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सिद्धचक्र महामंडल विधान, विश्वशांति महायज्ञ में श्रावकों ने 256 अर्घ्य समर्पित किए

एक वर्ष पहले
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धरियावद. विधान के तहत पूजा करते हुए तथा अर्घ्य चढ़ाते हुए।

धरियावद | श्री महावीर स्वामी दिगंबर जैन मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान आराधना तथा विश्व शांति महायज्ञ के छठे दिन शनिवार को आचार्य सुनीलसागर महाराज, मुनि शुभमसागर महाराज, मुनि सक्षमसागर महाराज के सानिध्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हुए। प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन के निर्देशन में प्रतिष्ठाचार्य विशाल जैन ने विधि-विधान से इन्द्र-इन्द्राणी, श्रावक-श्राविकाओं ने 8 कर्म की प्रकृतियों के कर्म दहन के अघ्र्य, 256 अघ्र्य समर्पित किए। इस दौरान लाभार्थी परिवार धनपाल वक्तावत, कुबेर इन्द्र चेतन कुमार, महायज्ञनायक इन्द्र संजय कुमार, इशान इन्द्र अनिल कुमार, सनत इन्द्र ललित कुमार वक्तावत के परिवार सहित श्रावकों ने जाप्य आराधना, अभिषेक, नित्यार्चन, विधान पूजन, भगवान जिनेन्द्र की आरती, शास्त्र सभा, धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम किए। धर्म सभा में मुनि शुभमसागर महाराज ने कहा कि आज तक प्राणी ने पर पदार्थ को जानने में समय दिया है, लेकिन अब समय है कि निज चैतन्य को जानने में अपना समय लगाए। विसरागता का सहारा तो राग को छोड़ो। संध्याकालीन शास्त्र सभा में प्रतिष्ठाचार्य विशाल जैन ने परमात्मा को प्राप्त करने के दो मार्ग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा को प्राप्त करने के लिए लिए भक्ति, योग मार्ग होता है। जिसको जो अपना लेता है तो उसे परमात्मा दर्शन देकर उसका जीवन सार्थक बनाता है। इसलिए सभी को परमात्मा के लिए कुछ समय निकालकर धर्म प्रभावना करनी चाहिए ताकि जीवन में धर्म की प्रभावना बनी रहे। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। इसमें किसमें कितना है दम... शीर्षक प्रतियोगिता में श्रावकों ने भाग लिया।
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