प यात्रा में तेजाजी मंदिर के विकास की घोषणा परबतसर में की थी। जिसके पूरे होने की आस अभी तक क्षेत्रवासी लगाए हैं। राजे ने सीएम बनने के बाद इसकी सुध नहीं ली है।

जोधपुर के राजा ने 1891 में बनाया मंदिर

जोधपुर के तत्कालीन राजा अभयसिंह ने 1891 में परबतसर में तेजाजी महाराज की मूर्ति की स्थापना की और खारिया तालाब खुदवाया था। किंवदंती है कि जोधपुर के राजा अभयसिंह के सपने में तेजाजी दिखे और उन्हें कहा कि परबतसर में तालाब के पास हल का जुड़ा जो पेड़ के पास लटका है वो हरा हो जाएगा। सन 1891 में जोधपुर राज्य के राजा अभय सिंह को सोते समय तेजाजी ने दर्शन दिए। तेजाजी ने राजा से कहा कि दक्षिण में मध्यप्रदेश तक के लोग मेरी पूजा करते हैं, लेकिन मारवाड़ में मुझे भूल चुके हैं। तेजाजी ने दर्शन देकर कहा कि मैं बिना मूर्ति के ही जाऊंगा तब राजा ने देवली दूसरी लाकर लगाई। राजा जब वहां पधारे हल का जूडा हरा हो गया तथा खारिया तालाब का पानी चमत्कारी ढंग से मीठा हो गया। जोधपुर के राजा अभय सिंह को खुशी हुई और उन्होंने लोक देवता वीर तेजाजी का मंदिर खारिया तालाब के किनारे पर बनवाया।