--Advertisement--

मूलभूत सुविधाएं भी नहीं, ग्रामीण परेशान

भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक) फलसूंड उपतहसील क्षेत्र के कई राजस्व गांवों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने के...

Danik Bhaskar | May 05, 2018, 06:15 AM IST
भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक)

फलसूंड उपतहसील क्षेत्र के कई राजस्व गांवों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने के कारण ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उपस्वास्थ्य केन्द्र के साथ साथ सड़क, पीने के लिए पानी आदि की सुविधाओं के नहीं होने के कारण लोगों को तकलीफ उठानी पड़ रही है। उप तहसील के कई ऐसे गांव है जो तीन सौ से अधिक आबादी वाले गांवों में भी मूलभूत सुविधाओं का टोटा बना हुआ है। जिले में जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा क्षेत्र होने के बावजूद जिला मुख्यालय से अत्यधिक दूरी व अधिकारियों द्वारा मॉनिटरिंग के अभाव में जिले का सघन जन बाहुल्य क्षेत्र सुविधाओं को तरस रहा है। क्षेत्र के रावतपुरा, पन्नानाडा, सोहनपुरा, फुलासर, बरसानी, रूपसर, सांगाबेरा, बांधेवा, फूसासर, खामथल, फलसूण्ड, हेमसागर सहित कई गांवों में एएनएम पद रिक्त है तथा कई जगह उप स्वास्थ केन्द्र भी नहीं बने हुए हैं। जिससे यहां के लोगों को टीकाकरण व सामान्य स्वास्थ्य सुविधा भी नहीं मिल पा रही है।

सड़क सुविधा से वंचित है कई गांव

कई गांवों में सड़कों का अभाव है और जहां पर है वहां भी बस नाम मात्र की सड़क है। स्वामी जी की ढाणी पंचायत में हेमसागर राजस्व गांव बने 10 साल हो चुके, लेकिन आज तक सड़क सुविधा से वंचित है। फलसूण्ड से नेतासर, मानासर, सोहनपुरा आदि कई गांवों को जाने वाली डामरीकृत सड़कें बिलकुल टूट चुकी है। रावतपुरा जाने वाली ग्रेवल सड़क वर्षों से डामरीकरण का इंतजार कर रही है। फलसूण्ड से गोडागड़ा होते हुए फूलासर जाने वाली सड़क बिलकुल बिखर चुकी है। इस सड़क मार्ग पर फलसूण्ड से पोकरण कम दूरी के कारण व शिवदानपुरी की जीवित समाधि गोडागड़ा पर हर माह शुल्क पक्ष पंंचमी को अंतरजिला मेले के कारण उस दिन इस टूटी सड़क पर यातायात दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है। इसी प्रकार स्टेट हाईवे न. 65 बायतु से लेकर माड़वा तक टूटा हुआ किनारे बिलकुल संकड़े हो गए तथा पटरियां गहरी खाई में तब्दील हो गई है। जिससे साइड देने के दौरान छोटे वाहनों के हर समय पलटने का खतरा बना रहता है।

पीने के पानी की लड़खड़ाई व्यवस्था

उपतहसील क्षेत्र में पीने के पानी की सप्लाई व्यवस्था पूरी तरह से अस्त व्यस्त है। अधिशाषी अभियंता, सहायक अभियंता को बार बार अवगत करवाने के बावजूद कई गांवों में महीनों से पानी नहीं पहुंच रहा है। अधिकारियों का रवैया भी संतोषजनक नहीं रहता। जनप्रतिनिधियों द्वारा कहने के बाद भी वह तबादला करवा देने की धमकियां देते हैं। लेकिन सप्लाई को सुचारू नहीं करते हैं। जिसके कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।