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तेज आंधियों के चलते नमक के ढेर पर रेत की चादर चढ़ी

नमक उत्पादन के क्षेत्र में पोकरण अपनी एक अलग ही पहचान बना चुका है लेकिन मौसम की मार ने नमक इकाई मालिकों को परेशान कर...

Danik Bhaskar | Jun 16, 2018, 06:05 AM IST
नमक उत्पादन के क्षेत्र में पोकरण अपनी एक अलग ही पहचान बना चुका है लेकिन मौसम की मार ने नमक इकाई मालिकों को परेशान कर दिया है। पिछले चार दिनों से चल रही आंधी ने नमक इकाइयों पर बनी क्यारियों में लगी नमक की ढेरियों पर रेत की चादर सी चढ़ा दी है, जिसके चलते क्यारियों के मालिकों द्वारा नए सिरे से नमक की क्यारियों का निर्माण किया जा रहा है।

पिछले चार दिनों से चल रही आंधी ने नमक इकाइयों के मालिकों की कमर तोड़ दी है। रिण क्षेत्र में नमक इकाइयों के मालिकों द्वारा महिनों तक नमक बनाने के लिए कार्य करना पड़ता है। लेकिन जब नमक बन कर तैयार हो गया तब मौसम द्वारा किए गए प्रहार ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। जिसके चलते स्थानीय इकाई मालिकों को निराश होना पड़ रहा है। पिछले चार दिनों से एकाएक मौसम में आए परिवर्तन के चलते तेज आंधी का दौर शुरू हो गया। जिसके चलते आमजन को परेशान होना पड़ा। वहीं रिण में नमक उत्पादन क्षेत्र की इकाइयों में लगी नमक क्यारियों पर भी रेत चढ़ गई। जिसके चलते मकान मालिकों द्वारा इन क्यारियों की सफाई करवाने का कार्य किया जा रहा है।

पोकरण. नमक पर चढ़ी रेत की चादर।

मौसम के साथ अन्य परेशानियों ने भी घटाया रझना

नमक उत्पादन क्षेत्र में दिन ब दिन बढ़ रहे आंधियों के प्रकोप के कारण उत्पादक परेशान नजर आ रहे हैं। वहीं इन इकाइयों में बनने वाले नमक के लिए आयात निर्यात की कोई सुविधा नहीं होने के कारण लोगों का रझना घटता जा रहा है। नमक की इकाइयों में तैयार नमक को ले जाने के लिए पूर्व में रेलवे की सुविधा ली जाती थी, लेकिन इकाइयों के कम हो जाने के कारण उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ने लगा है जिस कारण रेलवे लोडिंग भी नाम मात्र की हो पा रही है। वहीं नमक के कट्टों को ट्रकों से भेजा जाए तो वो महंगा साबित हो रहा है।


44 के स्थान मात्र 20 इकाइयां ही रह गई है

मौसम द्वारा किए जा रहे कुठाराघात से परेशान होकर कई नमक इकाइयों के मालिक अपनी इकाइयों को छोड़ कर पलायन कर गए हैं। सरकार द्वारा नमक उत्पादन क्षेत्र में कुल 44 इकाइयों का आवंटन किया था लेकिन बार बार पड़ रही मौसम की मार तथा अन्य कारणों से परेशान होकर नमक इकाइयों के मालिकों का रझना कम हो गया। जिसके चलते हाल ही में यहां पर 20 इकाइयां ही चालू है। वहीं नमक उत्पादकों को किसी प्रकार की सहायता नहीं मिलने के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।