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श्रीगोविंदलालजी महाराजश्री का प्राकट्योत्सव मनाया

3 वर्ष पहले
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नाथद्वारा | मार्ग कृष्ण सप्तमी गुरूवार को श्रीजी प्रभु की हवेली में नित्यलीलास्थ गोस्वामी तिलकायत श्रीगोविंदलालजी महाराजश्री का प्राकट्योत्सव परंपरानुसार मनाया गया। उत्सव पर श्रीजी प्रभु संग बालस्वरूपों को आलौकिक शृंगार धराकर राग भोग सेवा के लाड लड़ाए गए। उत्सव होने के कारण हवेली के सभी मुख्य द्वारों की देहलीज हल्दी से लीपी गई तथा आशापाल की सूत की डोरी की वांदनमाल बांधी गई। मंगला, राजभोग, आरती तथा शयन झांकी में आरती थाली में उतारी गई। मुखिया बावा ने शृंगार झांकी श्रीजी प्रभु के श्रीचरणों मौजाजी धराए गए। श्रीअंग पर पतंगी साटन का रूपहली जरी की तुईलेस की किनारी का सूथन, चौली, घेरदार वागा तथा पीला मलमल का कटी पटका अंगीकार कराया गया। श्रीमस्तक पर पीले मलमल की छोरवाली गोल पागए हीरा का शीषफूल सुशोभित किया गया। प्रभु को हीरा के आभरण धराए गए। श्रीकंठ में हीरा की बद्यी व एक पाटन वाला हार धराया गया। श्रीकर्ण में कर्णफूल धराए। पील पुष्पों की रंग बिरंगी थगवाली मालाजी धराई गई। श्रीहस्त में स्वर्ण के वेणुजी धराए गए।

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