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गोचार के लिए आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण

भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक) उपखंड क्षेत्र के ग्रामीणों, किसानों एवं पशुपालकों ने अपनी ज्वलंत समस्याओं के...

Danik Bhaskar | May 13, 2018, 06:05 AM IST
भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक)

उपखंड क्षेत्र के ग्रामीणों, किसानों एवं पशुपालकों ने अपनी ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन को कई बार अवगत करवाया। लेकिन प्रशासन द्वारा अभी तक इन समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। जिसके चलते पशुपालकों व तथा किसानों को तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की ज्वलंत समस्याओं का समाधान करने के लिए किसानों द्वारा उपखंड मुख्यालय पर धरना एवं विरोध प्रदर्शन करने के बाद भी किसानों की समस्या का आज तक समाधान नहीं हुआ। वहीं पशुओं के लिए आरक्षित की गई भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है। इसको लेकर अभी तक प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिसके कारण किसानों में प्रशासन के खिलाफ दिनों दिन रोष बढ़ता जा रहा है।

लंबे समय से किसान कर रहें हैं मंाग

किसानों ने बताया कि उपखंड क्षेत्र में पशुओं के चरने के लिए आरक्षित भूमि करने, पशुओं की संख्या के अनुपात में गोचर भूमि रखने, कटाण मार्गों को अतिक्रमण से मुक्त करने, भूमि के हरे वृक्षों को सुरक्षित रखने, तालाबों एवं नाडियों राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने, ओरण भूमि को वरियता के आधार पर आवंटित करने, पानी की आवक के लिए आगोर एवं पायथन अंकित करने, आगोरों पर असामाजिक तत्वों द्वारा अतिक्रमण से मुक्त करने, ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षित रखने, किसानों के जाने आने के लिए खेत में कटाण मार्ग दर्ज करने, प्रत्येक गांव या पंचायत में गवाई नाडी को राजस्व रिकॉर्ड अंकित करने, राजस्व की जमीन किए अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने, गांवों में ओरण भूमि पर बड़े पैमाने से हो रही हरे वृक्षों की कटाई रोकने, गांवों में ओरण भूमि का गैर मुमकिन या गोचर दर्ज करने, क्षेत्र में खाली पड़ी जमीन को सिवाय चक में दर्ज करने, सिवाय चक भूमि को गोचर भूमि घोषित करने,पड़त भूमि को प्राथमिकता के आधार पर आवंटित करने की मांग की। सहित कई किसानों की ज्वलंत समस्याओं का समाधान करने की मांग की।

धरना व विरोध प्रदर्शन के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

उपखंड क्षेत्र के किसानों ने बताया कि पिछले चार वर्ष पूर्व उपखंड क्षेत्र के किसानों द्वारा उपखंड कार्यालय के आगे धरना व विरोध प्रदर्शन किया गया। लेकिन अधिकारियों द्वारा आश्वासन के अलावा कोई कार्रवाई नहीं की गई। किसानों ने बताया कि धरना प्रदर्शन के समय स्थानीय प्रशासन द्वारा धरना स्थल पर जाकर हाथ जोड़कर धरना उठाने का प्रयास किया जाता है तथा समस्या के समाधान के लिए मात्र आश्वासन देकर धरना उठा लिया जाता है।