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थाने के सामने चाय की थड़ी पर कांस्टेबल ने 3 हजार रिश्वत ली, बगल में ही चाय पी रहे एसीबी के जवानों ने पकड़ा

भास्कर संवाददाता | परतापुर/बांसवाड़ा मारपीट और जमीन विवाद की शिकायत मे प|ी और 2 बेटियों के नाम हटाने के लिए फरियादी...

Dainik Bhaskar

Apr 12, 2018, 04:30 AM IST
थाने के सामने चाय की थड़ी पर कांस्टेबल ने 3 हजार रिश्वत ली, बगल में ही चाय पी रहे एसीबी के जवानों ने पकड़ा
भास्कर संवाददाता | परतापुर/बांसवाड़ा

मारपीट और जमीन विवाद की शिकायत मे प|ी और 2 बेटियों के नाम हटाने के लिए फरियादी से 3 हजार की रिश्वत ले रहे गढ़ी थाने के कांस्टेबल कुसुमकांत को एसीबी की टीम ने बुधवार दोपहर 3:15 बजे रंगेहाथ गिरफ्तार किया। कांस्टेबल रिश्वत के रुपए थाने के ठीक सामने चाय की थड़ी पर लेते पकड़ा गया। थड़ी पर उसी के बगल में सादे कपड़ों में चाय पी रहे 3 युवक एसीबी टीम के सदस्य थे। कांस्टेबल के 3 हजार जेब में रखते ही एसीबी टीम ने उसे पकड़ लिया। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि कांस्टेबल पहले भी 5 हजार रुपए ले चुका है। लेकिन फरियादी को गिरफ्तार करने की धमकी देकर फिर 5 हजार की मांग की थी। जिस पर फरियादी ने डूंगरपुर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में इसकी शिकायत की।

गढ़ी के गंगराची गांव के वाला पुत्र धुलजी कटारा पर उसी की मां काली ने 13 नवंबर, 2017 को परिवाद दिया था। जिसमें काली ने आरोप लगाया कि एक दिन पहले वाला, उसकी प|ी और 2 बेटियों ने अनाधिकृत रूप से घर में घुसकर उससे मारपीट की। फिर घसीटते हुए नाले तक ले गए। इससे पहले वाला ने भी 1 सितंबर, 2017 को मां और भाईयों के खिलाफ परिवाद दिया था। जिसमें वाला ने आरोप लगाया कि जमीन और धन के बंटवारा ठीक से नहीं किया जा रहा। दोनों ही परिवादों की जांच बीट प्रभारी कुसुमकांत को दी गई। जिस पर जांच कर रहे कांस्टेबल कुसुमकांत ने परिवाद की जांच किए बिना ही वाला पर उसकी प|ी और 2 बेटियों को गिरफ्तार करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इससे वाला घबरा गया। कुसुमकांत ने इसका फायदा उठाकर 5 हजार ले लिए। इसके बाद भी कुसुमकांत का लालच नहीं मिटा तो और उसने उसकी प|ी और बेटियों के नाम केस से हटाने की एवज में फरियादी से 5 हजार की रिश्वत और मांगी। 4 हजार में सौदा तय किया। वाला ने 1 हजार रुपए दिए। बाकी रुपयों के लिए कुसुमकांत बार-बार उसके घर आने लगा। इससे तंग आकर वाला ने 4 अप्रैल को एसीबी में शिकायत की।

कांस्टेबल ने 5 महीने तक नहीं की परिवाद की जांच

एसीबी की टीम कार्रवाई करते हुए। बीच में पीली टीशर्ट पहने आरोपी।

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10 जनवरी: सदर थाने में एएसआई योहन कुमार को चोरी के केस में आरोपी नहीं बनाने की एवज में 10 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था।

2017: 17 जून को एसीबी की टीम ने सदर थाने के तत्कालीन एएसआई गोकूलराम बैरवा को सड़क हादसे में जब्त किए लोडिंग ऑटो छुड़वाने की एवज में 2 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगेहाथों गिरफ्तार किया था।

2015: 5 सितंबर को एसीबी की टीम ने लीमथान चौकी प्रभारी गजेंद्रसिंह समेत 3 जनों को 30 हजार की रिश्वत लेते पकड़वाया था। उन आरोपियों में कांस्टेबल कानाराम बाद में ट्रैप हुए एएसआई गाेकुलराम का भाई था। बाद में कानाराम समेत 3 पुलिस कर्मी सस्पेंड भी हुए।

पुलिसकर्मी कुसुमकांत ने परिवाद मिलने के 5 महीने तक की उसकी जांच तक नहीं की। न तो गवाहों के बयान लिए और नहीं सीएलजी सदस्यों की मदद ली। जमीन का मामला होने और सीविल नेचर होने के बावजूद परिवाद तहसीलदार को हस्तांतरित नहीं किए। रुपयों के लिए फाइल शामिल पत्रावली बाकी होना बताकर परिवादी से रुपयों की मांग करता रहा। डीएसपी गुलाबसिंह ने बताया कि सत्यापन कराया तो शिकायत सही पाई गई। जिस पर बुधवार को 3 हजार लेकर वाला को कांस्टेबल को देने भेजा। जहां चाय की थड़ी के भीतर जाकर कांस्टेबल ने 3 हजार रुपए ले लिए। बाद में कांस्टेबल के रूम की भी तलाशी ली। कार्रवाई टीम में दिलीप सिंह, गणेश लबाना, करण सिंह, दशरथ सिंह व धीरेंद्र सिंह शामिल रहे।

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थाने के सामने चाय की थड़ी पर कांस्टेबल ने 3 हजार रिश्वत ली, बगल में ही चाय पी रहे एसीबी के जवानों ने पकड़ा
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