Hindi News »Rajasthan »Pokran» बांदोलाई तालाब में समाधियों का नहीं हो रहा है संरक्षण प्रशासनिक उपेक्षा के कारण ऐतिहासिक धरोहर खतरे में

बांदोलाई तालाब में समाधियों का नहीं हो रहा है संरक्षण प्रशासनिक उपेक्षा के कारण ऐतिहासिक धरोहर खतरे में

भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक) सामाजिक उपेक्षा एवं उचित देखरेख के अभाव में क्षेत्र की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 30, 2018, 05:55 AM IST

बांदोलाई तालाब में समाधियों का नहीं हो रहा है संरक्षण प्रशासनिक उपेक्षा के कारण ऐतिहासिक धरोहर खतरे में
भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक)

सामाजिक उपेक्षा एवं उचित देखरेख के अभाव में क्षेत्र की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहर बांदोलाई तालाब एवं यहां पर स्थित चमत्कारिक महापुरुष स्वामी डूंगरपुरी की जीवित समाधि स्थल नष्ट प्राय होने के कगार पर पहुंच गई है। एक तरफ जहां केन्द्र एवं राज्य सरकार ऐतिहासिक धरोहरों एवं पर्यटन स्थलों के विकास के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपए खर्च कर रही है वहीं दूसरी ओर किसी जमाने में पूरे क्षेत्र में विख्यात रहे इस स्थान के विकास की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

सैकड़ों वर्ष पूर्व क्षेत्र के प्रसिद्घ संत डूंगरपुरी महाराज ने इसी बांदोलाई तालाब पर जीवित समाधि ली थी। तब से पोकरण उपखण्ड सहित निकटवर्ती बाड़मेर जिले एवं फलोदी तहसील के अनेक गांवों के लोग यहां पर आते थे। जानकारी के अनुसार संत डूंगरपुरी के चमत्कारों से प्रभावित होने से यह स्थान अनेक लोगों के लिए आस्था केन्द्र बन गया। कालांतर में इस स्थान की उचित देखभाल होने के यहां पर अन्नक्षेत्र एवं एक गौशाला का भी संचालन किया जाता था। मगर धीरे धीरे यह स्थान लोगों की उपेक्षा का शिकार होने लगा। आज हालत यह है कि बांदोलाई पर स्थित महंत डूंगरपुरी की जीवित समाधि सहित अन्य संतों की समाधियां भी नष्ट प्राय होने की स्थिति में पहुंच गई है। अब इसकी देखभाल न तो कोई सामाजिक संस्था कर रही है और न ही सरकार इसे विकसित करने पर ध्यान दे रही है। ये समाधियां दिनोंदिन नष्ट हो रही हैं।

इस स्थान पर विक्रम संवत 1756 से लेकर 2008 तक 52 संतों ने ली थी जीवित समाधियां

कभी यहां पिकनिक होती थी अब झाड़ियों के चलते तालाब का अस्तित्व संकट में

एक जमाना था जब शहर के लोग बरसात के मौसम में बांदोलाई तालाब पर पिकनिक मनाने तथा गोठ घुघरी करने के लिए जाया करते थे। इस मौसम में यहां पर लोगों की हर समय चहल पहल रहती थी। धीरे धीरे यह स्थान सूना हो जाने के कारण लोगों का यहां पर आना जाना पूरी तरह बंद हो गया। उसके परिणाम स्वरूप तालाब सहित पूरे परिसर में बबूल की झाडिय़ां इस कदर फैल गई है कि वहां से अकेले व्यक्ति का निकलना भी दूभर हो गया है। लगभग बीस फुट उंचाई में लगी बबूल की झाडिय़ां एकदम घाट के किनारे तक फैल जाने के कारण तालाब का अस्तित्व भी खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।

बांदोलाई क्षेत्र में जहां पर भी राजस्व की भूमि पर लोगों द्वारा अतिक्रमण किया गया है तो उसकी जांच करवाकर जांच रिपोर्ट आते ही अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की जाएगी। बीरमाराम चौधरी, कार्यवाहक तहसीलदार पोकरण

दो सौ बीघा भूमि पर नगर पालिका ने काट दिए भूखंड

बांदोलाई तालाब पर संत डूंगरपुरी के चमत्कारों से प्रभावित होकर तत्कालीन ठाकुर ने इस स्थान के नाम लगभग 13 सौ बीघा भूमि आवंटित की थी। उस समय यह स्थान भी डूंगरपुरी के ठिकाणे के नाम से विख्यात था। बीते लगभग तीस वर्षों के दौरान बांदोलाई की देखरेख नहीं होने के कारण सैकड़ों बीघा भूमि पर अतिक्रमणकारियों ने अपने कब्जा जमा लिए। इतना ही नहीं इस ऐतिहासिक धरोहर के मालिकों द्वारा पैरवी नहीं करने के परिणाम स्वरूप बांदोलाई की लगभग दो सौ बीघा भूमि पर नगरपालिका ने भूखंड काटकर लोगों को आवंटित कर दिए।

सरकारी उपेक्षा के चलते तालाब की हुई दुर्दशा

वैसे तो सरकार ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा के लिए अनेक योजनाएं संचालित करती है। मगर इस धरोहर के प्रति प्रशासन का पूरी तरह उपेक्षित रवैया अपनाए हुए है। जिसके कारण आज यह स्थान बदतर हालत में पहुंच गया है। समय समय पर चलने वाले अकाल राहत कार्यों एवं अन्य विकास योजनाओं के तहत यदि इस स्थान के विकास की ओर थोड़ा बहुत भी ध्यान दिया जाता तो यह धरोहर आज नष्ट होने के कगार पर नहीं पहुंचती।

ऐतिहासिक धरोहर बांदोलाई पर बैठे महंत शंभू पुरी ने बताया कि वैसे तो यहां पर 52 संतो ने जीवित समाधियां ली है। इनमें से विक्रम संवत 1756 में संत भावपुरी, विक्रम संवत 1880 में जुगतपुरी, विक्रम संवत 1899 में गुरू जोगपुरी उसके शिष्य जगतपुरी ने जीवित समाधि ली। इसी प्रकार विक्रम संवत 1914 में संत मोतीपुरी, विक्रम संवत 1942 में दरियारपुरी, विक्रम संवत 1965 में हरदतपुरी तथा विक्रम संवत 2008 में अंतिम जीवित समाधि के रूप में चिमनपुरी ने समाधि ली। उन्होंने बताया कि आज भी इन समाधियों के चमत्कारों से प्रभावित होकर अनेक गांवों के लोग दर्शनार्थ यहां आते हैं।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Pokran

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×