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प्रचंड गर्मी में मारवाड़ के अंगूर पीलू की आई बहार

भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक) धोरों में जहां आग उगलती गर्मी में पानी के लिए आमजन को तरसना पड़ रहा है। वहीं इस...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 19, 2018, 06:25 AM IST

प्रचंड गर्मी में मारवाड़ के अंगूर पीलू की आई बहार
भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक)

धोरों में जहां आग उगलती गर्मी में पानी के लिए आमजन को तरसना पड़ रहा है। वहीं इस मौसम में मारवाड़ के मेवे के रूप में जाने जाने वाले पीलू की बहार इन दिनों जाल नामक पेड पर बहुतायत में है। मारवाड़ के पीलू केे रूप में विख्यात रामदेवरा के पीलू बेहद ही मीठे होते हैं। इन पीलू का स्वाद अंगूर के स्वाद को भी फिका कर देता है। क्षेत्र में कई जगहों, सड़कें हो या ओरण गोचर का जंगली क्षेत्र हर जगह जाल पर आपको इन दिनों पीलू के गुच्छे लटके हुए मिलेंगे। तेज गर्मी व लू में होने वाले इस मारवाड़ के मेवे को लोग बड़े चाव के साथ खाते हैं। बुजुर्गों का कहना है कि पीलू के खाने से लू नहीं लगती है। इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं, बच्चे सभी मिल करके सुबह से लेकर दोपहर तक जाल से पीलू को बर्तन में तोड़ करके जमा करते हैं। फिर इन्हें बाजार में लाकर बेच दिया जाता है। रामदेवरा पैदल आने वाले यात्री भी रामदेवरा पैदल सड़क के किनारे विश्राम करने के दौरान जाल पर लगे पीलू खाने से अपने आप को रोक नहीं पाते हैं। बरसात होने के साथ ही जाल के पेड से पीलू झड़ने लग जाते हैं। बरसात का मौसम पीलू के समापन का काल माना जाता है। पीलू को कई लोग देश के विभिन्न कोनों में रहने वाले अपने रिश्तेदारों को भी अच्छी पैकिंग करके भेजते हैं। इन दिनों गर्मी के प्रचंड प्रकोप के बीच पीलू भी अपने पूरे सबाब पर है। जाल पर लाल रंग के रस भरे पीलू के गुच्छे किसी को भी खाने के लिये ललचाने को काफी है।

छुट्टियों में बच्चों ने जेब खर्च के लिए बनाया व्यवसाय : बच्चों को परीक्षा खत्म होने के बाद गर्मी की छुट्टियां होने के कारण गांव के छोटे-छोटे बच्चों द्वारा सुबह से ही अपने घर से निकल कर जंगल की ओर चले जाते है। बच्चों द्वारा जाल के ऊपर चढकर रंग बिरंगे पीलू तोड़कर शहर में बेचते दिखाई दे रहे है। क्षेत्र के छोटे बच्चों द्वारा पीलू के जाल से लेकर मुख्य सड़क मार्गो पर ग्रामीण बच्चों ने स्कूल की छुट्टियों में पीलू बेचकर अपनी जेब खर्च इक्कटा करने में जुटे है। बच्चों को पर्यटकों को पीलू बेचकर व्यवसाय करने के गुर सीखने को मिल रहे हैं। पीलू देखकर शहरवासी होते उत्साहित उपखंड क्षेत्र के कई जगहों पर छोटे बच्चों व कई महिलाओं द्वारा पीलू को शहर के आकर बेचते है तथा शहरवासियों द्वारा उसको उत्साह के साथ खरीदते है। शहरवासियों द्वारा पीलू डिमांड भी रखते है तथा छोटे बच्चों द्वारा एक दो दिन में शहर में आकर डिमांड लोगों को पीलू बेचते दिखाई देते है। वहीं छोटे बच्चों द्वारा पीलू को तोड़ते समय कोई थकान महसूस नहीं होती है। बच्चों के आनंद व उत्साह के साथ जाल पर लगे पीलू को तोड़ते दिखाई देते है।

प्रकृति

गर्मी बढ़ने के साथ जाल के पेड़ भरे हैं पीलूआें से, छोटे बच्चे पीलू को तोड़कर शहर में आते हंै बेचने

पोकरण (अांचलिक) क्षेत्र में पीलू की आई बहार, जाल में लटालूंब हुए रंग बिरंगे पीलू

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