--Advertisement--

झाड़-फूंक से िबगड़ी सेहत

Pratapur News - भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा बांसवाड़ा में कुपोषण का दंश इस कदर हावी हो गया है कि इसे मिटाने के लिए सरकारी प्रयास...

Dainik Bhaskar

Feb 11, 2018, 06:20 AM IST
झाड़-फूंक से िबगड़ी सेहत
भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा

बांसवाड़ा में कुपोषण का दंश इस कदर हावी हो गया है कि इसे मिटाने के लिए सरकारी प्रयास भी कमतर पड़ रहे हैं। पहले ही एमजी अस्पताल कुपोषण, बर्थ एस्पेक्शिया, कमजोरी और अन्य कारणों से 90 बच्चों की मौत के कारण प्रदेश में सबसे अधिक चर्चा में रहा है। इसके बाद भी इसका कोई सकारात्मक असर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं पर नहीं पड़ रहा। 7 फरवरी को महात्मा गांधी अस्पताल में शाम को 6 बजे इलाज के लिए पहुंची 6 माह की चंचल पुत्री रमेश सिवियर एनिमिया से ग्रसित थी। जब परिजन उसे एमजी अस्पताल लाए तो उसकी हालत बहुत नाजुक थी। तत्काल खून की आवश्यकता को देखते हुए जब परिजनों से खून दिलाने को कहा गया तो कोई भी तैयार नहीं हुआ।

आखिर में रेडड्रॉप इंटरनेशनल संस्था और ब्लड बैंक की ओर से चेरिटी में ब्लड की व्यवस्था कराई गई, लेकिन तब तक उसने जान गंवा दी थी। जानकारी के अनुसार चंचल कुछ दिनों से बीमार थी। उसके परिजन काफी दिन तो झाड फूंक और भोपों से इलाज कराते रहे। आखिर में जब तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो एमजी अस्पताल लाया गया। बच्ची में खून की स्थिति ऐसी थी कि क्रॉस मैचिंग के लिए खून निकालना भी मुश्किल हो रहा था।

जागरुकता की कमी



एमजी अस्पताल में दो बच्चे अब भी जिंदगी से कर रहे संघर्ष

मासूम दीपिका- विकेश की हालत नाजुक

इधर, दूसरी ओर मछारासाथ गांव की 7 वर्षीय दीपिका पुत्री दीवान की हालत भी नाजुक बनी हुई है। पीलिया होने के कारण उसे बहुत अधिक खून की कमी आ चुकी है। दीपिका को चेरिटी से ब्लड दिलाया गया, लेकिन क्रॉस मैचिंग के लिए दीपिका के शरीर से ब्लड नहीं लिया जा रहा था। इसके लिए उसके पैरों से ब्लड सैंपल लिए गए। आखिर में चेरिटी से यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। परतापुर के निकट रोडदा गांव का 10 वर्षीय विकेश भी बीते तीन दिनों से बीमार चल रहा है। उसे स्कूल से शिक्षक घर छोड़ने आए। परिजनों ने उसे परतापुर अस्पताल में इलाज कराया, जहां से बांसवाड़ा भेजा गया।

X
झाड़-फूंक से िबगड़ी सेहत
Astrology

Recommended

Click to listen..