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परमात्मा के समक्ष हीरो बनकर नहीं जीरो बनकर जाओ - उत्तम स्वामी

Dainik Bhaskar

Feb 27, 2018, 06:25 AM IST

Pratapur News - परमात्मा के समक्ष जब भी जाने का अवसर मिले तब हीरो की भांति नहीं जीरो बनकर जाना चाहिए। जब हम खाली होंगे तो परमात्मा...

परमात्मा के समक्ष हीरो बनकर नहीं जीरो बनकर जाओ - उत्तम स्वामी
परमात्मा के समक्ष जब भी जाने का अवसर मिले तब हीरो की भांति नहीं जीरो बनकर जाना चाहिए। जब हम खाली होंगे तो परमात्मा अपना प्रसाद दे पाएगा। यह विचार महर्षि उत्तम स्वामी जी ने सर्वेश्वर महादेव परसोलिया में आयोजित भागवत कथा के पांचवें दिन व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि परमात्मा सरल व निर्मल ह्रदय वाले व्यक्तियों को पसंद करता है। चतुराई, चालाकी दुनियादारी में एक हद तक ठीक है लेकिन परमात्मा के समक्ष इसके कोई नंबर नहीं मिलते।

कथा प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने बताया वह जिसके पास मोह ना हो उसके पास ही मोहन रहते हैं। उन्होंने कहां की ईश्वर को साक्षी रखकर किया हुआ हर कर्म धर्म है। उद्दंडता मनुष्य का पतन कराती है। कथा में नगर में जोगी आया यशोदा के मन भाया भजन संगीतमय प्रस्तुति हुई। उन्होंने शिव का अर्थ बताते हुए कहा कि यह कल्याणकारी है, राधा रूपी धारा में बहने से कृष्ण तक पहुंचा जा सकता है। उन्होंने मन की चंचलता को अवगुण बताते हुए कहा कि मन में अनावश्यक विचारों का प्रवाह परमात्मा के अंश को उतरने नहीं देता। चंचल मन जब स्थिर होगा तभी आत्ममंथन हो सकता है। उन्होंने कर्मफल की रक्षा करते हुए बताया कि कर्म के फल को प्राप्त करने से कोई रोक नहीं सकता। अपने कर्मों का मूल्यांकन निरंतर करने वाला व्यक्ति पवित्र होता है। सज्जनों को दुख देने वाले पाप के भागी बनते हैं। परमात्मा किसी वस्तु का भूखा नहीं है वह केवल भाव का भूखा है। उन्होंने रूप को सजाने के बजाय स्वरूप को सजाने की सलाह दी। कथा के दौरान वचन मधुरम, चरितं मधुरम, मधुरम मधुरम, भजन की शानदार प्रस्तुति हुई। गोवर्धन पूजा वह छप्पन भोग के उत्सव को पंडाल में उल्लास के साथ मनाया गया। कथा में बेणेश्वर धाम के अच्युतानंद महाराज भी पहुंचे। कार्यक्रम का संचालन डॉ पीयूष पंड्या ने किया। संयोजक रमेश पंड्या ने बताया कि मंगलवार को रुक्मिणी विवाह का उत्सव मनाया जाएगा। कथा में 51000 का गुप्त दान व पांच शिला पूजन के यजमान तैयार हुए। इसके अलावा कई भामाशाह ने मंदिर जीर्णोद्धार के लिए सहयोग राशि की घोषणा की गई।

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