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एक बच्चा जिसका रंग सफेद है, अपनी मां से बिछड़ गया है

नगर के हरिभाऊ उपाध्याय नगर विस्तार क्षेत्र के कुछ संवेदनशील लोग रविवार की रात ठीक से सो नहीं पाये। वजह सिर्फ इतनी...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 05:45 AM IST
नगर के हरिभाऊ उपाध्याय नगर विस्तार क्षेत्र के कुछ संवेदनशील लोग रविवार की रात ठीक से सो नहीं पाये। वजह सिर्फ इतनी थी कि अपनी मां से बिछड़ा गाय का एक बछड़ा देर रात तक इलाके के घरों में फाटक के भीतर मुंह डाल कर बार बार अपनी मां को पुकार रहा था। रात भर गली के कुत्ते इसे इधर से उधर दौड़ा रहे थे और अपने, अपनों से बिछड़ा यह मूक जीव इन अपरिचित सदमों से जूझ रहा था। एक पूरा दिन और फिर रात गुजर जाने के बाद भी इस बछड़े को ढूंढने कोई नहीं आया इस बात से साफ जाहिर था कि अपने लिये अनुत्पादक मान कर कोई गौपालक ही अपने से पीछा छुड़ाने के लिये इसे यूं छोड़ गया था।

बात बहुत जरा सी थी मगर गौर करें तो बहुत बड़ी। खास तौर पर उस व्यवस्था के लिये बहुत ही बड़ी, जिसका वजूद ही गौरक्षा और गौसेवा जैसी धर्म परायण नीतियों पर टिका हुआ हो। ऊपर लिखी कहानी एक बछड़े की हो सकती है मगर हर रोज न जाने कितने गो -वंशी लावारिस हालत में सड़कों पर भटकते कभी किसी वाहन की चपेट में आकर, तो कभी भूख, प्यास या बीमारी से दम तोड़ रहे हैं। इस लावारिस गो वंश में ज्यादातर या तो वे गायें हैं जो दूध देना बंद कर चुकी हैं या फिर वह नर गो वंश जो ट्रैक्टर के जमाने में खेती के लिये भी अनुपयोगी साबित हो चुका है।

विडंबना यह है कि सरकार और समाजसेवी संस्थाएं भी गो सेवा के नाम पर उन गोशालाओं तक ही सिमटे हैं जिनका काम दूध बेच कर पैसे कमाना है। ऐसा करके हम इंसानों की छद्म स्वार्थ सिद्धि को ही सेवा का नाम दे रहे हैं। जरूरत मंद और तिरस्कृत गो वंश के लिये नगर में न तो कोई शरणस्थली है और न सरकार के पास कोई योजना। इन पंक्तियों के लेखक की मौजूदगी में स्वयं जिला कलक्टर गौरव गोयल ने एक बार पुष्कर नगरपालिका के अध्यक्ष कमल पाठक को सुझाव दिया था कि वे पुष्कर क्षेत्र में ऐसी जमीन चिन्हित करें जहां गौ अभयारण्य बनाया जा सके। इस दिशा में यदि कोई प्रगति होती है तो संभवत: पूरे देश में अपनी तरह का यह एक अनूठा प्रयोग हो सकता है। गौ अभयारण्य ऐसे अभागे गो वंश के लिये न सिर्फ स्वर्ग साबित हो सकता है बल्कि पंचगव्य निर्माण के एक अच्छे खासे उद्योग का भी आधार बन सकता है।

भास्कर हस्तक्षेप

डॉ. रमेश अग्रवाल