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गौ सेवा से बढ़कर कोई पुनीत कार्य नहीं : संत माणकराम / गौ सेवा से बढ़कर कोई पुनीत कार्य नहीं : संत माणकराम

Bhaskar News Network

Jun 08, 2018, 05:55 AM IST

Pokran News - पोकरण (आंचलिक) | शहर के जटाबास स्थित सेवोजी भोमियाजी माली समाज के सभा भवन में चल रही है नानीबाई मायरो कथा के 26वें दिन...

गौ सेवा से बढ़कर कोई पुनीत कार्य नहीं : संत माणकराम
पोकरण (आंचलिक) | शहर के जटाबास स्थित सेवोजी भोमियाजी माली समाज के सभा भवन में चल रही है नानीबाई मायरो कथा के 26वें दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं को हुजूम देखना को मिला। कथा प्रारंभ होने से पहले की कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने मिला। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं को इतना हुजूम उमड़ा पैर रखने की भी जगह नहीं मिली। कथा चलने से शहर सहित आस-पास क्षेत्र का वातावरण एक दम धार्मिक वातावरण बन गया। कथा की चचाएं जहां पर भी जहां वहां पर नानी बाई मायरों की कथा की चर्चाएं सुनने में आ रही है। कथा के प्रारंभ से पहले कई गणमान्य नागरिकों द्वारा कथा वाचक माणकराम, संत गोपालदास, शिवराम महाराज की विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। पूजा अर्चना के बाद संतों की आरती उतारकर कथा का शुभारंभ किया गया। कथा में प्रवचन देते कथा वाचक माणकराम ने कहा कि हर कोई भी व्यक्ति के पुनीत कार्य करने की इच्छा होती है तो सबसे पहले गौ सेवा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गौ सेवा ही नारायण सेवा है। इस सेवा से हर आदमी के घर में खुशी बनी रहती है। उन्होंने नरसी व कृष्ण के बीच प्रेम कहानी का उदाहरण देते हुए कहा कि नरसी के पास कुछ भी नहीं था तथा कई लोगों ने उसे अपमानित करते थे। संत ने कहा कि जब नरसी की बेटी का मायरा का समय आया तो गांव के लोग नरसी के ऊपर हंसने लगे तथा नरसी के क्या मायरा भरेगा। नरसी से लोगों की इस बात को नजर अंदाज करते हुए जब माराय का समय आ तो गांव के लोगों को निमंत्रण ने दिया तथा भेंट के स्वरूप रुपए मांगे तो लोगों ने उनके तना सकने लगे। महाराज ने कहा कि नरसी ने टूटी फूटी बैलगाड़ी में मायरा भरने के लिए रवाना हुए तथा गांव के कोई भी लोग साथ नहीं चले। बीच रास्ते में ही भगवान कृष्ण की नरसी पर मेहरबानी हुई तो नरसी भी एकदम अचंभित हो गए तथा यह मायरा कहां से आया। नरसी ने अपनी बेटी का भरपूर मायरा भरा तथा गांव के लोग नरसी के सामने देखते रह गए।

जैसलमेर | स्थानीय दर्जी पाड़ा स्थित पीपा भवन में पुरुषोत्तम मास की कथा के 21वें दिन कथा वाचक पुरुषोत्तम श्रीमाली ने कथा में द्रोपदी के पूर्व जन्म का वर्णन किया। कथा में अधिक मास में व्रत नियम एवं पूजा का विधान बताया।

लखा. भागवत कथा के अंतिम दिन उमड़े श्रद्धालु।

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