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शिविर के प्रचार-प्रसार में न्यायिक मजिस्ट्रेट भी मैदान में

ताल्लुका विधिक सेवा समिति राजाखेड़ा द्वारा राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार बुधवार...

Bhaskar News Network| Last Modified - Feb 15, 2018, 06:45 AM IST

शिविर के प्रचार-प्रसार में न्यायिक मजिस्ट्रेट भी मैदान में
शिविर के प्रचार-प्रसार में न्यायिक मजिस्ट्रेट भी मैदान में
ताल्लुका विधिक सेवा समिति राजाखेड़ा द्वारा राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार बुधवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट राजाखेड़ा रणवीर सिंह द्वारा देवदास का पुरा ईट भट्टों पर शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय राजाखेड़ा में अठारह फरवरी को आयोजित होने वाले मेगा विधिक चेतना एवं लोक कल्याणकारी शिविर के बारे में बताते हुए कहा कि इसमें शिक्षा विभाग, राजस्व विभाग, पंचायत राज विभाग, श्रम विभाग, सामाजिक न्याय विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, रसद विभाग , कृषि विभाग द्वारा लोक कल्याणकारी कार्य एवं जनहित कार्य सेवा उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा शिविर में नालसा की योजनाएं, आदिवासियों के अधिकारों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए विधिक सेवा योजना 2015, बच्चों को मैत्रीपूर्ण विधिक सेवाएं और उनके संरक्षण के लिए विधिक सेवा योजना 2015 व नशा पीड़ितों को विधिक सेवा एवं नशा उन्मूलन के लिए विधिक सेवा योजना 2015 की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

आदिवासियों के अधिकारों के संरक्षण और प्रवर्तन के लिए विधिक सेवा योजना 2015 की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जनजातियों की कुल जनसंख्या के अनुसार अनुसूचित जातियों के रूप में अधिसूचित की संख्या उत्तर पूर्वी राज्य अपनी स्वयं की विभिन्न विधाओं के कारण नहीं है । वहां लगभग 200 की संख्या में भाषा एवं बोलियां हैं और भारतीय समूहों में वर्गीकृत किए जा सकते हैं । जनजाति समूह भाषा के कारण विशेष रूप से संवेदनशील की श्रेणी में रखी गई है।

वर्तमान में जनजातीय समूह में शामिल बच्चों को मैत्रीपूर्ण सेवाएं और उनके संरक्षण के लिए विधिक सेवा योजना विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि ये विश्व जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा यदि नहीं किए जाते उन्हें भविष्य का जिम्मेदार नागरिक बनने का वर्तमान पीढ़ी के हाथ से निकल जाएगा। युवा पीढ़ी के प्रति हमारा दायित्व पूरा किए जाएं ताकि उनके व्यक्तित्व का विकास हो, शारीरिक, मानसिक, नैतिक व आध्यात्मिक विकास हो। हमारे संविधान के निर्माण के प्रति अच्छी तरह जागरूकता से राष्ट्र का विकास राष्ट्र के बच्चों के विकास से ही संभव है तथा बच्चों को शोषण से बचाना आवश्यक है भारतीय संविधान बच्चों को देश के नागरिक की तरह अधिकार प्रदान करता है तथा उनके विशेष स्तर पर बनाए रखते हुए कानून बनाए हैं जो 1950 में लागू हुआ और उस में बालकों के अधिकारों का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन सहित मौलिक अधिकार और राज्य के नीति निर्देशक शामिल किया गया। नशा पीड़ितों को विधिक सेवा एवं नशा उन्मूलन के लिए विधिक सेवा योजना 2015 की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि नवयुवकों, किशोरों एवं बालको में ड्रग तस्करी एवम दुरुपयोग की असाधारण बढ़ोतरी गंभीर और जटिल निहितार्थ सूचित करती है जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित करती है ।

राजाखेड़ा. कार्यक्रम की जानकारी प्रदान करते न्यायिक मजिस्ट्रेट।

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