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औषधीय पौधे लगाएं, 75 फीसदी तक मिलेगी सब्सिडी, प्रशिक्षण भी देगी सरकार

स्वयं सहायता समूह बनाकर बैंक में खाता खोलें, पहले अनुदान मिलेगा फिर काम शुरू करें ललित शर्मा | जयपुर राज्य...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 06:00 AM IST

औषधीय पौधे लगाएं, 75 फीसदी तक मिलेगी सब्सिडी, प्रशिक्षण भी देगी सरकार
स्वयं सहायता समूह बनाकर बैंक में खाता खोलें, पहले अनुदान मिलेगा फिर काम शुरू करें

ललित शर्मा | जयपुर

राज्य में आयुर्वेदिक दवाओं की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार किसानों के लिए अच्छी योजना लाई है। इसके तहत आयुर्वेदिक दवाओं में काम आने वाले औषधीय पौधे लगाने वाले किसानों को 30 से 75 फीसदी तक सब्सिडी देने का प्रावधान किया गया है। वहीं, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग भी किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा।

मिट्‌टी और पानी की जांच करेंगे : औषधीय पौधे की खेती करने के इच्छुक किसानों के खेत की पहले मिट्टी-पानी की जांच की जाएगी। अगर वह मिट्‌टी और पानी औषधीय पौधे लगाने के लिए उचित है तो ही मामला आगे बढ़ेगा। इस खेती के लिए कम से कम दो हैक्टेयर जमीन होना जरूरी है और एक हैक्टेयर में 1100 पौधे लगाने जरूरी होंगे। किसानों को उनके उत्पादन की बिक्री के लिए बोर्ड की ओर से बायर-सेलर कार्यक्रम करवाया जाएगा।

जैविक खाद से प्याज की फसल तैयार कर 3 माह में कमाते हैं 7 लाख रु. तक का मुनाफा

जैविक खाद से प्याज की फसल तैयार कर 3 माह में कमाते हैं 7 लाख रु. तक का मुनाफा

गांव भादासर के रामचंद्र जाखड़ को मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री भी कर चुके हैं सम्मानित

गांव भादासर के रामचंद्र जाखड़ को मुख्यमंत्री व कृषि मंत्री भी कर चुके हैं सम्मानित

मनफूल रुहिल | सरदारशहर (चूरू)

परंपरागत रूप से प्याज सहित अन्य फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए गांव भादासर के किसान रामचंद्र जाखड़ प्रेरणा स्रोत हैं। जाखड़ पिछले 5 साल से जैविक खाद से प्याज की खेती कर हर साल लाखों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं। बिना कीटनाशक दवाओं के उपयोग किए गोबर की खाद से तैयार इनके प्याज हरियाणा, पंजाब, श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ में बाजार भाव से दो से पांच रुपए तक महंगे बिकते हैं। कई बार व्यापारी उपज सीधे इनके खेत से ही ले जाते हैं। जाखड़ ने बताया कि जैविक खाद से तैयार प्याज खाने में स्वादिष्ट होता है तथा लंबे समय तक खराब भी नहीं होता। प्याज का बीज भी वे खुद ही तैयार करते हैं तथा उसकी ही बुआई करते हैं। जैविक खेती को प्रोत्साहन देने पर ही 2016 में जाखड़ को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व कृषिमंत्री प्रभुलाल सैनी ने 10 हजार रुपए व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया था। कृषि पर्यवेक्षक ममता ने बताया कि परंपरागत कृषि विकास योजना केे तहत जाखड़ ने भादासर, बंधनाऊ, पातलीसर व गोमटिया आदि के करीब 300 किसानों को भी जैविक खाद से प्याज, गेहूं व बाजरे की फैसल तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया है। वर्ष 2017 में जाखड़ ने जैविक खाद से 8 बीघा में प्याज की 790 क्विंटल उपज प्राप्त की। इस उपज से 10 लाख रुपए की कमाई हुई, जिसमें करीब 7 लाख रुपए का मुनाफा हुआ। इस बार 5 बीघा में प्याज की खेती की है, जिससे करीब 650 क्विंटल उपज होने की उम्मीद है। इससे आगामी 3 माह में 5 से 7 लाख रुपए का मुनाफा कमा सकेंगे।

मनफूल रुहिल | सरदारशहर (चूरू)

परंपरागत रूप से प्याज सहित अन्य फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए गांव भादासर के किसान रामचंद्र जाखड़ प्रेरणा स्रोत हैं। जाखड़ पिछले 5 साल से जैविक खाद से प्याज की खेती कर हर साल लाखों रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं। बिना कीटनाशक दवाओं के उपयोग किए गोबर की खाद से तैयार इनके प्याज हरियाणा, पंजाब, श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ में बाजार भाव से दो से पांच रुपए तक महंगे बिकते हैं। कई बार व्यापारी उपज सीधे इनके खेत से ही ले जाते हैं। जाखड़ ने बताया कि जैविक खाद से तैयार प्याज खाने में स्वादिष्ट होता है तथा लंबे समय तक खराब भी नहीं होता। प्याज का बीज भी वे खुद ही तैयार करते हैं तथा उसकी ही बुआई करते हैं। जैविक खेती को प्रोत्साहन देने पर ही 2016 में जाखड़ को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे व कृषिमंत्री प्रभुलाल सैनी ने 10 हजार रुपए व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया था। कृषि पर्यवेक्षक ममता ने बताया कि परंपरागत कृषि विकास योजना केे तहत जाखड़ ने भादासर, बंधनाऊ, पातलीसर व गोमटिया आदि के करीब 300 किसानों को भी जैविक खाद से प्याज, गेहूं व बाजरे की फैसल तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया है। वर्ष 2017 में जाखड़ ने जैविक खाद से 8 बीघा में प्याज की 790 क्विंटल उपज प्राप्त की। इस उपज से 10 लाख रुपए की कमाई हुई, जिसमें करीब 7 लाख रुपए का मुनाफा हुआ। इस बार 5 बीघा में प्याज की खेती की है, जिससे करीब 650 क्विंटल उपज होने की उम्मीद है। इससे आगामी 3 माह में 5 से 7 लाख रुपए का मुनाफा कमा सकेंगे।

स्वयं सहायता समूह बनाना होगा

राजस्थान स्टेट मेडिसनल प्लांट बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी डॉ. आई.के. जैन ने बताया कि औषधीय पौधों की खेती करने के इच्छुक किसानों को पहले स्वयं सहायता समूह बनाना होगा। इस समूह के नाम से आवेदन कर सकेंगे, जिसमें उल्लेख करना होगा कि खेत में किस दवा के पौधे लगाने जा रहे हैं। इसके साथ शपथपत्र देना होगा कि किसी अन्य संस्था से सब्सिडी नहीं ली है। समूह के नाम से बैंक खाता खोलकर खाते का एक कैंसल चेक आवेदन के साथ लगाना होगा। इसके बाद मेडिसनल बोर्ड के अधिकारी मौके का मुआयना कर रिपोर्ट देंगे। सब कुछ अनुकूल होने पर बैंक खाते में सब्सिडी आ जाएगी और किसान काम शुरू सकेंगे। इन किसानों को बोर्ड के विशेषज्ञों की ओर से तकनीकी जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा और कीट व रोग की स्थिति में क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी दी जाएगी। अधिक जानकारी के लिए बेवसाइट e-charak.in पर देख सकते हैं।

पौधों पर सब्सिडी की दर अलग-अलग: आयुर्वेद विभाग भरतपुर में अतिरिक्त निदेशक वैद्य घनश्याम शर्मा ने बताया कि वे संभाग के किसानों को इस तरह की खेती के प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न तरह की दवाओं वाले पौधों की खेती करने पर अलग-अलग मात्रा में सब्सिडी दी जा रही है। सब्सिडी लेकर किसान बीज और खाद खरीदकर खेती की तैयारी कर सकेंगे।

वागड़ में आम व कटहल की बागवानी से की Rs.25 लाख की सालाना कमाई

मुकेश पाटीदार | परतापुर

गढ़ी उपखंड में ग्राम पंचायत भगोरा के काकरादरा में किसान कचरू के पास 25 बीघा जमीन है। इस जमीन पर बागवानी कर वह 25 लाख रुपए सालाना कमाता है। कचरू ने बताया कि 20 साल पहले उसने ढाई बीघा जमीन पर बागवानी लगाई थी। उस दौरान वह कृषि विभाग की ओर से भ्रमण के लिए महाराष्ट्र और गुजरात गया था। वहां के किसानों द्वारा कम जमीन में अधिक कमाई की फसलें देखकर उसने भी कुछ नया करने की ठानी। उस वक्त कचरू के पास सिर्फ ढाई बीघा जमीन थी।

इसी दौरान कृषि पर्यवेक्षक बापूलाल पारेनी उसके संपर्क में आए। उन्होंने कचरू को बागवानी लगाने में सहायता की। कृषि पर्यवेक्षक की सलाह पर कचरू ने ढाई बीघा में विभिन्न प्रकार के आम, कटहल व नींबू आदि के पौधे लगाए। इससे उसकी कमाई होती गई। कमाई हुई, तो उसने आसपास की जमीन खरीदी। अब उसके पास 25 बीघा जमीन है। इसमेें उसने 600 लंगड़ा, दशहरी, हाफुस, आम्रफल आदि किस्म के आम के पेड़ लगा रखे हैं। इसके अलावा कटहल के 80 से ज्यादा पेड़ लगा रखे हैं। वह आम और कटहल के पौधे भी तैयार कर बेचता है। इनसे उसे अच्छी आमदनी हो जाती हे। बाग में बीच की खाली जमीन पर उसने सब्जियां उगा रखी हैं। साथ ही नींबू, अमरूद आदि के पौधे भी लगा रखे हैं। कचरू ने बताया कि फलदार पेड़-पौधों के साथ भैंस-बकरियां भी पाल रखी हैं। इनसे मिलने वाले दूध से अलग अामदनी होती है। इन दुधारू पशुओं की खाद पेड़-पौधों में उपयोग करते हैं।

75 फीसदी सब्सिडी : वत्सनाभ, अतीश, दारु हल्दी, गूगल, जटामासी, कुटकी, रक्तचंदन और चिरायता के पौधे लगाने पर।

50 फीसदी सब्सिडी : अकरकरा, पीला चंदन, काली मूसली और फलीहारी के पौध लगाने पर।

30 फीसदी सब्सिडी : घृत कुमारी (एलोविरा), नीम, ब्राह्मी, सनाय, सफेद मूसली, तुलसी पत्र और दालचीनी की खेती करने पर 30 फीसदी तक की सब्सिडी दी जाती है।

बांसवाड़ा. अपने खेत में आम के पौधों के बारे में बताते किसान।

बांसवाड़ा, मंगलवार, 1 मई, 2018 | 14

सब्जियों को रोगों से बचाने की जरूरत

अलवर| इन दिनों करेला, तुरई, टिंडा, ककड़ी व खरबूजा में फल मक्खी से फल काणे हो जाते हैं। फल मक्खी पर नियंत्रण के लिए काणे फलों को तोड़कर जमीन में गहरे गाड़कर नष्ट कर दें और कीटनाशी दवा मैलाथियान 50 ईसी का एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें। जायद भिंडी की फसल में पीत शिरा मोजेक रोग के प्रकोप की आशंका है। इसके प्रकोप से पत्तियां और फल पीले पड़ जाते हैं। पत्तियां चितकबरी होकर प्यालेनुमा हो जाती हैं। यह रोग सफेद मक्खी नामक कीट से हाेता है। इसके नियंत्रण के लिए फूल आने से पहले और फूल आने के बाद डायमिथोएट 30 ईसी दवा का एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।

करौंदे के पौधे में फूल आने पर सिंचाई न करें, फल लगने पर सिंचाई करें

करौंदे के पौधे में फूल आकर झड़ जाते हैं। फल नहीं लगते। उपाय बताएं। -पीरामल सैनी, गायत्री नगर, चूरू

पौधे में फूल आने के दौरान सिंचाई बंद कर दें। फल लगने पर सिंचाई करें।

नींबू व इमली के पौधे 6 साल से लगे हुए हैं। इनमें फल नहीं लग रहा है, क्या करें?

-श्याम सिंह, सीकर

नींबू के पौधे के आसपास गहरी गुड़ाई करें और उस मिट्टी में गोबर की सड़ी खाद का मात्रा अनुसार उपयोग करें। इमली के फल के लिए अभी दो वर्ष और इंतजार करें।

इस समय कौनसी सब्जियों की फसल की जा सकती है। -जीवन गोदारा, चूरू

आप गर्मी के मौसम में ज़ायद में होने वाली सब्जी की फसल बो सकते हैं। इनमें तरबूज, खरबूज, ककड़ी, भिंडी, पालक, कद्दू आदि शामिल हैं।

केले के पौधे के पत्ते सड़ रहे हैं। इसकी रोकथाम के उपाय क्या करें। -हरिओम, जालौर

आप इसके लिए मेनकोजेक एम-45 या डायथेन एम-46 दो ग्राम दवा का एक लीटर पानी में घोल बनाकर पौधे पर छिड़काव करें। साथ ही बावस्टिन 1 एमएल दवा का एक लीटर पानी में घोल बनाकर पेड़ की जड़ों में डाल दें।

एक्सपर्ट चंद्रभान चौहान, सहायक निदेशक, उद्यान विभाग

किसान हैल्पलाइन नंबर

18001801551, 18001806127

(सुबह 10 से शाम 5 बजे तक, टोल फ्री)

राज्य स्तरीय हैल्प डेस्क (0141-5102578)

सवाल भेजें

खेती से संबंधित अपने सवाल हमारे पास भेजें, विशेषज्ञ सुझाएंगे समाधान। पता- दिल्ली रोड मूंगस्का, अलवर मेल- agrobhaskarr2@gmail.com वॉट्‌सएप नंबर- 7597676923

कॉल न करें।

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