चित्तौड़ में दूसरी बार भी सभापति पद सामान्य का, जिले के बाकी पांचों निकायों में बदलाव

Pratapur News - भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़। नगर निकाय प्रमुख पदों के आरक्षण के लिए रविवार को जयपुर में राज्यस्तर पर लॉटरी...

Oct 22, 2019, 07:30 AM IST
भास्कर संवाददाता | चित्तौड़गढ़।

नगर निकाय प्रमुख पदों के आरक्षण के लिए रविवार को जयपुर में राज्यस्तर पर लॉटरी निकाली गई। जिसमें जिले के छह में से चार निकायों में चेयरपर्सन का पद सामान्य वर्ग के लिए खुला रहा। रावतभाटा में सामान्य महिला और कपासन में ओबीसी महिला के लिए सीट रिजर्व हुई। इसके साथ ही अगले महीने प्रस्तावित तीन निकायों के चुनाव के लिए दावेदारों और आमजन का कौतुहल समाप्त हो गया।

लाटरी के अनुसार चित्तौड़गढ़ नगर परिषद सभपति, निम्बाहेड़ा, बड़ीसादड़ी व बेगूं नगर पालिका अध्यक्ष पद सामान्य वर्ग के लिए खुले है। यानी इन चारों जगहों पर किसी भी वर्ग का व्यक्ति पार्षद दल का नेता बनकर निकाय प्रमुख का चुनाव लड सकता है। रावतभाटा में ओबीसी महिला और कपासन में सामान्य महिला ही यह चुनाव लड सकेगी। जिले के छह निकायों में से चित्तौड़गढ़ नगर परिषद ही ऐसा है,जहां सभापति पद लगातार दूसरी बार भी रिजर्व नहीं हुआ। शेष पांचों जगह पिछली बार से स्थिति बदल गई। उल्लेखनीय है कि चित्तौड़गढ़ नप के अलावा निम्बाहेड़ा व रावतभाटा में नगर पालिका चुनाव अगले महीने ही होने है। जबकि कपासन, बेगूं व बड़ीसादड़ी में नपा बोर्ड का कार्यकाल अगस्त में पूरा होगा। सरकार ने प्रदेश के सभी निकायों के प्रमुख पदों की लाटरी एक साथ ही निकाल ली।


25 साल में 2 बार ओबीसी महिला, 3 बार सामान्य वर्ग से अध्यक्ष

निकायों में आरक्षण व्यवस्था लागू होने के बाद1994 से अब तक पांच चुनाव हो चुके है। इनमें से यहां दो बार वर्ष 1999 से 2004 और 2009 से 2014 तक चेयरपर्सन पद ओबीसी महिला रहा। बाकी तीन बार जनरल ही रहा। अब 2019 में चौथी बार भी जनरल सीट है। सामान्य व ओबीसी महिला के अलावा अब तक किसी वर्ग को मौका नहीं मिला।

नगर निकाय प्रमुख में क्या बदला

निकाय अब पिछली बार

चित्तौड़गढ़ सामान्य सामान्य

निम्बाहेड़ा सामान्य ओबीसी

बड़ीसादड़ी सामान्य ओबीसी

बेगूं सामान्य ओबीसी महिला

कपासन ओबीसी महिला सामान्य

रावतभाटा सामान्य महिला सामान्य

चित्तौड़गढ़ के 25 वार्डों पर रहेगी नजर... वैसे तो सरकार द्वारा हाल में जारी नए नियम के अनुसार अब निकाय प्रमुख बनने के लिए किसी व्यक्ति का पार्षद चुनाव लडऩा भी जरूरी नहीं रहा। वो बाद में पार्षद चुनाव लड़कर बोर्ड में आ सकता है। फिर भी प्रमुख पद के अनुरूप उसी वर्ग के वार्डों पर लोगों की खास नजर रहेगी। चित्तौड़ में कुल 60 में से 25 वार्ड सामान्य पुरुषों के लिए खुले हुए हैं। इन वार्डों से निर्वाचित पार्षद सभापति चुनाव लड सकेंगे। ऐसे में इन वार्डों के मुख्य उम्मीदवारों पर सबकी निगाहें रहेगी।

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