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पीपलू के गांव डोडरिया में सैकड़ों साल पुराना बरगद धराशायी

पीपलू| गांव डोडरिया में सोमवार सुबह 8 बजे तालाब किनारे सैकड़ों साल पुराना धार्मिक आस्था से जुड़ा एक भारी बरगद का...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 15, 2018, 05:40 AM IST

पीपलू| गांव डोडरिया में सोमवार सुबह 8 बजे तालाब किनारे सैकड़ों साल पुराना धार्मिक आस्था से जुड़ा एक भारी बरगद का पेड़ अचानक धराशायी हो गया। काशीपुरा ग्राम पंचायत विकास अधिकारी कानाराम जाट ने ग्रामीणों से नुकसान की जानकारी ली। ग्रामीण रामकुंवार गुर्जर ने बताया कि राष्ट्रीय वृक्ष बरगद के पेड़ के गिरने से उसके नीचे बने भौमियाजी महाराज की घुमटी (स्थान) एवं टीनशेड, देवजी मंदिर दीवार थोड़ी सी टूट गई। हालांकि मौके पर किसी के नहीं होने से कोई जनहानि नहीं हुई और बड़ा हादसा होने से टल गया। जबकि बरगद के पेड़ के नीचे भौमियाजी, बालाजी, धूणी मैया, ठाकुरजी महाराज, देवजी मंदिर आदि धार्मिक स्थान, विद्यालय, चुग्गाघर बने हुए है, वहीं हैंडपंप भी लगा हुआ है, जहां पानी भरने वाले आते रहते है। वहीं छायादार स्थान होने तथा ठंडी हवा चलने से गर्मी के दिनों में कई लोग दिन में यहां विश्राम भी करते है। यह पेड़ धार्मिक आस्था भी जुड़ा हुआ था। यहां रोजाना कई श्रद्धालु पूजा करने आते है। ग्रामीणों ने बताया कि तालाब किनारे दो वटवृक्ष है, जो एक दूसरे से इस प्रकार से जुड़े थे, जैसे प्राकृतिक स्वागत द्वार बना हुआ हो। ऐसे में यह वटवृक्ष डोडरिया गांव की शान था, लेकिन अब एक वटवृक्ष के गिरने से गांव में यह नजारा देखने को नहीं मिलेगा। गांव के लोग धार्मिक आस्था से जुड़े वटवृक्ष के गिरने से मायूस हुए है।

पीपलू| गांव डोडरिया में सोमवार सुबह 8 बजे तालाब किनारे सैकड़ों साल पुराना धार्मिक आस्था से जुड़ा एक भारी बरगद का पेड़ अचानक धराशायी हो गया। काशीपुरा ग्राम पंचायत विकास अधिकारी कानाराम जाट ने ग्रामीणों से नुकसान की जानकारी ली। ग्रामीण रामकुंवार गुर्जर ने बताया कि राष्ट्रीय वृक्ष बरगद के पेड़ के गिरने से उसके नीचे बने भौमियाजी महाराज की घुमटी (स्थान) एवं टीनशेड, देवजी मंदिर दीवार थोड़ी सी टूट गई। हालांकि मौके पर किसी के नहीं होने से कोई जनहानि नहीं हुई और बड़ा हादसा होने से टल गया। जबकि बरगद के पेड़ के नीचे भौमियाजी, बालाजी, धूणी मैया, ठाकुरजी महाराज, देवजी मंदिर आदि धार्मिक स्थान, विद्यालय, चुग्गाघर बने हुए है, वहीं हैंडपंप भी लगा हुआ है, जहां पानी भरने वाले आते रहते है। वहीं छायादार स्थान होने तथा ठंडी हवा चलने से गर्मी के दिनों में कई लोग दिन में यहां विश्राम भी करते है। यह पेड़ धार्मिक आस्था भी जुड़ा हुआ था। यहां रोजाना कई श्रद्धालु पूजा करने आते है। ग्रामीणों ने बताया कि तालाब किनारे दो वटवृक्ष है, जो एक दूसरे से इस प्रकार से जुड़े थे, जैसे प्राकृतिक स्वागत द्वार बना हुआ हो। ऐसे में यह वटवृक्ष डोडरिया गांव की शान था, लेकिन अब एक वटवृक्ष के गिरने से गांव में यह नजारा देखने को नहीं मिलेगा। गांव के लोग धार्मिक आस्था से जुड़े वटवृक्ष के गिरने से मायूस हुए है।

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