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76 लाख की लागत से पाइप लाइन बिछाने के बाद भी विद्यालय में नहीं पहुंचा पानी

भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक) केरावा डिडाणिया योजना के तहत जलदाय विभाग ने कलाऊ से पुरोहितसर तक 76 लाख रुपए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 23, 2018, 06:05 AM IST

भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक)

केरावा डिडाणिया योजना के तहत जलदाय विभाग ने कलाऊ से पुरोहितसर तक 76 लाख रुपए खर्च कर पाइप लाइन बिछाई थी लेकिन उसके बाद भी पुरोहितसर स्थित विद्यालय में पानी की किल्लत बनी हुई है। ग्राम पंचायत डिडाणिया के राजस्व गांव पुरोहितसर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में पेयजल की किल्लत होने के कारण अध्यापक सहित विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विद्यालय में पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को अपने घर से पानी की बोतलें भर कर प्यास बुझानी पड़ रही है। वहीं विद्यालय प्रशासन द्वारा इस संबंध में जलदाय विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाया गया लेकिन अभी तक जलदाय विभाग कुंभकरण नींद में सो रहा है। पुरोहितसर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण विद्यालय प्रशासन द्वारा इसको लेकर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके चलते विद्यार्थियों को अपने घर पर पानी लाकर पानी पी रहे है। वहीं विद्यालय प्रशासन कभी कभार पानी का टैंकर डलवाकर पानी की व्यवस्था की जाती थी, लेकिन विद्यालय प्रशासन के पास पानी का बजट नहीं होने के कारण ग्रामीणों के सहयोग से विद्यालय में पानी का टैंकर डलवाया जा रहा था। उसके बार अकालग्रस्त होने के कारण जलदाय विभाग द्वारा शुरू किए गए पानी टैंकर भी डलवाए गए थे। अब अकालग्रस्त वाले पानी के टैंकर भी बंद होने के साथ ही विद्यालय में पुन: पानी की किल्लत बन गई। अभी तक जलदाय विभाग द्वारा इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

250 से अधिक विद्यालय में अध्ययनरत है विद्यार्थी

पुरोहितसर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में 250 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत है। उसके बाद भी जलदाय विभाग द्वारा छात्रों के हितों के बारे में ध्यान नहीं रखा जा रहा है। जिसके चलते विद्यालय प्रशासन भी जलदाय विभाग के सामने हाथ खड़े कर दिए गए है। छोटे गांव में इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थी होने के बावजूद भी जलदाय विभाग द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

पुरोहितसर स्थित राउप्रावि में पानी की किल्लत बनी हुई है। इस संबंध में जलदाय विभाग के अधिकारियों सूचित किया गया लेकिन उनके द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिसके चलते ग्रामीणों के सहयोग से विद्यालय में पानी का टैंकर डलवाकर पानी की प्यास बुझा रहे है। मोहनलाल पालीवाल, प्रधानाध्यापक, राउप्रावि पुरोहितसर

भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक)

केरावा डिडाणिया योजना के तहत जलदाय विभाग ने कलाऊ से पुरोहितसर तक 76 लाख रुपए खर्च कर पाइप लाइन बिछाई थी लेकिन उसके बाद भी पुरोहितसर स्थित विद्यालय में पानी की किल्लत बनी हुई है। ग्राम पंचायत डिडाणिया के राजस्व गांव पुरोहितसर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में पेयजल की किल्लत होने के कारण अध्यापक सहित विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विद्यालय में पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को अपने घर से पानी की बोतलें भर कर प्यास बुझानी पड़ रही है। वहीं विद्यालय प्रशासन द्वारा इस संबंध में जलदाय विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाया गया लेकिन अभी तक जलदाय विभाग कुंभकरण नींद में सो रहा है। पुरोहितसर स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण विद्यालय प्रशासन द्वारा इसको लेकर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके चलते विद्यार्थियों को अपने घर पर पानी लाकर पानी पी रहे है। वहीं विद्यालय प्रशासन कभी कभार पानी का टैंकर डलवाकर पानी की व्यवस्था की जाती थी, लेकिन विद्यालय प्रशासन के पास पानी का बजट नहीं होने के कारण ग्रामीणों के सहयोग से विद्यालय में पानी का टैंकर डलवाया जा रहा था। उसके बार अकालग्रस्त होने के कारण जलदाय विभाग द्वारा शुरू किए गए पानी टैंकर भी डलवाए गए थे। अब अकालग्रस्त वाले पानी के टैंकर भी बंद होने के साथ ही विद्यालय में पुन: पानी की किल्लत बन गई। अभी तक जलदाय विभाग द्वारा इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

अधिकारियों के मोबाइल रहते है स्विच ऑफ

कोई भी पानी की शिकायत को लेकर जलदाय विभाग के अधिकारियों को दूरभाष पर सूचित किया जाता है अधिकारियों को हर हर समय मोबाइल फोन स्विच ऑफ रहता है। जिसके कारण ग्रामीणों को पानी की शिकायत नहीं हो पाती है। ग्रामीणों ने जलदाय विभाग के एईएन, जेईएन तथा कर्मचारियों के हर समय मोबाइल स्विच ऑफ रखने के कारण पेयजल संबंधी शिकायत दर्ज नहीं होती है। जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में दिनों दिन पेयजल संकट गहराया जा रहा है।

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