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गांवों में वर्षों पहले बनवाए जीएलआर, जर्जर हालत में, लेकिन आज तक नहीं आया पानी

भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक) उपखंड क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में जीएलआर का तो निर्माण करवाया दिया...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 06:40 AM IST

गांवों में वर्षों पहले बनवाए जीएलआर, जर्जर हालत में, लेकिन आज तक नहीं आया पानी
भास्कर संवाददाता | पोकरण (आंचलिक)

उपखंड क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में जीएलआर का तो निर्माण करवाया दिया लेकिन पानी के अभाव में कई जीएलआर जर्जर हो गई तथा कई जीएलआर पानी के अभाव सूखी पड़ी है। जिसके कारण ग्रामीण इलाकों में रह रहे ग्रामीणों को पानी के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही। वहीं जलदाय विभाग द्वारा ग्रामीण इलाकों में लाखों रुपए खर्च कर ग्रामीणों पानी उपलब्ध करवाने के लिए जगह-जगह पर जीएलआर का निर्माण तो करवाया जा रहा है लेकिन जीएलआर में पानी नहीं आने के कारण ग्रामीणों जलदाय विभाग द्वारा खर्च किए गए लाखों रुपए का लाभ ग्रामीण इलाकों के ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है।

उपखंड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में जलदाय विभाग द्वारा लाखों रुपए खर्च कर जीएलआर का निमार्ण करवाया गया लेकिन जीएलआर में पानी नहीं पहुंचने के कारण जीएलआर क्षतिगृस्त हो गई तथा कहीं पर पानी के अभाव में सूखी पड़ी है। वहीं ग्रामीणों को जीएलआर में पानी नहीं पहुंचने के कारण ग्रामीणों महंगे दामों में पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है। वहीं जलदाय विभाग लाखों रुपए की लागत से ग्रामीण इलाकों में जीएलआर तो बना लेकिन पानी नहीं आने के कारण विभाग द्वारा खर्च किए लाखों रुपए का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। जिसके कारण ग्रामीणों जीएलआर को छोड़कर अन्य गांव से पानी का टैंकर मंगवाना पड़ रहा है।

ग्रामीण इलाकों में जलदाय विभाग द्वारा बनाई गई जीएलआर मात्र कागजों में ही खाना पूर्ति हो रही है। लेकिन ग्रामीण इलाकों के ग्रामीणों को नाम मात्र जीएलआर का पानी उपलब्ध हो रहा है। जलदाय विभाग द्वारा खर्च किए लाखों रुपए ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। रमजान मेहर, कांग्रेस युवा नेता

कागजों में साबित हो रही है जीएलआर

उपखंड क्षेत्र में गहराया पेयजल संकट को लेकर अभी तक जनप्रतिनिधि व प्रशासन द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं देने के कारण जलदाय विभाग द्वारा खर्च किए गए लाखों रुपए मात्र कागजों में ही साबित हो रही है। वहीं जनप्रतिनिधियों द्वारा गांवों में जाकर जन समस्या सुनते तथा समस्याओं का समाधान करने के मात्र आश्वासन देते है। उसके बाद कोई जनप्रतिनिधि व अधिकारी अपने आदेशों की इतिश्री कर देते है। उसके बाद किसी प्रकार कार्य नहीं होता है। वहीं जनप्रतिनिधियों द्वारा ग्रामीण इलाकों में जाकर पानी को लेकर ग्रामीण समस्या से अवगत करवाते है तथा जनप्रतिनिधियों द्वारा ग्रामीणों के सामने ही जलदाय विभाग के अधिकारियों को दूरभाष पर फटकार लगाते है तथा जनप्रतिनिधियों को दौरे के दौरान ग्रामीणों को एक बार खुश कर देते है। उसके बाद समस्या जस की तस हो जाती है।

दूषित पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामीण इलाकों के निवासी

ग्रामीण इलाकों में जलदाय विभाग द्वारा बनाई गई जीएलआर से दूषित पानी पीने को मजबूर हो रहे है। वहीं विभाग द्वारा बनाई गई जीएलआर की छत नहीं होने के कारण ग्रामीणों दूषित पानी को मजबूर कर दिया। लेकिन इन जीएलआर को अभी तक विभागीय अधिकारियों द्वारा नहीं ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसके कारण ग्रामीण इलाकों में रह रहे लोगों दूषित पानी पीने को मजबूर कर दिया है। कई जगहों पर जीएलआर छत नहीं है तथा कई जीएलआर पानी के अभाव सूखी पड़ी है।

ग्रामीण इलाकों में विभाग द्वारा बनाई गई जीएलआर की समय-समय सफाई भी की जाती है। कहीं पर भी जीएलआर क्षतिग्रस्त होती है तो तुरंत प्रभाव से उनकी मरम्मत करवाकर जीएलआर को सुचारू किया जाता है। ज ग्रामीणों को हर समय जीएलआर का पानी उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है। दिनेश नागौरी, एक्सईएन, जलदाय विभाग पोकरण

लखसिंह की ढाणी में पानी की किल्लत, ग्रामीण परेशान

रामदेवरा| रामदेवरा ग्राम पंचायत के आस पास की ढाणियों मे स्थित जीएलआर मे पानी की आपूर्ति नहीं होने से आमजन को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। कस्बे के लखसिंह की ढाणी में आसपास जीएलआर तो है, लेकिन पानी की पाइपलाइन से पानी की सप्लाई नहीं की जा रही है। ढाणी के निवासियों के द्वारा पेयजल के लिए पानी के टैंकरों से पेयजल सप्लाई करवाई जा रही है। इस कारण ढाणी के निवासियों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। पानी के लिए तरस रहे ग्रामीणों की जलदाय विभाग के अधिकारियों को काई परवाह नहीं है। अधिकारियों को पानी की सप्लाई के बारे मे पूछने पर यह कहा जाता है कि कार्य चल रहा है कहकर फोन काट देते हैं। ढाणी के निवासियों के द्वारा कई बार विभाग के अधिकारियों को पेयजल संकट के बारे में सुचित भी किया गया लेकिन विभाग के अधिकारियों के द्वारा ना तो पानी की पाइप लाइन को शुरू किया जा रहा है और न ही पानी के सरकारी टैंकरों से पेयजल की व्यवस्था करवाई जा रही है। ऐसे में ढाणी के निवासियों के साथ पशुधन को भी पेयजल के लिए भटकना पड़ रहा है।

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