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गढ़ी के खेल मैदान में कलाल समाज का सम्मेलन आज, 23 जोड़े बनेंगे जीवनसाथी

भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा/परतापुर मेवाड़ा कलाल समाज का 10वां सामूहिक विवाह समारोह रविवार को गढ़ी के खेल मैदान...

Dainik Bhaskar

Feb 18, 2018, 06:45 AM IST
गढ़ी के खेल मैदान में कलाल समाज का सम्मेलन आज, 23 जोड़े बनेंगे जीवनसाथी
भास्कर संवाददाता| बांसवाड़ा/परतापुर

मेवाड़ा कलाल समाज का 10वां सामूहिक विवाह समारोह रविवार को गढ़ी के खेल मैदान में रखा गया है। समाज इस समारोह को बड़े उत्सव के रूप में आयोजित कर रहा है, जिसमें वागड़ के समाजबंधु बुलाए गए हैं। इनकी मौजूदगी में 23 जोड़े एक-दूसरे के जीवनसाथी बनेंगे। समारोह के पहले चरण में वर-वधुओं की शोभायात्रा सुबह 10 बजे विवाहस्थल से गढ़ी में निकलेगी। दोपहर में 12.15 बजे तोरण स्वागत किया जाएगा। दोपहर 2 बजे से शादी और शाम 5 बजे विदाई की रस्म होगी। शादी समारोह के दौरान ड्रोन से पुष्पवर्षा कर सत्कार किया जाएगा। मेवाड़ा कलाल समाज में एकल विवाह को बंद कर दिया गया है। सामाजिक और आर्थिक रूप से समाज को सुदृढ़ बनाने के लिए सामूहिक विवाह का आयोजन शुरू कर अनूठी पहल की। बांसवाड़ा में मेवाड़ा कलाल समाज के अब तक 9 सामूहिक विवाह हो चुके हैं, जिनमें 160 जोड़ों का विवाह कराया जा चुका है। रविवार को गढ़ी के खेल मैदान में 10वां सामूहिक विवाह समारोह होगा, इसमें 23 जोड़े एक दूसरे के जीवनसाथी बनेंगे। इस प्रकार रविवार को होने वाले 10वें सामूहिक विवाह समारोह तक कुल 183 जोड़ों की शादी हो जाएगी।

गढ़ी में तैयारियों का लिया जायजा

रविवार को गढ़ी खेल मैदान में होने वाले सामूहिक विवाह समारोह की तैयारी का जायजा शनिवार को जिलाध्यक्ष हरीश कलाल समेत समाजजनों ने लिया। इस दौरान टेंट, पानी, पार्किंग, भोजन, अल्पाहार समेत सभी प्रकार की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया। इस दौरान सामूहिक विवाह समिति के संयोजक मुकेश मोड़, समाजसेवी ललित कलाल, कमलेश गढ़ी, कोष प्रभारी नरेश परतापुर, मोहनलाल, हिम्मत लाल भगोरा, कचरा जी, सुंदरलाल, वीरेंद्र, बंशीलाल, कल्पेन, भवानी, जिगर, कवीश, मणिलाल, रामचंद्र ने कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया और विवाहस्थल पर तैयारी का जायजा लिया।

फिजूलखर्ची रोकने में कलाल समाज सबसे आगे

मेवाड़ा कलाल समाज के जिलाध्यक्ष हरीश कलाल सेनावासा ने बताया कि एकल विवाह से परिवार पर आर्थिक बोझ और फिजूलखर्ची होती थी। इसे रोकने के लिए समाज के युवाओं ने सामूहिक विवाह समारोह करने की ठानी। इससे प्रति परिवार में 5-10 लाख रुपए तक की बचत होती है। एकल विवाह करने पर समाज की ओर से निष्कासन करने की चेतावनी के भी सार्थक नतीजे सामने आए हैं। कलाल ने बताया कि फिजूलखर्ची रोकने, समाज को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और समाज के हर परिवार में समता का भाव जगाने में सबसे पहले कलाल समाज आगे आया है, जो अच्छी पहल है। कलाल ने समय बचाने और फिजूलखर्च रोकने के लिए समाज के किसी भी कार्यक्रम में अध्यक्ष कार्यकाल तक पगड़ी और साफा नहीं पहनने का संकल्प लिया है। गौरतलब है कि हरीश कलाल मेवाड़ा कलाल समाज में सक्रियता भूमिका के निर्विघ्न के साथ साथ दूसरे सभी समाजों में सहयोग करते हैं।

धर्म-समाज-संस्था

परतापुर. 10वें सामूहिक विवाह समारोह की तैयािरयों का जायजा लेते समाज के पदािधकारी।

युवाओं की पहल ने दिलाई कामयाबी

कलाल समाज के सामूहिक विवाह आयोजन में युवाओं की भागीदारी ने फिजूलखर्ची रोकने में अहम भूमिका निभाई। वहीं भामाशाह भी सामूहिक विवाह आयोजन में वर-वधु को यथाशक्ति सहयोग करते हैं। मेवाड़ा कलाल समाज बांसवाड़ा में सामूहिक विवाह की परंपरा शुरू करने का श्रेय युवा कार्यकारिणी को जाता है। समाज का पहला सामूहिक विवाह 3 दिसंबर 2014 को हुआ था। तब से लेकर यह क्रम जारी है। समाज को संगठित बनाने, कुरीतियों को मिटाने और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का उद्देश्य पूरा करने में समाज के युवा जुटे हुए हैं।

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