फसलों में सूत्रकृमि प्रबंधन पर प्रशिक्षण, नुकसान से बचाने की सीख दी

Pratapur News - प्रतापगढ़. प्रशिक्षण में मौजूद किसान और अधिकारी। प्रतापगढ़। जनजातीय उपयोजना के अन्तर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र...

Feb 15, 2020, 08:15 AM IST
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प्रतापगढ़. प्रशिक्षण में मौजूद किसान और अधिकारी।

प्रतापगढ़। जनजातीय उपयोजना के अन्तर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र पर फसलों में सूत्रकृमि प्रबंधन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कृषि उपज मण्डी के सभागार में सम्पन्न हुआ। यह प्रशिक्षण सूत्रकृमि विभाग, राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर द्वारा किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाॅ. मघेन्द्र शर्मा विभागाध्यक्ष सूत्रकृमि विभाग, राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर ने उपस्थित कृषकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि फसलों में विशेष प्रकार के कृमि जिनको सूत्रकृमि के नाम से जाना जाता हैं बहुत अधिक नुकसान पंहुचाते हैं। जिससे फसलों की पैदावार में बहुत अधिक नुकसान होता हैं। सूत्रकृमि रोग को फसलों का कैन्सर भी कहा जाता है। इसके नियन्त्रण के लिए कृषकों को ध्यान देने की आवश्यकता हैं। पाॅलीहाउस में एक या दो वर्ष के बाद से ही सूत्रकृमि द्वारा फसलों में बहुत अधिक हानि होती है। उसके लक्षण व उचित प्रबंधन के बारे में बताया। प्रशिक्षण में सूत्रकृमि विभाग के सहायक प्राध्यापक डाॅ. एचके शर्मा ने बताया कि सूत्रकृमि के कारण पौधों की जड़ों में गांठे बन जाती है और फसल की बढ़वार कम हो जाती है। फसल सूखने लगती है।

राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर के असीम श्रीवास्तव ने बताया कि सही समय पर, उचित प्रबंधन अपनाकर किसान अपनी फसलों को इस कृमि से बचा सकते हैं। वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता चन्द्रप्रकाश, डाॅ. योगेश कनोजिया ने तकनीक के अनुसार खेती करने की सलाह दी।

इस प्रशिक्षण में जिले के पीपलखूंट और धरियावद तहसील के 30 कृषकों ने भाग लिया और सभी कृषकों को प्रशिक्षण के अन्त में पौध संरक्षण के लिए नेपसेक स्प्रेयर भी वितरित किए। प्रशिक्षण के समापन के अवसर पर केन्द्र के कार्यक्रम सहायक डाॅ. रमेश कुमार डामोर ने आभार
व्यक्त किया।

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