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सोलर प्लांट से प्रतिदिन लाखों रुपए की बिजली का उत्पादन करने वाला नोख कस्बा खुद अंधेरे में

Pokran News - भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक) उपतहसील नोख में भारत में पहला पैराबोलिक थर्मल सोलर पावर प्लांट लगने के साथ ही...

Dainik Bhaskar

Jul 11, 2018, 06:15 AM IST
सोलर प्लांट से प्रतिदिन लाखों रुपए की बिजली का उत्पादन करने वाला नोख कस्बा खुद अंधेरे में
भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक)

उपतहसील नोख में भारत में पहला पैराबोलिक थर्मल सोलर पावर प्लांट लगने के साथ ही नोख क्षेत्र काफी प्रसिद्ध हो गया। थर्मल सोलर प्लांट के साथ-साथ दो अन्य सोलर प्लांट भी नोख क्षेत्र में लगे हैं। इन थर्मल सोलर पावर प्लांट को देखने के लिए हजारों लोगों ने नोख क्षेत्र का दौरा किया है, लेकिन इतना प्रसिद्ध होने के बाद भी अभी तक नोख कस्बे के लोगों को मूलभूत सुविधाओं को पाने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

सोलर कंपनियों ने अपने सीएसआर वर्क के दौरान नोख क्षेत्र में लाखों रुपए भी खर्च किए हैं, लेकिन प्रशासनिक तौर पर कोई कार्रवाई तथा सहयोग नहीं मिल पाने के कारण लोगों को लंबे समय से तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में लाखों रुपए की लागत लगाकर गौरव पथ बनाने की घोषणा की थी, जिस पर ग्राम पंचायत द्वारा गांव में गौरव पथ का निर्माण करवाया गया था, लेकिन हाल ही स्थिति यह है कि गांव में बना गौरव पथ इन दिनों रेत से अटा पड़ा है। रेत से सराबोर इस गौरव पथ पर सबसे ज्यादा परेशानियां दुपहिया वाहन चालकों को हो रही हैं।

पोकरण (आंचलिक) समस्याओं को घिरा है नोख उपतहसील क्षेत्र।

अंधेरे में रहता है पूरा गांव

वैसे तो नोख गांव में सोलर कंपनियों द्वारा प्रतिदिन लाखों रुपए की बिजली उत्पादन कर सरकार को सप्लाई कर रहे हैं, लेकिन लाखों रुपए की बिजली पैदा करने वाला गांव खुद रात्रि के समय अंधेरे में डूब जाता है। ऐसे में आमजन को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांव में रोड लाइटों को लेकर कंपनियों ने 25 लाइटें सीएसआर वर्क में वितरित की थीं, लेकिन गांव की आबादी को देखते हुए वह ऊंट के मुंह में जीरे समान है। इसके चलते रात्रि में लोगों में हर समय चोरी तथा अन्य अवांछनीय घटनाओं का भय बना रहता है।


पशु चिकित्सालय में चिकित्सक नहीं

गांव में पशुओं के लिए पशु चिकित्सालय बनाया गया है, लेकिन पिछले दस वर्षों से इस पशु चिकित्सालय में चिकित्सक नहीं आया है। इसे कारण पशुपालकों को अपने पशुओं का इलाज कराने में भी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। पशु चिकित्सक के अभाव में ये लोग पशुओं का उपचार करवाने के लिए फलोदी तथा बाप जाने को मजबूर हैं, जिससे इन पशुपालकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।

बालिका विद्यालय 8वीं तक ही

गांव में स्थित राजकीय बालिका विद्यालय में लगभग 200 बालिकाएं अध्ययनरत हैं, लेकिन कक्षा 8 तक ही विद्यालय संचालित होने के कारण बालिकाओं को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ती है। इस विद्यालय को क्रमोन्नत करने के संबंध में कई बार जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों से मांग की गई है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

जल निकासी की समुचित व्यवस्था भी नहीं

कस्बे में जल निकासी को लेकर कोई सुविधा नहीं है। सड़कों और गलियों के आस-पास गंदे पानी की निकासी के लिए नालियों का निर्माण नहीं किया गया है और जिन स्थानों पर नालियां बनी हुई हैं, वह भी लंबे समय से रेत से अटी पड़ी हंै। इससे उनका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। निकासी की कोई सुविधा नहीं होने के कारण घरों का सारा गंदा पानी सड़क तथा गलियों में बिखरा रहता है। इसे कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ दुकानदारों को भी काफी तकलीफें उठानी पड़ रही हैं।

आरओ प्लांट पर ताला

नहरी क्षेत्र के पास बसे होने के कारण नोख क्षेत्र में नहर के पानी की सप्लाई होती है, लेकिन गांव में लगा आरओ प्लांट लम्बे समय से बंद पड़ा है। जलदाय विभाग द्वारा लाखों रुपए की लागत से गांव में आरओ प्लांट लगाया गया था, लेकिन निर्माण के बाद से यह आरओ प्लांट ताले में कैद है। ताले में कैद आरओ प्लांट को लेकर लोगों ने कई बार जलदाय विभाग के अधिकारियों को सूचित किया गया, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।

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