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मरीज बेहाल; दो डाॅक्टर पीजी करने गए 2 का तबादला

पोकरण राजकीय अस्पताल में पहले से ही चिकित्सक कम हैं। इस बीच दो चिकित्स के पीजी करने के लिए बाहर जाने और दो का तबादला...

Danik Bhaskar | Jul 04, 2018, 06:25 AM IST
पोकरण राजकीय अस्पताल में पहले से ही चिकित्सक कम हैं। इस बीच दो चिकित्स के पीजी करने के लिए बाहर जाने और दो का तबादला होने से अस्पताल में संकट हो गया है। यहां आने वाले मरीजों को अब नियमित इलाज नहीं मिल रहा है। क्षेत्रीय विधायक ने पहले प्रयास कर चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरवाने के साथ पोकरण शहरवासियों और ग्रामीणों को राहत पहुंचाई थी, लेकिन इन दिनों एक बार फिर से सेठ विट्ठलदास राठी राजकीय अस्पताल में चिकित्सकों की कमी गहराने लगी है। इस कारण पोकरण राजकीय अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों के साथ साथ परिजनों का भी बुरा हाल है।

पोकरण राजकीय अस्पताल में चिकित्सकों की कमी

पोकरण व भणियाणा उपखंड क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल के रूप में पहचान रखने वाले सेठ विट्ठल दास राठी राजकीय अस्पताल में चिकित्सकों की कमी पहले से ही बनी हुई थी। वहीं हाल ही में दो चिकित्सक डॉ. अनिल गुप्ता और डॉ. ओम प्रकाश खत्री पीजी के लिए तीन वर्ष के लिए जोधपुर चले गए तो दो चिकित्सक डॉ. मधु शर्मा और डॉ. उमेश खन्ना का स्थानांतरण हो गया, जिसके कारण पोकरण राजकीय अस्पताल में आने वाले मरीजों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।

मेले से पूर्व अस्थि रोग विशेषज्ञ व जनरल सर्जन की जरूरत | भादवा माह में बाबा रामदेव का मेला शुरु हो जाएगा। लेकिन बाबा रामदेव की समाधि के दर्शनों के लिए श्रद्धालु अभी से ही शुरु हो गए हैं। वहीं पैदल, वाहनों पर आने वाले श्रद्धालुओं की काफी संख्या के कारण कई बार सड़क दुर्घटनाएं घटित हो जाती है। मेले के दौरान प्रशासन द्वारा जरूर दूरदराज से चिकित्सकों की नियुक्ति कर दी जाती है, लेकिन मेले से पूर्व होने वाले सड़क हादसों से निपटने के लिए पोकरण राजकीय अस्पताल के चिकित्सकों के पास कोई विशेषज्ञ नहीं होते हैं। ऐसे में पोकरण राजकीय अस्पताल में मेले से पूर्व अस्थि रोग विशेषज्ञ और जनरल सर्जन की महती आवश्यकता जताई जा रही है।

स्थानांतरण सूची में अन्य चिकित्सकों के जाने का अंदेशा

पोकरण राजकीय चिकित्सालय पूर्व में ही चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। वहीं हाल ही में प्रस्तावित स्थानांतरण सूची में कई चिकित्सकों के जाने का अंदेशा लगाया जा रहा है, इसके चलते अस्पताल प्रशासन को तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है।