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अहंकार खत्म कर अपने मन में ब्रह्म ज्ञान बसाएं, तभी जागृति संभव : संत

साकरिया में आयोजित निरंकारी सत्संग में मौजूद महात्मा और श्रद्धालु। भास्कर संवाददाता|परतापुर साकरिया में...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 14, 2018, 05:55 AM IST

अहंकार खत्म कर अपने मन में ब्रह्म ज्ञान बसाएं, तभी जागृति संभव : संत
साकरिया में आयोजित निरंकारी सत्संग में मौजूद महात्मा और श्रद्धालु।

भास्कर संवाददाता|परतापुर

साकरिया में रविवार के निरंकारी मिशन की ओर से बाबा हरदेवसिंहजी की स्मृति में समर्पण दिवस मनाया गया। इसमें बाबा हरदेवसिंह के 1980 से लेकर 13 मई 2016 तक पूरे विश्व में एकत्व स्थापित कर एकता, भाईचारा, सदभावना का संदेश, मानवता को अंतिम सांसों तक स्थापित करने के काम का वर्णन किया।

सत्संग में आए ज्ञान प्रचारक महात्मा प्रभाशंकर निरंकारी ने कहा कि जीवन में ब्रह्मज्ञान से ही भवसागर पार किया जा सकता है। ब्रह्मज्ञान से ही मन में विवेक जाग्रत होता है और मन मे ऊर्जा आती है, जिससे यह जीवन सहज सरल बन जाता है। मन में दया, क्षमा, प्रेम, करुणा के भाव उत्पन्न होते हैं, तभी जाकर हमारे जीवन में समर्पण की ओर चल सकता है।

संत ने कहा कि ब्रह्मज्ञान शेरनी के दूध के समान है, जिसे रखने के लिए सोने का बर्तन होना आवश्यक है। इसलिए मानव को भी अहंकार खत्म कर अपने मन को सोने का बर्तन बनाकर ही प्राप्त अपने मन में ब्रह्मज्ञान को बसाना होता है। सत्संग में नवीन त्रिवेदी, सुनील निरंकारी, अशोक शर्मा समेत जिलेभर के निरंकारियों ने भाग लिया।

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