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पोकरण शहर में न छाया और न ही पानी, बस परेशानी

Pokran News - शहरी क्षेत्र में सार्वजनिक स्थलों पर न पानी की समुचित व्यवस्था है और ना ही छाया की। ऐसे में शहरवासियों को भीषण...

Dainik Bhaskar

Jun 10, 2018, 06:00 AM IST
पोकरण शहर में न छाया और न ही पानी, बस परेशानी
शहरी क्षेत्र में सार्वजनिक स्थलों पर न पानी की समुचित व्यवस्था है और ना ही छाया की। ऐसे में शहरवासियों को भीषण गर्मी में मुश्किल उठानी पड़ रही है। चाहे रेलवे स्टेशन हो या फिर बस स्टैंड, और तो और सरकारी कार्यालयों में भी छाया पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। सार्वजनिक स्थलों पर स्थानीय प्रशासन द्वारा गर्मी को देखते हुए किसी भी प्रकार की विशेष व्यवस्थाएं नहीं की जा रही है। क्षेत्र में भीषण गर्मी तथा चिलचिलाती धूप के कारण लोग बाग तेज गर्मी के थपेड़ों को सहने के लिए विवश है। उनके लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं है। कहीं-कहीं पानी की व्यवस्था भी थी लेकिन पानी इतना गर्म था कि उससे हाथ धोना भी मुश्किल हो रहा था। इसी प्रकार छाया व बैठने के लिए पर्याप्त स्थान भी नहीं है।

स्थानीय रेलवे स्टेशन पर एक टीन शैड लगा हुआ है। लेकिन वह भी पर्याप्त नहीं होने के कारण लोगों को इस भीषण गर्मी में परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके अलावा पूरा प्लेटफार्म तपती धूप में खुले आसमान के नीचे है। वहीं प्लेटफार्म पर पेड़ों के नीचे पत्थरों की चौकी बनाई गई है। लेकिन वह भी गर्मी में तपने के कारण वहां पर बैठना भी मुश्किल है। तेज धूप में भट्टी की तरह तपन के चलते यहां पर बैठना नामुमकिन है।

रेलवे स्टेशन

शहर स्थित रोडवेज बस स्टैंड असुविधाओं से भरा पड़ा है। रोडवेज बस स्टैंड पर लगे छपरे के नीचे दुकानें चल रही है तो वहां पानी के लिए कोई पर्याप्त सुविधा नहीं है। इसी प्रकार शहर के मुख्य मार्ग पर स्थित बस स्टैंड पर भी असुविधाएं है। प्राइवेट बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए न तो पानी की व्यवस्था है और न ही छाया की।

बस स्टैंड

अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी नहीं है सुविधाएं

शहरी क्षेत्र में भीषण गर्मी से बचने के लिए किसी प्रकार की सुविधाएं नहीं है। राह चलते अगर किसी को प्यास लग जाए तो उसे पानी पीने के लिए किसी निजी दुकान या घर में जाना होगा। सार्वजनिक प्याऊ पर ठंडा पानी नहीं मिलता या फिर कभी-कभी पानी ही नहीं होता है। इसी प्रकार शहरी क्षेत्र में दो पल सुकून से बैठने के लिए कोई उचित स्थान नहीं है। न ही पार्क है और न ही उद्यान।



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