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सचिन- जानता हूं... ‘राइट टू प्ले’ से इसका समाधान संभव है, हमें ‘ट्रेन द ट्रेनर्स’ से स्पोर्ट्स ट्रेनर्स भी तैयार करने होंगे

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 06:40 AM IST

देश के सामने ‘राइट टू प्ले’ (खेल का अधिकार) का विजन रखने वाले राज्यसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का...
देश के सामने ‘राइट टू प्ले’ (खेल का अधिकार) का विजन रखने वाले राज्यसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का कहना है कि स्मार्ट शहरों के साथ हमें स्मार्ट स्पोर्ट्स सिटीज़ भी बनानी होंगी। खेलों को स्कूली पाठ्यक्रम अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए। बच्चों को खेल की सारी सुविधाएं भी दी जानी चाहिए। लेकिन इसके पहले हमें प्राथमिक और मिडिल स्तर के स्कूलों में पीटीआई रखने होंगे। और ‘ट्रेन द ट्रेनर्स’ प्रोग्राम चलाना होगा। 21 दिसंबर 2017 को 2 जी मामले पर हंगामे के चलते स्पीच नहीं दे पाए थे। 22 दिसंबर को सोशल मीडिया पर 15 मिनट के वीडियो के जरिए उन्होंने विजन देश के सामने रखा। इसके बाद पहली बार ईमेल के जरिए सचिन ने दैनिक भास्कर से इस मुद्दे पर बात की है। जानिए खेलों को लेकर सचिन का विजन...

सचिन तेंदुलकर ने दैनिक भास्कर से साझा किया अपना विजन

‘राइट टू प्ले’ मुद्दे को आप राज्यसभा में उठाना चाहते थे। लेकिन हंगामे के चलते अपनी बात कह नहीं पाए। क्या समाधान हो सकता है खेलों की दशा सुधारने का?

सचिन- हमें खलों को पसंद करने वाले देश से खेल खेलने वाला देश बनना है। इसकी तैयारी करनी होगी। बहुत मेहनत भी लगेगी। मुझे पूरा विश्वास है हम इसे करेंगे। इसके लिए मुझे लगा ‘राइट टू प्ले’ समाधान हो सकता है। भारत 2020 तक दुनिया का सबसे युवा देश होगा। इस लिहाज से भारत को फिट और हेल्दी बनाने के लिए, हमें खेल संस्कृति को बढ़ावा देना होगा। 2009 में संसद ने शिक्षा को अनिवार्य बनाते हुए ‘राइट टू एजुकेशन बिल’ (आरटीई) पारित किया। हमें इसी कानून को विस्तार देते हुए, इसमें खेल का अधिकार जोड़ना होगा। स्मार्ट शहरों के साथ हमें स्मार्ट स्पोर्ट्स सिटीज़ बनानी होंगी। हमें बच्चों को खेल की तमाम सुविधाएं मिलें, ये सुनिश्चित करना होगा।

खेल की सही शुरूआत बचपन से होती है, लेकिन सरकारी प्रायमरी व मिडिल स्कूलों में स्पोर्ट्स टीचर नहीं हैं?

सचिन-हां मैं इस स्थिति से वाकिफ हूं। ‘राइट टू प्ले’ से इसका भी समाधान संभव है। इसके साथ ही हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि ‘ट्रेन द ट्रेनर्स’ के माध्यम से पूर्व खिलाड़ी ट्रेनर्स की नई पीढ़ी को तैयार कर सकते हैं। इससे देश में बड़ी संख्या में स्पोर्ट्स ट्रेनर्स तैयार होंगे। राइट टू प्ले पूर्व खिलाड़ियों के लिए भी रोजगार का अवसर पैदा करेगा। मैं चाहता हूं देश में राइट टू प्ले, मार्क्स फॉर स्पोर्ट्स, राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के लिए सीजीएचएस के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं, खेल के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं, खेल के लिए ज्यादा मैदान और खिलाड़ियों के लिए रोजगार के अच्छे मौके जैसे तमाम मुद्दों पर निर्णायक बात हो। मुझे विश्वास है इसमें हम कामयाब होंगे।

‘राइट टू प्ले’ को साकार होगा कैसे?

सचिन- एक स्पोर्टिंग देश बनने के लिए हमें तीन आई (I)- इनवेस्ट, इंश्योर और इम्मॉर्टलाइज पर काम करना होगा। हमें हर व्यक्ति को एक खेल खेलने की आदत डालनी होगी। प्रतिभा कम उम्र में पहचान कर, उन्हें तराशना होगा। खेल को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना होगा। बच्चों को खेल में उनकी उपलब्धि के अतिरिक्त मार्क्स और ग्रेड देने होंगे। कॉरपोरेट सोशल रिस्पाॅन्सिबिलिटी के तहत अनिवार्य रूप से एक प्रतिशत हिस्सा खेलों का इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में खर्च किया जाना चाहिए। स्कूलों में खिलाड़ियों का इतिहास पढ़ाया जाए, ताकि बच्चे खेलों के लिए प्रेरित हों।

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Web Title: सचिन- जानता हूं... ‘राइट टू प्ले’ से इसका समाधान संभव है, हमें ‘ट्रेन द ट्रेनर्स’ से स्पोर्ट्स ट्रेनर्स भी तैयार करने होंगे
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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