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354 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन पर एक जेईएन, पद रिक्तता बनी परेशानी

जलदाय विभाग द्वारा एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कई पेयजल योजनाएं चलाई जा रही है। वहीं दूसरी ओर इस पेयजल योजना के...

Dainik Bhaskar

May 27, 2018, 06:10 AM IST
354 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन पर एक जेईएन, पद रिक्तता बनी परेशानी
जलदाय विभाग द्वारा एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए कई पेयजल योजनाएं चलाई जा रही है। वहीं दूसरी ओर इस पेयजल योजना के रखरखाव के लिए विभाग के पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं होने के कारण यह योजनाएं सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है। ऐसे में दूर दराज के गांवों तथा ढाणियों के ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जलदाय विभाग की राजमथाई-फलसूण्ड जलप्रदाय योजना के अंतर्गत क्षेत्र के विभिन्न गांवों व ढाणियों को जोड़ने के लिए करीब 400 किमी पाइप लाइनें बिछाई गई है। जिसकी रख रखाव, मरम्मत व संधारण के लिए नाम मात्र के कर्मचारी कार्यरत है। उन कर्मचारियों की ओर से इस योजना को संभाल पाना मुश्किल हो रहा है। जिससे क्षेत्र में निवास कर रहे लोगों को आए दिन पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।

योजनाओं में नहीं है पर्याप्त कर्मचारी

जलदाय विभाग ने प्रत्येक गांव व ढाणी को पाइप लाइन से जोड़कर जलापूर्ति तो शुरू कर दी है, लेकिन कर्मचारियों के अभाव में इनका रख रखाव करना मुश्किल हो रहा है। इस जलप्रदाय योजना में गत लम्बे समय से कर्मचारियों का अभाव चल रहा है। दूसरी तरफ 1994 के बाद जलदाय विभाग में नए कर्मचारियों की भर्ती नहीं की गई है। जिससे जलप्रदाय योजना का संचालन व संधारण मुश्किल हो रहा है। हाल ही में इस योजना के अंतर्गत स्वीकृत 24 पंप चालकों के पद पर मात्र एक पंप चालक कार्यरत है तथा 23 पद खाली एवं 45 फीटर के पद स्वीकृत है, जो सभी रिक्त पड़े हैं। इसी प्रकार सहायक के 14 स्वीकृत पदों पर मात्र छह, बेलदार के 45 में से मात्र 15, इलेक्ट्रिशियन का एक पद स्वीकृत है, जो खाली पड़ा है। जिससे क्षेत्र की सबसे बड़ी जलप्रदाय योजना कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है।

लाइन टूटते ही हो जाता हैं पेयजल संकट

राजमथाई-फलसूण्ड जलप्रदाय योजना के अंतर्गत अलग-अलग क्षेत्रों में बिछाई गई करीब 354 किमी पाइपलाइनों के रख रखाव का जिम्मा मात्र एक कनिष्ठ अभियंता को सौंपा गया है। लेकिन हाल ही में वह पद भी रिक्त पड़ा है। तकनीकी कर्मचारियों के अभाव में पूरी पाइपलाइन का रख रखाव व टूट जाने पर मरम्मत कार्य समय पर संभव नहीं हो रहा है। जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। इस योजना में राजमथाई गांव में 10 नलकूप स्थित है। जिनसे आगे फलसूण्ड, बलाड़, भीखोड़ाई, दांतल, स्वामीजी की ढाणी व मानासर फांटा स्थित छह बूस्टिंग स्टेशनों पर जलापूर्ति होती है। इस पेयजल योजना से करीब 45 गांव व 190 ढाणियों में 285 जीएलआरों को पीने का पानी मिलता है। इन गांवों में निवास कर रहे लगभग 38 हजार ग्रामीण इस पेयजल योजना से ही पीने का पानी प्राप्त करते हैं। लेकिन कर्मचारियों की कमी के चलते पाइप लाइन टूट जाने की स्थिति में गांवों व ढाणियों में पेयजल संकट गहरा जाता है।


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