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पोकरण : वन्य क्षेत्र में भी सुरक्षित नहीं चिंकारा, फिर मिले सात हरिणों के शव

उपखंड क्षेत्र में हरिणों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग द्वारा कोई आवश्यक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। शुक्रवार को दोपहर...

Danik Bhaskar | Jun 23, 2018, 06:05 AM IST
उपखंड क्षेत्र में हरिणों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग द्वारा कोई आवश्यक कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। शुक्रवार को दोपहर तक क्षेत्र में सात हरिणों के शव मिले। हिरण बाहुल्य क्षेत्र कहलाने वाले गांव खेतोलाई, धोलिया, ओढ़ाणियां में हिरणों की संख्या सर्वाधिक है। राज्य पशु के खिताब से नवाजे चिंकारा को वन विभाग के अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार कोई सुरक्षा नहीं दी जा रही है। आए दिन हरिण वाहनों की चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। फोरेस्टर कार्मिकों द्वारा समय समय पर सर्वे नहीं करने के कारण आवारा पशुओं द्वारा इन हरिणों को शिकार बना लिया जाता है। क्षेत्र के खेतोलाई, धौलिया और लाठी क्षेत्र में पिछले लम्बे समय से हरिणों के शव मिलने का सिलसिला जारी है। वहीं शुक्रवार को सुबह से ही हरिणों के शव मिलने का सिलसिला शुरू हुआ जो दोपहर तक जारी रहा। जिसके चलते कुल 7 हरिणों का शव मिला। इनमें खेतोलाई बस स्टैंड के पास हुई सड़क दुर्घटना में एक हिरण की मौत हो गई। वहीं खेतोलाई गांव के पास बनी पशु खेली के पास चार हरिणों के शव मिले तथा 2 शव धौलिया गांव के पास मिले। जिन्हें देखने पर स्पष्ट हो रहा है कि यह श्वान के हमले हुई मौत है। सभी हरिणों के शवों को बरामद कर ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को सूचित कर शव वन विभाग को सौंपे।

पोकरण (आंचलिक) . हिरणों की मौत को लेकर गंभीर नहीं है वन विभाग।

राष्ट्रीय राजमार्ग पर हो रही है सर्वाधिक दुर्घटनाएं

रात्रि होते ही नेशनल हाइवे पर आवारा पशुओं की संख्या बढ़ जाती है। रात्रि में वाहन चालकों द्वारा दी जाने वाली तेज रोशनी से हरिण एक बार से नेत्रहीन हो जाते हैं तथा तेजी से अपने ओर आने वाले वाहनों को नहीं देख पाते हैं। इस कारण यह हिरण वाहनों की चपेट में आते हैं तथा गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। पिछले चार माह में वाहनों की चपेट में आने से लगभग 10 हरिणों की अकाल मौत हो गई, लेकिन अभी तक वन विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। हरिणों को राष्ट्रीय राजमार्ग से दूर रखने के संबंध में कई बार ग्रामीणों द्वारा प्रशासन से क्षेत्र की तारबंदी करने की अपील की गई है। लेकिन प्रशासन द्वारा इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं करने का खामियाजा आवारा मूक पशुओं को उठाना पड़ रहा है।