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आदेश के 4 साल बाद भी जीएसएस स्टेशनों पर नहीं लगे अग्निशमन यंत्र

डिस्कॉम के पोकरण डिविजन स्थित 30, 33 व 11 केवी जीएसएस स्टेशन में कहीं पर भी आपातकालीन समय में लगी आग को बुझाने के लिए न तो...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 19, 2018, 06:25 AM IST

डिस्कॉम के पोकरण डिविजन स्थित 30, 33 व 11 केवी जीएसएस स्टेशन में कहीं पर भी आपातकालीन समय में लगी आग को बुझाने के लिए न तो अग्निशमन यंत्र है और न ही आग बुझाने के लिए रेत से भरी बाल्टियां। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोई घटना होती है तो आग पर कैसे काबू पाया जाएगा। जिसके चलते कभी भी हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि कई वर्षों पूर्व जयपुर में बैठक का आयोजन हुआ था। जिसमें कर्मचारियों की बिजली दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए किए जा रहे विभिन्न उपायों के बाद भी दुर्घटनाओं की दर में कमी नहीं होने पर चिंता प्रकट की व दुर्घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से तकनीकी कर्मचारियों द्वारा उपकरणों का प्रभावपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने व सुरक्षा निर्देशों की उचित पालना के लिए विशेष दिशा निर्देश भी जारी किए गए थे। गौरतलब है कि 3 सितंबर 2014 को बैठक का आयोजन हुआ तथा 29 सितंबर 2014 को इसके दिशा निर्देशों की पालना करने के लिए प्रबंध निदेशक ने जोधपुर डिस्कॉम को भी आदेश दिए थे। लेकिन चार वर्ष गुजरने के बावजूद आदेशों की पालना नहीं हुई।

यहां नहीं है आग पर काबू पाने के संसाधन

डिस्कॉम के 33 केवी जीएसएस पोकरण, भीखोड़ाई, नानणियाई, भाखरी, एकां, बोनाड़ा, लाठी, पदरोड़ा, भणियाणा, फलसूंड, राजमथाई, बांधेवा, मसुरिया, हरियासर, हाजी की ढाणी, सांकड़ा सहित 30 जीएसएस में आपातकालीन समय में आग पर काबू पाने के लिए न तो अग्निशमन यंत्र है और न ही उनके पास कोई उपाय। ऐसे में जगह जगह यार्ड में उगी घास व अन्य कारणों से आग लगने पर कोई साधन नहीं है।

यह था आदेश | प्रत्येक 33 केवी जीएसएस पर अग्निशमन यंत्र अग्निशमन के लिए रेत से भरी बाल्टियां, फस्ट एड बॉक्स, रबर के दस्ताने, इंसुलेटेड प्लास, टॉर्च, लकड़ी की सीढ़ी, सेफ्टी बैल्ट, एसी वॉल्टेज डिटेक्टर, हेलमेट, टॉर्च, अर्थिंग चैन, सेफ्टी सूज सहित अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाने के लिए आदेश दिए गए थे। लेकिन चार वर्ष गुजरने के बावजूद न तो अग्निशमन यंत्र है और न ही रेत से भरी बाल्टियां। जिसके चलते कई बार जिले के जीएसएस पर कार्यरत कार्मिकों की मौत व झुलसने की घटना हो चुकी है।

डिस्कॉम के जीएसएस में आगजनी की घटनाओं की कोई संभावना ही नहीं रहती है। फिर भी अगर आगजनी की घटना होती है तो रेत से आग पर काबू पाने का प्रयास किया जाता है। हनुमानाराम चौधरी, एईएन, डिस्कॉम पोकरण

लाखों रुपए के ट्रांसफार्मर हुए स्वाहा

33 केवी जीएसएस पर अग्निशमन यंत्रों एवं रेत से भरी बाल्टियों के अभाव में पूर्व में राजमथाई व भीखोड़ाई सहित अन्य जगह लाखों रुपए की लागत के ट्रांसफार्मर जल चुके हैं। बावजूद डिस्कॉम के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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