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पीपलू में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे बजरी माफिया

पीपलू क्षेत्र की अंतिम सीमा स्थित नवरंगपुरा, ककराज खुर्द-ककराज कलां के बीच स्थित चरागाह भूमि का भूमाफिया...

Danik Bhaskar | Jul 04, 2018, 06:20 AM IST
पीपलू क्षेत्र की अंतिम सीमा स्थित नवरंगपुरा, ककराज खुर्द-ककराज कलां के बीच स्थित चरागाह भूमि का भूमाफिया प्रशासनिक मिलीभगत व अनदेखी से सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की चरागाह पर कब्जा करके इस कदर धज्जियां उड़ा रहे है कि रात तो दूर की बात रही दिन में भी बजरी निगर्मन धडल्ले से हो रहा है। यह सब प्रशासन की नजरों के सामने हो रहा है, लेकिन यह सब गोरखधंधा कथित तौर पर प्रशासनिक मिलीभगत से हो रहा है। बजरी माफिया के स्टॉक गांव से दूर जंगल में हैं। जहां आस-पास कोई निर्माण कार्य नहीं हो रहा है, लेकिन रात भर इन स्थानों पर बजरी का परिवहन धड़ल्ले से कई दिनों से हो रहा है।

नहीं कर सकते स्टॉक

खनिज विभाग द्वारा कुआ, वन, चरागाह, देवस्थान, सार्वजिनक स्थान से 45 मीटर दूरी पर लीज बजरी स्टॉक क्रेशर अथवा किसी भी व्यवसाय की स्वीकृति दी जाती है। ऐसे में सवाल ही उठता कि चरागाह भूमि में अवैध बजरी का स्टॉक किया जा सकता है, लेकिन बजरी माफियाओं ने प्रशासन से मिलीभगत कर चरागाह भूमि पर पेड़ों को उखाड़ कर करीब सौ ट्रैक्टर-ट्राॅली बजरी स्टॉक कर दिया है। जो कि सभी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे है। वहीं प्रशासनिक शह से बजरी माफियाओं को खुले आम बढावा मिल रहा हैं।

यह पेड़ हुए नष्ट

ककराज चरागाह भूमि पर बीस वर्ष पहले वन विभाग ने खाई खुदवाते हुए करीब दस हजार गड्‌ढे बनाए गए थे। इनमें खुमटा, देशी बंबूल, खेजड़ी, ओरेंज के बीज लगाते हुए पौधारोपण किया गया था। वन विभाग द्वारा करीबन पांच वर्षों तक वृक्षों की सुरक्षा की गई थी और उस समय तक सभी प्रजाति के पौधे थे। उनकी ऊंचाई पांच फीट से ऊपर थी।

कहीं भी खाली कर देते हैं

बजरी माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत हैकि उन्हें तुरन्त प्रशासन की कार्यवाही की सूचना मिल जाती है, ऐसे में वह कहीं भी बजरी स्टॉक को खाली करके अपना वाहन कही खडा कर देते है। जिससे बीच रास्ते में बजरी खाली कर देने पर कईजगह आवाजाही प्रभावित हो जाती है। सोहेला समीप राष्ट्रीय राजमार्ग पर ऐसे बजरी के मुख्य रास्ते पर हो रखे कई ढेर देखे जा सकते है। बनास नदी पेटे से प्रशासन ने अभी तक कडी कार्रवाई नहीं की है। इसके चलते बनास पेटे में बजरी का खनन धडल्ले से किया जा रहा है। प्रशासन कुछ नाम मात्र की कभी कभी कार्यवाही कर इस अवैध गोरखधंधे पर अंकुश लगाने का दंभ भरता है, लेकिन स्टॉक को जानकारी देने के बाद भी जब्त नहीं करना प्रशासन की मिलीभगत को स्पष्ट करता दिखाता है। एसडीएम अर्पिता सोनी ने बताया कि ना तो चरागाह भूमि पर स्टॉक करने की कोई शिकायत कभी मिली है और न ही कोई कार्रवाई होने की जानकारी उन्हें मिली है।