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मनुष्य को धैर्य से काम करना चाहिए इससे सफलता मिलती है: माणकराम

Pokran News - पोकरण . कथा में उपस्थित श्रद्धालु। भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक) शहर के जटाबास स्थित सेवोजी भोमियाजी माली...

Dainik Bhaskar

Jun 10, 2018, 06:00 AM IST
मनुष्य को धैर्य से काम करना चाहिए इससे सफलता मिलती है: माणकराम
पोकरण . कथा में उपस्थित श्रद्धालु।

भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक)

शहर के जटाबास स्थित सेवोजी भोमियाजी माली समाज सभा भवन में चल रही नानी बाई मायरा कथा के 28वें दिन कथा स्थल पर आस-पास क्षेत्र के श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली।

कथा में प्रवचन देते कथा वाचक माणकराम ने कहा कि हर व्यक्ति को धैर्य के साथ काम करना चाहिए । धैर्य ही हमेशा व्यक्ति को आगे बढ़ता है। संत ने कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा गरीब लोगों का सहयोग करता है तथा बुद्धिमान व्यक्ति अपने धन कमाने के साथ-साथ दान भी करता है वह बुद्धिमान व्यक्ति कहलाता है।

उन्होंने कहा कि बुद्धिमान व्यक्ति कमजोर परिवार के पीछे कभी भी नहीं पड़ता है। भगवान ने हर आदमी को बुद्घि को देकर काम करने के लिए कहा, लेकिन कोई भी व्यक्ति भी अपनी बुद्घि लगाकर काम नहीं करता है। जिससे आज पूरा हिन्दुस्तान आपस में बंटा हुआ है। कथा वाचक माणकराम ने कहा कि जब नरसिंह के मायरा में गांव के लोगों ने एक बार मायरे की मजाक उड़ाई तथा गांव वालों के लोगों ने कह कि नरसिंह के पास क्या है जो मायरा ले जाएगा। नरसिंह ने मायरे में तंबूरिया गाड़ी में भर दिया तथा लोगों को मायरा में चलने लिए आग्रह किया तो गांव वालों ने मायरा में चलने के लिए मना करना दिया, लेकिन गांव वालों को नरसिंह की मदद करनी चाहिए उलटा ही उनकी मजाक उड़ाई जा रही थी। नरसिंह ने बार-बार गांव वालों को मायरे में चलने लिए कहा तो गांव वालों में कहा कि आपके पास क्या है जो मायरा ले जाएगा। नरसिंह ने कहा कि धनपति के साथ मत चलो तथा पैसों को मत देखो। लेकिन गांव के लोग नहीं माने। तो उसी दौरान नरसिंह पर ठाकुर प्रसन्न हो गए। नरसिंह को कहा कि मायरा में चलो। मायरे गए तो वहां करोड़ों रुपए का धन ही धन दिखाई दिया तथा वहां पर चारो तरफ बात फैली तो गांव वाले नरसिंह के मायरे में शामिल हुए।

धर्म-समाज

जैसलमेर | स्थानीय गांधी कालोनी स्थित पीपलेश्वर महादेव मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा वाचक भंवरलाल व्यास ने भागवत कथा में श्री कृष्ण का जन्म व सांसारिक व्यवस्था, वर्ण व्यस्था, मानव के उद्धार के लिए वास्तविक सद्गुणों के संबंध में कहानी सुनाकर विस्तृत जानकारी देकर समझाया गया। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से पुण्य मिलता है एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।

वैदिक मंत्रों के साथ पूजन पुरुषोत्तमदास श्रीमाली द्वारा किया गया इनके साथ ही प्रमोद, सुमन, दुर्गा व्यास द्वारा भजनों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में आरती व श्लोकचार्य के साथ प्रसाद वितरण कर चौथे दिन की कथा का समापन किया गया। कार्यक्रम में आरसी व्यास, गोरधनदत थानवी, मधुसूदन शर्मा, सुजानाराम खत्री सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे। गडसी व्यास परिवार द्वारा पुष्करणा भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक शैलेंद्र व्यास ने मंगलाचरण सुनाते हुए बताया कि कथा श्रवण में सभी वर्ण का अधिकार समान रुप से है। यह कथा जीव को परम सत्य से परिचय करवाती है एवं प्रत्येक व्यक्ति को उस सत्य को जानने का अधिकार है। यह कथा साक्षात कल्पवृक्ष है जिससे चारों पुरुषार्थ सिद्ध हो जाते है। केवल कथा श्रवण ही ऐसा फल है जिसमें गुठली व छिलका नहीं है केवल रस ही रस है और इस रस से ओत प्रोत फल का आस्वादन जीवन पर्यंत करते रहना चाहिए। इस फल का सेवन मुख से नहीं कानों से किया जाता है। श्रीमद्भागवत की रचना की कथा सुनाते हुए व्यास ने बताया कि नारद ने व्यास जी को संतोष की मुद्रा में देखा तो उन्हें आश्चर्य हुआ नारद ने वेद व्यासजी को भगवान की लीला कथाओं को लिखने के लिए प्रेरित किया और कहां जीव भगवान की कथा में जब डूब जाता है तो सारे अमंगल नष्ट हो जाते है एवं मन को शांति प्राप्त होती है। कथा प्रसंग में दुर्योधन के स्वभाव का वर्णन करते हुए बताया कि दुष्ट व्यक्ति अंत समय तक दुष्टता का त्याग नहीं करता।

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