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37 पुलिसकर्मी संभाल रहे डेढ़ लाख की आबादी की सुरक्षा

जिले का संवेदनशील क्षेत्र राजाखेड़ा लंबे समय से पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। जिससे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 06, 2018, 07:05 AM IST

जिले का संवेदनशील क्षेत्र राजाखेड़ा लंबे समय से पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। जिससे संपूर्ण क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर संकट मंडरा रहा है। इसके बाद भी इस संवेदनशील थाने की व्यवस्था के प्रति सोचने की जहमत तक नहीं उठाई गई है। गंभीर है हालात राजाखेड़ा थाने के लिए एक निरीक्षक, दो उप निरीक्षक, 3 सहायक उप निरीक्षक ,चार मुख्य आरक्षक सहित 40 आरक्षकों के साथ दो चालक के पद सृजित हैं। लेकिन इन में से एक प्रभारी निरीक्षक एक उपनिरीक्षक, 2 सहायक उप निरीक्षक एवं 22 आरक्षकों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। ऐसे में अनुसंधान कार्य, बड़ी छापेमारी,ओवरलोडिंग, सीमाओं पर स्थाई नाकाबंदी जैसे महत्वपूर्ण कार्य लगातार बाधित हो रहे हैं। चौकी हाट मैदान में भी एक प्रभारी उपनिरीक्षक सहित 4 आरक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त पदे पड़े हुए हैं। राजाखेड़ा थाने में एक भी महिला आरक्षक नहीं है। महिला डेस्क योजना भी अब यहां संचालित करना मुश्किल नजर आ रहा है। सर्वाधिक चिंताजनक तथ्य यह है की छापेमारी के दौरान क्षेत्र में महिलाओं को आगे कर बचाव करने की प्रवृत्ति के दौरान पुलिस को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ेगा।

राजाखेड़ा. कस्बे में स्थित थाना।

अवैध रेत उत्खनन भी बड़ी समस्या

राजाखेड़ा का चंबल तटवर्ती क्षेत्र दशकों से अवैध रेत उत्खनन का केंद्र रहा है। पुलिस कर्मियों की कमी से यह माफिया भी मौके का फायदा उठाने से नहीं चूकता। पिछले एक माह में ही पकड़े गए डेढ़ दर्जन ट्रैक्टर ट्रॉली इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

तीनों ओऱ उत्तर प्रदेश की सीमाएं

राजाखेड़ा क्षेत्र तीन और से उत्तर प्रदेश की सीमा से घिरा हुआ है। जहां आधा दर्जन से अधिक मार्गों से मात्र 5 बजेे से 7:00 मिनट में राजस्थान सीमा में अपराध कर उत्तर प्रदेश में सुरक्षित निकला जा सकता है। पिछले एक माह में ही लूट की बड़ी घटनाएं इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। वहीं आपराधिक आंकड़ों में बाइक चोरी ,छीना झपटी, जैसे मामलों में आरोपी इन्हीं रास्तों का फायदा उठाते हैं। आरएसी भी हटाई 3 वर्ष पूर्व तक राजाखेड़ा में आरएसी की कंपनी तैनात रहती थी। जिसको उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख रास्तों पर आगरा मार्ग व सिलावट मोड पर स्थाई चौकी बनाकर तैनात किया जाता था। जिस से 24 घंटे नाकाबंदी बनी रहती थी एवं उत्तर प्रदेश के अपराधियों के आवागमन पर भी अंकुश करता था। साथ ही रात्रि गश्त में भी इन्हीं जवानों को साथ रखने से कानून व्यवस्था पर अंकुश लगा रहता था।

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