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परसोलिया में भागवत कथा में बताया दान का महत्व

दान के लिए उठने वाले हाथ प्रशंसनीय हैं। केवल एकत्रण के लिए उठने वाले हाथ निंदित किए जाने चाहिए। दान से ही समाज की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 05:50 AM IST

दान के लिए उठने वाले हाथ प्रशंसनीय हैं। केवल एकत्रण के लिए उठने वाले हाथ निंदित किए जाने चाहिए। दान से ही समाज की जरूरतें पूरी होती हैं। यह विचार महर्षि उत्तम स्वामीजी ने भागवत कथा के अंतिम दिन व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति जो अपना समय श्रम व धन श्रम परमार्थ में लगाता है, वह उत्तम गति को प्राप्त होता है। केवल और केवल अपने बारे में सोचना निंदा की स्थिति बनाता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा कभी समाप्त नहीं होती, केवल विराम लगता है, क्योंकि इसका तेज आदी और अनंत है। परमात्मा अपने भक्तों का ऋण कभी नहीं रखता, उसको कई गुना कर लौटा देता है। कृष्ण के विराट स्वरूप की व्याख्या करते हुए कहा कि परमपिता परमेश्वर कण कण में व्याप्त हैं। प्रत्येक को सम्मान देना वह अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से पूरा करना हमारा प्रथम धर्म होना चाहिए। कथा में भजन की प्रस्तुति को श्रोताओं ने सराहा। स्वामी जी ने बांसुरी बजाकर सभी को भाव विभोर किया। समिति के सदस्यों व कार्यकर्ताओं का उत्तम स्वामी ने उपरणा ओढ़ाकर अभिनंदन किया। कथा प्रसंग के माध्यम से उन्होंने कहा कि मंदिर में झाड़ू लगाने तक का भी अवसर मिल जाए तो झुकना नहीं चाहिए। उन्होंने बताया कि सांसारिक नियंत्रण तो हम पर बहुत है, लेकिन आध्यात्मिक नियंत्रण न होने की वजह से मन अशांत रहता है। धर्म का संरक्षण यदि आमजन द्वारा किया जाएगा तो आम जनता का संरक्षण धर्म अवश्य करेगा। समाज की गैर जरूरी बातों पर प्रतिक्रिया देने की बजाय अपने सदमार्ग पर निरंतर चलते रहना चाहिए। हर व्यक्ति में जो गुण हैं उनको ग्रहण करें और अवगुणों से दूर रहें। रूस से आई याना तुरपाक ने महामृत्युंजय मंत्र बोल कर सभी को अभिभूत किया। बुधवार का शिला पूजन ध्रुवशंकर, गोविन्दलाल, शंकरलाल भोई, प्रकाश चन्द्र, लवजी पाटीदार, वैध डायालाल पाटीदार, परेश पंड्या, दिनेश पाटीदार ने किया। आचार्य कीर्तिश भट्ट के निर्देशन में 21 विप्रवरों ने विष्णु याग मंडप में श्रीयंत्र की विधिवत पूजा अर्चना की।

इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने 22 अप्रैल को होने वाले शिला पूजन के लिए नाम लिखवाएं। मुख्य यजमान भारत वासिया, दैनिक यजमान डॉ पीयूष पंड्या व भोजन यजमान गमलेश्वर कमेटी बोरी द्वारा पोथी पूजन किया गया।

आनंदपुरी में गैर, चांदरवाड़ा में राड़ का मेला 2 को

आनंदपुरी| होली पर्व के दूसरे दिन धूलंडी पर आनंदपुरी कस्बे की पाट नदी किनारे पारंपरिक गैर मेला और चांदरवाड़ा में राड़ मेले का आयोजन होगा। दोनों जगह सामूहिक आयोजन में आसपास गांवों के सैकड़ों लोग शामिल होंगे। यह जानकारी मेला समिति अध्यक्ष अनिल डामोर ने दी।

परसोलिया में कथा सुनाते उत्तम स्वामी और पांडाल में मौजूद श्रद्धालु।

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