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विश्व पटल पर पोकरण का नाम, लेकिन जिले के पहले रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का टोटा

जैसलमेर जिले के सबसे पुराने एवं पहले रेलवे स्टेशन पोकरण के साथ भारतीय रेल विभाग हमेशा से सौतेला व्यवहार करता आ रहा...

Danik Bhaskar | Jun 25, 2018, 05:35 AM IST
जैसलमेर जिले के सबसे पुराने एवं पहले रेलवे स्टेशन पोकरण के साथ भारतीय रेल विभाग हमेशा से सौतेला व्यवहार करता आ रहा है। रेलवे स्टेशन पर विभाग की करोड़ों रुपए की चल एवं अचल सम्पति होने के बावजूद विभाग पोकरण उपखण्ड के एक मात्र बड़े रेलवे स्टेशन के साथ उपेक्षित व्यवहार कर रहा है । तीन लाख की आबादी वाले पोकरण उपखण्ड का यह रेलवेे स्टेशन जिले का सबसे पुराना रेलवे स्टेशन है। उसके बावजूद रेलवे विभाग द्वारा समय-समय पर जैसलमेर के लिए प्रारंभ की गई नई गाड़ियां से पोकरण रेलवे स्टेशन को वंचित रखा गया। रेलों के आवागमन में कमी होने के कारण रेलवेे स्टेशन पर स्थित विभाग की करोड़ों रुपयों की सम्पति नष्ट होने के कगार पर है। इतना ही नहीं विभाग के उदासीन रवैये के चलते सामरिक एवं धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाओं का भी नितांत अभाव है।


पोकरण (आंचलिक) सार संभाल के अभाव में रेलवे विभाग की करोड़ों रुपए की संपति हो रही है नष्ट

लावारिस हालत में पड़ी है करोड़ों की सम्पति

लगभग 30 वर्ष पूर्व पोकरण रेलवे स्टेशन पर पर्याप्त मात्रा में विभागीय कर्मचारी तैनात होने के कारण रेल विभाग द्वारा उनके रहने के लिए लगभग 125 आवासों का निर्माण करवाया था। तत्कालीन समय में इन आवासों का पर्याप्त मात्रा में उपयोग भी होता था। मगर बीते 13 वर्षों से पोकरण रेलवेे स्टेशन के साथ बरती जा रही उपेक्षा के कारण करोड़ों रुपयों की लागत से बने इन आवासों का लगता है कोई धणीधोरी नहीं है। लम्बे समय से यह आवास खाली होने के कारण लोगों ने इनके दरवाजे एवं खिड़कियां तोड़ कर ले जाने शुरू कर दिए हैं। रेलवे स्टेशन पर आवासों के अतिरिक्त गार्ड एवं चालक के विश्राम गृह के साथ साथ अनेक भवन बने हुए हैं। मगर इन भवनों का भी वर्तमान में कोई उपयोग नहीं हो रहा है।


यात्रियों के लिए न तो पानी और न ही छाया की व्यवस्था

आजादी से पहले एवं जिले में सबसे पहले स्थापित पोकरण रेलवे स्टेशन पर आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव देखने को मिल रहा है। प्रति वर्ष इस स्टेशन से लाखों की संख्या में यात्री यात्रा करते हैं मगर यात्रियों के लिए स्टेशन पर पीने के लिए ठण्डा पानी भी उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के बैठने के लिए छाया की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। रेलों के आवागमन के समय इस भीषण गर्मी में यात्री रेलवे स्टेशन पर लगे कुछ पेड़ों के नीचे बैठकर धूप से बचने का जतन करते हैं ।

एकल खिड़की ने बढ़ाई यात्रियों की परेशानी

यहां यात्रियों के लिए आरक्षण की सुविधा तो शुरू कर दी है, लेकिन उसके लिए अतिरिक्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। ऐसे में पोकरण से जाने वाले यात्रियों को लंबी लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। विभाग द्वारा न तो आरक्षण के लिए अतिरिक्त खिड़की की व्यवस्था की गई है और न ही किसी कर्मचारी की नियुक्ति की गई है। ऐसे में स्टेशन मास्टर हीआरक्षण तथा टिकटों का वितरण करते हैं।