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लोग परमात्मा को तो मानते हैं, उनकी बात को ही नहीं मानते-उत्तम स्वामी

समाज की यह बड़ी विडंबना है कि लोग परमात्मा को तो मानते हैं लेकिन परमात्मा की बात को नहीं मानते। यह विचार ध्यान...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 28, 2018, 06:15 AM IST

समाज की यह बड़ी विडंबना है कि लोग परमात्मा को तो मानते हैं लेकिन परमात्मा की बात को नहीं मानते।

यह विचार ध्यान योगी उत्तम स्वामी ने सर्वेश्वर महादेव परसोलिया में चल रही भागवत कथा के छठे दिन व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि परमात्मा के लिए धूप, दीप, अगरबत्ती, पूजा, आरती, भेंट पूरी श्रद्धा से करते हैं परंतु परमात्मा का यह संदेश है कि वह मानवीय मूल्यों को थामे रखना पसंद करता है। मन की पहेलियों को हल करना केवल आध्यात्म से ही संभव है। बुद्धि को हमेशा मन के नियंत्रण में लगाना चाहिए।

धर्म-समाज-संस्था

परतापुर. भागवत कथा के दौरान आरती उतारते यजमान और श्रद्धालु।

भजनों की प्रस्तुतियों पर झूमे श्रद्धालु

कथा के दौरान उत्तम स्वामी ने भजनों की भी प्रस्तुतियां दी। जिसमें मत कर तू अहंकार रे मनवा और मैं अपनी धुन में रहता हूं, राधे गोविंद कहता हूं भजनों की सुमधुर प्रस्तुतियां दी गई। इस दौरान पांडाल में मौजूद श्रद्धालु थिरकने लगे। गुरु की महिमा का बखान करते हुए कहा कि जो अंधकार से प्रकाश में लाए वही सच्चा गुरु है। भक्तों का अहंकार परमात्मा कभी स्वीकार नहीं करते। कथा से पहले मुख्य यजमान भारत वासिया इंग्लैंड, दैनिक यजमान जसवंत सिंह कुमजी का पारड़ा, उत्सव यजमान प्रकाश पंचाल गढ़ी की ओर से पोथी पूजन किया गया। इस दौरान सुरेन्द्र शर्मा, उपेंद्र त्रिपाठी, गुलाब जी महाराज, जावेद कुरैशी, डाॅ. रमेश मंगल, अरविंद पंचाल, रामलाल यादव मौजूद थे।

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