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सांसारिक विलासिताओं में समभाव रखना ही योग : अखिलेश्वरी

पावटा .खोस्या मंदिर में कथा करती हुई अखिलेश्वरी व सुनते हुए श्रोता। भास्कर न्यूज|पावटा कस्बे के खोस्या मंदिर...

Danik Bhaskar | May 02, 2018, 05:50 AM IST
पावटा .खोस्या मंदिर में कथा करती हुई अखिलेश्वरी व सुनते हुए श्रोता।

भास्कर न्यूज|पावटा

कस्बे के खोस्या मंदिर में मंन्दिर महन्त राधेश्याम कश्यप के सान्निध्य में चल रही संगीतमय भागवत ज्ञान गंगा यज्ञ में तीसरे दिन साध्वी श्री अखिलेश्वरी दीदी मां ने कथा प्रारंभ द्वितीय स्कन्द के ध्यान विधि व भगवान के विराट स्वरूप वर्णन से किया।

दीदी मां ने श्रीमद्भागवत जी के श्लोक “सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते” को सुनाते हुए कहा कि दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सभी जगह समभाव रखना योग है। अर्थात सांसारिक भव सागर में विलासिता, कामना , इच्छा,भोग आदि की बहुत सी वस्तुएं है जिनको कोई तो प्राप्त कर लेता है कोई नहीं करता लेकिन दोनों ही अवस्था में सभी को अपना समभाव वाला मन रखना चाहिए। बताया कि केवल योग से ही हम अपने मन, शरीर के चित्त को साफ कर सकते है। योग से हमारे कर्म, विचार, भाव सभी में निष्काम भाव की शुद्ध भावना आती जाती है।