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समेलिया में फूल डोल महोत्सव, उमड़े श्रद्धालु

फागी| पंचायत किशोरपुरा के ग्राम समेलिया स्थित भगवान द्वारकाधीश रणछोड़ नाथ मंदिर क्षेत्र के धर्मावलंबियों की...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 04:00 AM IST
फागी| पंचायत किशोरपुरा के ग्राम समेलिया स्थित भगवान द्वारकाधीश रणछोड़ नाथ मंदिर क्षेत्र के धर्मावलंबियों की आस्था का केन्द्र है। प्रतिवर्ष होली पर यहां लगने वाले फूल डोल महोत्सव मेले में हजारों नर-नारियां दर्शनार्थ आकर पूजा-अर्चना करते नजर आए।चार भुजाधारी भगवान द्वारकाधीश की प्रतिमा की दाढ़ी में हीरा जड़ा हुआ है एवं प्रतिमा के दाएं बाएं राधा और रूकमणि विराजमान है। मंदिर के गर्भ ग्रह के उपर विशाल शिखर बंद है। मंदिर के चौक में द्वारकाधीश प्रतिमा के ठीक सामने गरूड़जी विराजमान है तथा बाएं और कोने में शिव पंचायत विराजमान है। मंदिर की बनावट ऐसी है कि दूसरी सीढ़ी पर ही खड़े श्रद्धालु द्वारकाधीश भगवान के दर्शन हो जातेे है। यहां धार्मिक स्थल अध्यात्म एवं संस्कृति का अदभुत संगम है। प्रति वर्ष मेले के दौरान हजारों श्रद्धालु दर्शन कर मन्नत मांगते है। यह प्राचीन एवं ऐतिहासिक मंदिर वास्तुशिल्प एवं कला का अनूठा नमूना है। प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी होली पर समेलिया ग्राम स्थित द्वारकाधीश भगवान फूलडोल महोत्सव दो दिवसीय मेला समारोह पूर्वक संपन्न हुआ। इस मेले में फागी क्षेत्र के गांवों के अलावा चाकसू, दूदू, बगरू, मालपुरा, टोंक, लावा सहित कई कस्बों व गांवों के हजारों श्रद्वालु शिरकत कर रणछोड़ नाथ भगवान के दर्शन कर श्रद्धालु अपनी मन इच्छा मन्नत मांगते है। मेला समिति प्रवक्ता मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि होली के दिन से ही मंदिर में दर्शनार्थियों का आना शुरू हो जाता है। जो धुलैंडी तक जारी रहता है। मेले संयोजक ने बताया कि मेले की शुरूआत ध्वजारोहण के साथ हुई तथा संपूर्ण रात्री भजन संध्या में भक्ति संगीत का आयोजन हुआ। मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम व घुड़ दौड़ व ऊंट दौड़ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। जिसमें विजेताओं को ग्राम पंचायत की ओर से पारितोषिक वितरित किए गए। 16वीं सदी में निर्मित इस मंदिर के मेले की परंपराओं को आज भी बरकरार रखे हुए है। मेले के दौरान द्वारकाधीश मंदिर को रंग-बिरंगी झालरों व रोशनी से सजाया गया। द्वारकाधीश भगवान की झांकी सजाई गई। द्वारकाधीश भगवान व रणछोड़ नाथ की जयकारे से मंदिर गंूज उठा और मंदिर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। मेले में ग्रामीण पुरुष पाग पगड़ी व रंग बिरंगी पोशाकों में सजकर एवं महिलाएं राजस्थानी ओढ़नी पहनकर मेले का आनन्द लेती देखी गई।