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आज भी याद है 20 साल पहले का मंजर; पूरा पोकरण शहर पत्ते की तरह हिल गया था

पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज में 11 व 13 मई 1998 को हुए परमाणु धमाकों की याद आज भी लोगों के जहन में ताजा है। बीस वर्ष पूर्व...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 11, 2018, 06:25 AM IST

आज भी याद है 20 साल पहले का मंजर; पूरा पोकरण शहर पत्ते की तरह हिल गया था
पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज में 11 व 13 मई 1998 को हुए परमाणु धमाकों की याद आज भी लोगों के जहन में ताजा है। बीस वर्ष पूर्व खेतोलाई के पास स्थित फील्ड फायरिंग रेंज में हुए परमाणु परीक्षणों ने भारत को परमाणु शक्ति के क्षेत्र में सभी देशों के बराबर लाकर खड़ा कर दिया। खेतोलाई स्थित फील्ड फायरिंग रेंज में हुए इन सिलसिलेवार परमाणु परीक्षण की गूंज ने पूरे भारतवासियों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। क्षेत्र के लोग आज भी उन लम्हों को याद कर अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हैं। साथ ही इन परमाणु विस्फोटों के बाद खेतोलाई गांव विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। परमाणु परीक्षणों का असर गांव के साथ-साथ पूरे क्षेत्रवासियों को महसूस हुआ। वहीं क्षेत्र के लोगों में आज भी उन परमाणु परीक्षणों के कारण हिली धरती तथा गूंजे आसमान का मंजर जीवित है।

भास्कर संवाददाता | पोकरण

पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज में 11 व 13 मई 1998 को हुए परमाणु धमाकों की याद आज भी लोगों के जहन में ताजा है। बीस वर्ष पूर्व खेतोलाई के पास स्थित फील्ड फायरिंग रेंज में हुए परमाणु परीक्षणों ने भारत को परमाणु शक्ति के क्षेत्र में सभी देशों के बराबर लाकर खड़ा कर दिया। खेतोलाई स्थित फील्ड फायरिंग रेंज में हुए इन सिलसिलेवार परमाणु परीक्षण की गूंज ने पूरे भारतवासियों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। क्षेत्र के लोग आज भी उन लम्हों को याद कर अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हैं। साथ ही इन परमाणु विस्फोटों के बाद खेतोलाई गांव विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। परमाणु परीक्षणों का असर गांव के साथ-साथ पूरे क्षेत्रवासियों को महसूस हुआ। वहीं क्षेत्र के लोगों में आज भी उन परमाणु परीक्षणों के कारण हिली धरती तथा गूंजे आसमान का मंजर जीवित है।

शक्ति स्थल में मात्र डमी ही दिलाते हैं परमाणु परीक्षण की याद

परमाणु परीक्षण के बाद पोकरण शहर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली,, लेकिन परमाणु स्थल पोकरण फिल्ड फायरिंग के अंदर व रक्षा विभाग की सुरक्षा में होने के कारण आम व्यक्ति का उस स्थल तक जाना वर्जित था। इस घटना को लम्बे समय तक यथावत रखने के लिए तात्कालीन कलेक्टर द्वारा जैसलमेर सड़क मार्ग पर खादी ग्रामोद्योग में शक्ति स्थल के नाम से कुछ मॉडल विकसित करने व यहां पर परमाणु संयत्र के मॉडल तैयार किए गए। लेकिन कलेक्टर के स्थानांनतरण के बाद से ही इस पर्यटन स्थल का विकास नहीं हो पाया। जिसके चलते यह शक्ति स्थल निर्माण की योजना भी सिरे नहीं चढ़ पाई। ऐसे में इन दिनों यहां पर परमाणु परीक्षण की याद में लगाए गए डमी ही परमाणु परीक्षण की गाथा गा रहे हैं। शक्ति स्थल में मात्र डमी के अलावा और कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा है।

विस्फोटों से शहर मेंफैली थी दहशत

समाजसेवी सुरेश जोशी ने परमाणु विस्फोटों के संबंध में बताया कि 11 मई1998 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम आजाद द्वारा पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में परमाणु परीक्षण करवाया था। पूरा पोकरण शहर पत्ते की तरह हिल गया। लोग बाग इसे प्राकृतिक आपदा मानते हुए अपने घरों से बाहर की ओर भाग खड़े हुए। वहीं चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। इस बात को बीते एक दिन भी गुजरा था तभी दूसरा परमाणु विस्फोट होने के कारण लोगों में दहशत का माहौल बना रहा।

विस्फोट की त्रासदी से आज भी जूझ रहे हैं लोग

परमाणु परीक्षण के बाद विश्व के मानचित्र में अपनी अलग छवि बना चुका पोकरण का खेतोलाई गांव आज भी परमाणु परीक्षण से फैली त्रासदी से जूझ रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि परमाणु विस्फोट से फैलने वाली रेडियेशन का दंश ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। रेडियेशन के कारण गांव में अधिकांश कैंसर के मरीज है। वहीं दूसरी ओर गांव में पशुओं में भी बछड़े समय से पहले ही हो जाते हैं और मर जाते हैं। साथ ही कई पशु विकृत पैदा हो रहे हैं।

आज भी ताजा है याद

मैं उस दिन रोजमर्रा की तरह घर पर बैठा अपना काम कर रहा था। वहीं ग्रामीणों द्वारा क्षेत्र में बड़े से बड़े सैन्य अधिकारियों, नेताओं, वैज्ञानिकों, के आने की सूचना दी। ऐसे में थोड़ी ही देर में परमाणु परीक्षण हुआ, जिससे पूरा क्षेत्र हिल गया। उस मंजर को भुलाए नहीं भूल सकता। विक्रम विश्नोई, ग्रामीण, खेतोलाई

मैं दोपहर के समय सो रहा था। तभी अचानक धरती हिलने लगी और टीवी के पास रखा सामान गिरने लगा। लोगों ने भूकंप की बात कही तभी टीवी पर पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में परमाणु परीक्षण की खबर आई। यही परीक्षण एक दिन छोड़ अगले दिन होने के कारण यह घटना हर समय याद है। जगदीश टावरी, पोकरण

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