• Hindi News
  • Rajasthan
  • Rajsamand
  • 18 साल बाद श्रावण की शुरुआत में गुरु पूर्णिमा और चंद्रग्रहण एक साथ
विज्ञापन

18 साल बाद श्रावण की शुरुआत में गुरु पूर्णिमा और चंद्रग्रहण एक साथ

Dainik Bhaskar

Jul 10, 2018, 06:05 AM IST

Rajsamand News - 18 साल बाद श्रावण की शुरुआत गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण के संयोग में हो रही है। शुक्रवार के दिन श्रावण शुरू होने से...

18 साल बाद श्रावण की शुरुआत में गुरु पूर्णिमा और चंद्रग्रहण एक साथ
  • comment
18 साल बाद श्रावण की शुरुआत गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण के संयोग में हो रही है। शुक्रवार के दिन श्रावण शुरू होने से ज्योतिषियों का मानना है, यह महीना मांगलिक कार्यों में सफलता देगा और सौम्यता और शुभता बनी रहेगी। इसके पहले यह संयोग 2000 में 16 जुलाई को बना था। पंचांग गणना के अनुसार आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि शुक्रवार 27 जुलाई को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, विष कुंभ योग तथा मकर राशि में चंद्रमा के संयोग में आएगी। इस दिन श्रावण की शुरुआत और गुरु पूर्णिमा है। इसमें विशेष यह कि इस दिन खग्रास चंद्र ग्रहण है। गणितीय विश्लेषण करें तो तीनों का संयोग 18 साल बाद आ रहा है। धर्मशास्त्रों की मान्यता है कि पूर्णिमा तिथि पूर्णकालिक मानी जाती है। साथ ही चंद्र संचार की गति से देखें तो 25 घंटा 50 मिनट इस तिथि का प्रभाव रहेगा। इस दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र होने से इसका महत्व बढ़ जाता है। मुहूर्त गणना से देखे तो उत्तराषाढ़ा नक्षत्र को शुभ नक्षत्र माना जाता है क्योंकि इसमें पूर्व के बचे काम नक्षत्र के संचार से पूर्ण माने जाते हैं। अवधि 24.32 घंटा रहेगी। पं. अमर डिब्बावाला के अनुसार यह नक्षत्र मकर राशि में चंद्रमा के प्रभाव से संबंधित है और उत्तराषाढ़ा का क्रम पूर्ण लाभकारी माना है। इस नक्षत्र में की गई वैदिक साधना विशेष फल देने वाली मानी जाती है।

साल 2000 में भी 16 जुलाई को बना था ऐसा ही संयोग, ग्रहण की वजह से राजनीतिक उठापटक संभव

श्रावण के साथ चातुर्मास शुरू होगा

शुक्रवार को श्रावण का आरंभ शुभ और सौम्यता लाएगा। मांगलिक कार्यों में सफलता मिलेगी। श्रावण के साथ ही चातुर्मास शुरू हो जाएगा। इस दौरान संकल्पित उद्देश्यों की पूर्ति की जा सकती है। हालांकि ज्योतिषियों का मानना है कि ग्रहण के कारण राजनीतिक उठा-पटक होगी। नीतिगत दृष्टिकोण में बदलाव आएगा। राजनीतिक दलों को संघर्ष करना पड़ेगा।

विश्व के सभी भागों में चंद्रग्रहण

ज्योतिषी मानते हैं 27 जुलाई को खग्रास चंद्रग्रहण का प्रभाव पूरे विश्व में रहेगा। भारत में भी सभी जगह इसे देखा जा सकेगा। 5.55 घंटे के ग्रहण के प्रभाव से कोई अछूता नहीं रहेगा क्योंकि यह चंद्रग्रहण चंद्र का केतु से साथ मकर राशि में युति कृत होना, साथ ही समसप्तक दृष्टि से अपनी ही राशि कर्क में राहु का भ्रमण हो रहा है।

X
18 साल बाद श्रावण की शुरुआत में गुरु पूर्णिमा और चंद्रग्रहण एक साथ
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन
विज्ञापन
एप में पढ़ें