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सच्चे मन से याद करने पर भगवान भक्तों की रक्षा के लिए स्वयं आते हैं : संत माणकराम

Dainik Bhaskar

May 28, 2018, 05:30 AM IST

Pokran News - भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक) शहर के जाटाबास में चल रही है अधिकमास की कथा में रविवार को श्रद्धालुओं की भीड़...

सच्चे मन से याद करने पर भगवान भक्तों की रक्षा के लिए स्वयं आते हैं : संत माणकराम
भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक)

शहर के जाटाबास में चल रही है अधिकमास की कथा में रविवार को श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। अधिक मास की कथा चलने से शहर सहित आस-पास क्षेत्र का वातावरण धार्मिक मय हो गया। वहीं श्रद्धालुओं द्वारा अपने निर्धारित कार्यक्रमों को निपटाकर कथा स्थल पर पहुंचते दिखाई दे रहे है। कथा प्रारंभ होने से पहले ही श्रद्धालुओं की कथा स्थल पर रेलमपेल लग जाती है। कथा स्थल पर कथा शुभारंभ होने से पहले कई श्रद्धालुओं ने संत माणकराम, गोपालदास, शिवराम सहित कई संतों की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। पूजा अर्चना के साथ ही श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं ने महाराज के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया तथा पुण्य लाभ प्राप्त किया। कथा में प्रवचन देते महाराज ने कहा कि भगवान को यदि सच्चे मन से याद किया जाए तो वे अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए स्वयं आते हैं। उन्होंने कहा नानी बाई मारो की शुरूआत नरसी भगत के जीवन से हुई। नरसी जन्म से ही गूंगे बहरे थे। वो अपनी दादी के पास रहते थे। उनका एक भाई व भाभी थी। उन्होंने कहा कि भाभी का स्वभाव कड़़क था एक संत की कृपा से नरसी की आवाज गई तथा उनका बहरापन भी ठीक हो गया। उन्होंने कहा कि नरसी के माता-पिता गांव में एक महामारी का शिकार हो गए। महाराज ने कहा कि नरसी कृष्ण के अनन्य भक्त थे। वे उन्हीं की भक्ति में लग गए तथा उधर नानीबाई ने पुत्री को जन्म दिया और पुत्री विवाह लायक हो गई। लेकिन नरसी को कोई खबर नहीं थी। महाराज ने कहा कि लड़की के विवाह पर ननिहाल की तरफ भात भरने की रस्म के चलते नरसी को सूचित किया गया तथा नरसी के पास देने को कुछ नहीं था। उसने भाई-बंधु से मदद की गुहार लगाई लेकिन मदद तो दूर कोई भी चलने तक तैयार नहीं हुआ। नरसी ने अंत में टूटी फूटी बैलगाड़ी लेकर नरसी खुद ही लड़की के ससुराल के लिए निकल पड़े। महाराज ने कहा कि उससे पूर्व ही भगवान कृष्ण ने उनके घर पहले से जेवर कपड़े से भर दिया जो सच्चे भक्तों पर भगवान की कृपा हुई। महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन को अनमोल बताते हुए भक्तों को सदुपयोग करने की बात कहीं एवं भगवान का भजन करने से जीवन का कल्याण होता है।

नरसी ने लोगों से अपमानित होकर भी बेटी भरा मायरा : कथा में प्रवचन देते संत माणकराम ने कहा कि नरसी एक गरीब ब्राह्णम थे। मायरा भरना नामुमकिन था लेकिन उलटे मायरे में उच्च कुलीन वर्ग के लोगों के स्थान पर 15-16 वैष्णव भक्तों की टोली के साथ अपने बेटी के घर पर पहुंच गए। महाराज ने कहा कि नरसी की मायरे की कम औकात के चलते लोगों ने नरसी को तरह-तरह के अपमान किया। महाराज ने कहा कि नरसी ने लोगों द्वारा अपमान को सहन कर अपनी बेटी का मायरा भरा। उन्होंने कहा कि नरसी के ऊपर भगवान कृष्ण की मेहरबानी हुई तो कृष्ण सेठ बनकर नरसी के बेटी के घर पर पहुंचे तथा बेटी को जोरदार मायरा भरा। जिस पर वहां पर उपस्थित लोग एक बार अचंभित हो गए तथा सभी लोग नरसी के सामने देखने के लिए मजबूर हो गए। सभी लोगों ने नरसी के पांव पकड़े।

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