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हर रोज एक दोष दूर करने का संकल्प दिलाया

भास्कर संवाददाता| परतापुर परसोलिया के सर्वेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा में शनिवार को कथावाचक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 25, 2018, 06:40 AM IST

भास्कर संवाददाता| परतापुर

परसोलिया के सर्वेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा में शनिवार को कथावाचक उत्तम स्वामी ने श्रद्धालुओं को हर रोज एक दोष करने का संकल्प दिलाया।

उन्होंने सामूहिक भोजन और भजन की संस्कृति को हर परिवार में जिंदा रखने की सीख दी। कथावाचक ने कहा कि प्रेम मय होने पर ही हम संतत्व को प्राप्त कर सकते हैं। जब तक विकारों से युक्त हैं, तब तक पशु तुल्य जीवन जीकर धरा से चले जाएंगे। मन सेट नहीं है तो सब अपसेट ही लगता है। उत्तम स्वामी ने कथा में श्रीकृष्ण की लीलाओं, वराह भगवान के अवतार, हिरणकश्यप के वध का उल्लेख किया।

रविवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनेगा। कथा के पूर्व मुख्य यजमान भारत वासिया इंग्लैंड, दैनिक यजमान हरीश पाटीदार व भोजन यजमान माइंस एसोसिएशन ओडा बस्सी पालोदा की ओर से पोथी पूजन किया गया।कार्यक्रम के बाद उदयरामजी महाराज का अभिनंदन किया गया।

कथा सुनने के लिए गढ़ी विधायक जीतमल खांट, जिला प्रमुख रेशम मालवीया, प्रधान गढ़ी लक्ष्मण डिंडोर, अरथूना प्रधान कल्पना कटारा, बागीदौरा प्रधान शांता गरासिया, गांगड़तलाई प्रधान सुभाष तंबोलिया, पंकज पारीक, प्रभजोत सिंह, जगदीश पाटीदार, गोविंदसिंह राव भी आए थे। मंदिर विकास समिति संयोजक रमेश पंड्या ने आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर पीयूष पंड्या ने किया।

महादेव मंदिर परिसर में आयोजित भागवत कथा को सुनते श्रद्धालु।

यह रहा खास

ध्यान, धारणा और समाधि की प्रक्रिया से हम श्रेष्ठता को पा सकते हैं।

शरीर का मोह स्वाभाविक है, मरना कोई नहीं चाहता, लेकिन यह अंतिम सत्य सबको स्वीकार करना पड़ता है।

समूचा जगत सुख और दुख के साथ चलता है।

आत्मा पर चमड़ी का आवरण लगा रहता है।

ज्ञान से भी अधिक भाव का महत्व है। कई बार ज्ञानी भी विफल हो जाता है और भावयुक्त व्यक्ति अच्छे से जीवन गुजार लेता है।

दक्ष प्रजापति के यज्ञ और शिव सती संवाद के बारे में बताते हुए कहा कि आमंत्रण पर ही कहीं भी जाना चाहिए।

कथावाचक ने शवत्व से शिवत्व की ओर जाने का सूत्र बताया।

गृहस्थ जीवन के दुखड़े परमात्मा को सुनाना उचित नहीं है।

10 मिनट की माला का हम प्रतिफल भोगना चाहते हैं, लेकिन दिन के शेष 23 घंटे 50 मिनट में किए गए पाप का प्रतिफल बोलने से इनकार करते हैं।

अपने आप को मन से नहीं, बुद्धि से काबू में करना चाहिए।

जीवन को सार्थक करने की दिशा में चिंतन मनन करना चाहिए।

आईना चेहरा दिखाता है, चरित्र नहीं, अन्यथा लोग आईने से घृणा करने लग जाते।

राजा ऋषभदेव की 108 संतानों के प्रश्न से उन्होंने मानवीय सोच और उसके परिणाम की तरफ ध्यान आकृष्ट किया।

भास्कर संवाददाता| परतापुर

परसोलिया के सर्वेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा में शनिवार को कथावाचक उत्तम स्वामी ने श्रद्धालुओं को हर रोज एक दोष करने का संकल्प दिलाया।

उन्होंने सामूहिक भोजन और भजन की संस्कृति को हर परिवार में जिंदा रखने की सीख दी। कथावाचक ने कहा कि प्रेम मय होने पर ही हम संतत्व को प्राप्त कर सकते हैं। जब तक विकारों से युक्त हैं, तब तक पशु तुल्य जीवन जीकर धरा से चले जाएंगे। मन सेट नहीं है तो सब अपसेट ही लगता है। उत्तम स्वामी ने कथा में श्रीकृष्ण की लीलाओं, वराह भगवान के अवतार, हिरणकश्यप के वध का उल्लेख किया।

रविवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनेगा। कथा के पूर्व मुख्य यजमान भारत वासिया इंग्लैंड, दैनिक यजमान हरीश पाटीदार व भोजन यजमान माइंस एसोसिएशन ओडा बस्सी पालोदा की ओर से पोथी पूजन किया गया।कार्यक्रम के बाद उदयरामजी महाराज का अभिनंदन किया गया।

कथा सुनने के लिए गढ़ी विधायक जीतमल खांट, जिला प्रमुख रेशम मालवीया, प्रधान गढ़ी लक्ष्मण डिंडोर, अरथूना प्रधान कल्पना कटारा, बागीदौरा प्रधान शांता गरासिया, गांगड़तलाई प्रधान सुभाष तंबोलिया, पंकज पारीक, प्रभजोत सिंह, जगदीश पाटीदार, गोविंदसिंह राव भी आए थे। मंदिर विकास समिति संयोजक रमेश पंड्या ने आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर पीयूष पंड्या ने किया।

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