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चालीस वर्ष के बाद शिविर में कमूखां को मिला खातेदारी जमीन का मालिकाना हक

भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक) पंचायत समिति सांकड़ा के ग्राम पंचायत माडवा में गुरुवार को राजस्व लोक अदालत...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 25, 2018, 05:55 AM IST

भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक)

पंचायत समिति सांकड़ा के ग्राम पंचायत माडवा में गुरुवार को राजस्व लोक अदालत शिविर आयोजित किया गया। गांव में आयोजित शिविर में कई वर्षों से लंबित पड़े प्रकरणों का निस्तारण कर ग्रामीणों को राहत पहुंचाई गई। पंचायत माडवा में आयोजित राजस्व लोक अदालत शिविर को संबोधित करते क्षेत्रीय विधायक शैतानसिंह राठौड़ ने कहा कि ग्रामीणों के लिए यह शिविर वरदान साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्य कार्यालय में नहीं होते है तथा शिविर स्थल पर कई वर्षों से लंबित पड़े कार्यो का निस्तारण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं को लाभ इन दिनों ग्रामीणों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार की ओर कोई योजनाओं की कमी नहीं है। उन्होंने सभी लोगो राज्य सरकार व केन्द्र सरकार द्वारा संचालित सभी योजनाओं का लाभ लेने का आह्वान किया। इसी प्रकार शिविर प्रभारी एवं एसडीएम रेणु सैनी ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार की सभी योजनाओं क लाभ लेना सभी लोगों को हक है। सैनी ने कहा कि हाल ही में संचालित सभी कल्याणकारी योजनाओं लाभ देने के लिए प्रशासन द्वारा प्रसार प्रचार किया जा रहा है तथा सभी लोगों को केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं से लाभांवित हो। सैनी ने कहा कि कल्याणकारी योजनाओं से लाभांवित होने के लिए लोगों को पहले से ही योजनाओं की जानकारी दी गई है। तथा सभी लोगों सरकार की योजनाओं का लाभ लेना चाहिए।

चालीस वर्ष के बाद कमूखां का मिला न्याय : लोक अदालत शिविर में माडवा निवासी कमूखां को चालीस वर्ष के बाद मालिकाना हक दिया गया। शिविर प्रभारी एवं एसडीएम रेणु सैनी ने बताया कि शिविर में एक सफलता की कहानी साबित हुई है। लोक अदालत शिविर में कमूखां के लिए यह शिविर वरदान साबित हुआ। सैनी ने बताया कि माडवा में कमूखां का नाम राजस्व रेकर्ड में पिछले चालीस वर्ष से गलत नाम चल रहा है। जिससे कमूखां को राजस्व संबंधी कार्य के लिए नाम सही नहीं होने के कारण उन्हें किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही थी। राजस्व रेकर्ड में कायमदीन के नाम माडवा के खसरा नंबर 1003110 व 1007172 रकबा 24.10 बीघा भूमि जमाबंदी में कायमदीन नाम चल रहा था। सैनी ने शिविर स्थल पर ही कमूखां के सरकारी दस्तावेज की जांच की गई जांच के दौरान कमूखां का नाम सही पाया गया। जिस पर शिविर प्रभारी ने हाथोहाथ राजस्व रेकर्ड में कायमदीन के नाम कमूखां का नाम राजस्व रेकर्ड में अंकित दर्ज कर कमूखां को चालीस वर्ष के बाद मालिकाना हक मिला।

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