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सभी वर्गों को एक समान देखें : न्यायिक मजिस्ट्रेट

भास्कर संवाददाता | राजाखेड़ा विधिक सेवा समिति द्वारा चुंगी तिराहा पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 22, 2018, 02:50 AM IST

भास्कर संवाददाता | राजाखेड़ा

विधिक सेवा समिति द्वारा चुंगी तिराहा पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में एमजीएम रणवीर सिंह द्वारा विश्व सामाजिक न्याय दिवस पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इंसान एक सामाजिक प्राणी माना जाता है लेकिन इंसान की इस मुख्य विशेषता को तब चुनौती मिलती है जब अमीरी गरीबी के भेदभाव की वजह से एक अमीर इंसान मरते हुए गरीब की मदद करने से कतराता है। समाज में फैले इस भेदभाव का एक बहुत बड़ा नुकसान कुछ समय नजर आता है जब समाज में इससे हमारी न्याय व्यवस्था पर प्रभाव पड़ता है

समाज में हर तबका अलग-अलग लगता है कई बार समाज की संरचना इस प्रकार होती है कि आर्थिक स्तर पर भेदभाव हो ही जाता है। ऐसे में न्यायिक व्यवस्था पर भी इसका असर पड़े यह सही बात नहीं है। समाज में फैली असमानता और भेदभाव से सामाजिक न्याय के बारे में कार्य और उस पर विचार तो बहुत पहले से शुरू हो गया था लेकिन दुर्भाग्य से अभी भी विश्व में कई लोगों के लिए सामाजिक न्याय सपना बना हुआ है। सामाजिक न्याय का अर्थ निकालना बेहद मुश्किल कार्य है सामाजिक न्याय का मतलब समाज के सभी वर्गों को एक समान विकास के मौके उपलब्ध कराना है सामाजिक न्याय यह सुनिश्चित करता है कि समाज का कोई भी शख्स वर्ण या जाति की वजह से विकास की दौड़ में पीछे न रह जाए यह तभी संभव हो सकता है जब समाज से भेदभाव को हटाया जाए जो आने वाले कुछ वर्षों में शायद ही मुमकिन हो पाएगा। आज समाज में फैले भेदभाव का एक घृणित चेहरा इस तरह का है कि हमारी न्याय व्यवस्था के तहत बड़े से बड़ा घोटाले करने वाले नेता को भी चंद दिनों में ही रिहा कर दिया जाता है लेकिन एक छोटी सी चोरी के आरोप में एक गरीब बच्चा कई महीनों तक जेल में सड़ता है। न्याय और सजा का भय पुलिस वाले आम जनता को तो भली-भांति दिखाते हैं लेकिन संपन्न हत्यारों को कई बार पुलिस भी सुरक्षा देती है। हाल ही में दिल्ली में हुए गैंगरेप की गूंज पूरे भारत में सुनाई दी। वहीं दूसरी ओर यूपी के इलाके में एक बलात्कार से पीड़ित लड़की न्याय के लिए आई लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं नहीं रेंगी। सामाजिक न्याय के समय भारत की बात होती है तो हम पाते हैं कि हमारे संविधान की प्रस्तावना और अनेकों प्रावधानों के द्वारा सुनिश्चित करने की बात कही गई है। भारत में जाति प्रथा और इस पर होने वाली राजनीति सामाजिक न्याय को रोकने में एक अहम कारक सिद्ध होती है। इस अवसर पर न्यायालय के अधिवक्तागण मोहन मुरारी एवं भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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