उदयपुर

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पद्मावती की सुंदरता की तांत्रिक ने की थी तारीफ, तब खिलजी ने किया था हमला

दावा : रणथंभोर में बादल महल योद्धा बादल, रानी पद्मिनी के प्रतीक के रूप में है पद्म तालाब।

Danik Bhaskar

Nov 17, 2017, 04:56 AM IST
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उदयपुर. फिल्म पद्मावती के विवाद के साथ-साथ अब इतिहासकारों में इस बात को लेकर भी मतभेद हो गए हैं कि मेवाड़ के महारावल रतनसिंह की पत्नी महारानी पद्मिनी आखिर कहां की थीं।। कुछ इतिहासकार पद्मिनी को रणथंभौर की नहीं, बल्कि पूर्व जैसलमेर राज्य के अंतर्गत आने वाले पुगल प्रदेश की बता रहे हैं। साथ ही चित्तौड़ पर आक्रमण के पीछे की वजहों पर भी इतिहासकारों ने दावे किए हैं। तांत्रिक ने कराया था रतनसिंह-अलाउद्दीन के बीच युद्ध...


- इतिहास के जानकार डॉ. देव कोठारी का कहना है कि राजा रतनसिंह और पद्मिनी की शादी 22-23 साल की उम्र में हुई थी। एक दिन तांत्रिक राघव चेतन बिना बताए रावल के भीतरी महल में पहुंच गया। इससे गुस्साए रावल ने चेतन को भगा दिया।

- इसका बदला लेने राघव चेतन जाकर अलाउद्दीन खिलजी से मिला और पद्मिनी की सुंदरता की तारीफ की, जिससे बाद में रावल रतनसिंह-अलाउद्दीन खिलजी के बीच युद्ध हुआ।

- इसके बाद ही पद्मिनी ने अपनी ससुराल और मायके के स्वाभिमान की रक्षा के लिए एक वीरांगना क्षत्राणी की तरह दूसरी रानियों के साथ जौहर कर लिया। यही कारण रहा कि पद्मिनी की इस कहानी को कवियों और इतिहासकारों ने कलमबद्ध कर अमर कर दिया।

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पुगल प्रदेश की रहने वाली थी रानी पद्मिनी

 

 

-  इतिहासकार और राइटर डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने दावा किया है कि पद्मिनी पूर्व जैसलमेर राज्य के तहत आने वाले पुगल प्रदेश की थीं।

-  उन्होंने दावा किया है कि पूर्व जैसलमेर राज्य के अंतर्गत आने वाली सिंध प्रदेश से जुड़ी पुगल नामक जागीर पद्मिनी के पिता पुंजराज को मिली थी, जहां से पुंजराज मालवा के सिंगोली में रहने के लिए चले गए थे।

-  चित्तौडग़ढ़ के रावल रतनसिंह की शादी पद्मिनी के साथ मालवा के इसी सिंगोली में हुआ था। इसके सबूत लेखक जैसल की किताब ‘जैसलमेर के राज्य का इतिहास’ में मिलते हैं।

-  जैसल जैसलमेर राज्य के दरबारी इतिहासकार थे। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया हैं कि पद्मिनी काल्पनिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक पात्र है।

 

 

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रानी के प्रतीक के तौर पर है पद्म तालाब

 

वहीं साहित्यकार और इतिहास के जानकार डॉ. देव कोठारी दावे के साथ बताते हैं कि रानी पद्मिनी मूलतः रणथंभौर की थीं। पद्मिनी के साथ ऐतिहासिक पात्र वीर योद्धा गोरा, बादल और तांत्रिक राघव चेतन चित्तौडग़ढ़ आए थे।

रणथंभौर में योद्धा बादल के नाम पर बादल महल और रानी पद्मिनी के प्रतीक के तौर पर पद्म तालाब स्थित है। 

 


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चित्तौडगढ़ पर आक्रमण राजनैतिक था, पद्मिनी को लेकर नहीं 

 


- डॉ. चंद्रशेखर शर्मा के मुताबिक, जैसलमेर का पूरा इलाका भाटी शासित रहा है, जहां की राजकुमारियों की शादी पद्मिनी के बाद भी मेवाड़ राजघराने में होते रहे हैं। जो यहां भट्टियानी रानी के नाम से जानी जाती थीं।

- पूरे राजपूताना में भाटी इलाके की राजकुमारियां सुंदर हुआ करती थीं। इतिहास के सभी साेर्स यह जिक्र नहीं करते हैं कि खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण पद्मिनी को लेकर किया था। क्योंकि, खिलजी के आक्रमण में इतिहासकार और सूफी कवि अमीर खुसरो खुद भी मौजूद था, जिन्होंने अपनी किताब 'खजाइन-उल-फुतूह' में चित्तौड़ आक्रमण के पीछे के कारण को राजनैतिक माना है। 

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