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जिन झोलाछापों पर हुई कार्रवाई, उन्हीं को प्राथमिक उपचार के लिए सीएमएचअो ने कर दिया अधिकृत

एक वर्ष पहले
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इन बंगाली डाॅक्टरों को कर दिया गया प्राथमिक उपचार के लिए अधिकृत


राजसमंद चिकित्सा विभाग ने 26 झोलाछाप डाॅक्टरों को ही मरीजों का प्राथमिक उपचार करने के लिए अधिकृत कर दिया। ये झोलाछाप डाॅक्टर प्राथमिक उपचार की अाड़ में मरीजों को दवाइयां, इंजेक्शन अौर एमटीपी कर रहे हैं। जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। एक तरफ तो राज्य सरकार झोलाछाप डाॅक्टरों पर लगाम लगा रही हैं वहीं दूसरी तरफ जिले में झोलाछाप डाॅक्टरों को अधिकृत किया जा रहा है। इनमें वे बंगाली डाॅक्टर भी शामिल हैं जो पिछले दिनों पुलिस की कार्रवाई में गिरफ्तार हो चुके हैं। लेकिन ये जमानत पर जेल से बाहर अाकर फिर से मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। दरअसल राजसमंद के अारके अस्पताल सहित गांव के सीएचसी अौर पीएचसी अौर उपस्वास्थ्य केंद्रों पर डाॅक्टरों अौर नर्सिंग स्टाफ के पद खाली पड़े हैं। अकेले अारके अस्पताल में विशेषज्ञ डाॅक्टरों सहित स्वीकृत पदों के मुकाबले अाधे पद खाली हैं। इसी वजह से मजबूरी में लोग झोलाछाप के पास जाते है।

जिले में 250 झोलाछाप हैं। पिछले दिनों विधानसभा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने झोलाछाप के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई करने की बात कही थी। शून्यकाल में जब भाजपा विधायक मदन दिलावर ने यह मामला उठाया था तब दिलावर ने कहा कि अस्पताल में डाॅक्टर नहीं हैं। इस वजह से मजबूरी में लोग झोलाछाप के पास जाते हैं। तब सीएम ने कहा था कि झोलाछाप डाॅक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई होगी। दूसरी तरफ जिले के सीएमएचअो डाॅ. जेपी बुनकर ने 26 झोलाछाप डाॅक्टरों को प्राथमिक उपचार के लिए अधिकृत कर दिया। ये प्राथमिक उपचार की अाड़ में दवाइयां, इंजेक्शन अौर एमटीपी कर रहे है।

दोषियों पर कार्रवाई करेंगे

हां, जयपुर से चिकित्सा अौर स्वास्थ्य विभाग के अादेश पर विशेष डिग्री वालों को प्राथमिक उपचार के लिए स्वीकृत किया हैं। ये प्राथमिक उपचार के अलावा भी मरीजों को दवाई देकर इलाज कर रहे है तो जांच करवाएंगे।
डाॅ. जेपी बुनकर, सीएमएचअो, राजसमंद

डाॅक्टरों अौर नर्सिंग स्टाफ की कमी बनी मुसीबत : अारके अस्पताल में स्वीकृत 54 पदों में से 25 पदों पर ही डाॅक्टर कार्यरत हैं। इसमें 24 घंटे जहां डाॅक्टरों की सुविधा होनी चाहिए। वहां 29 मेडिकल अाॅफिसर के स्थान पर महज सात मेडिकल अाॅफिसर ही कार्यरत हैं। इसी प्रकार जिलेभर के ग्रामीण क्षेत्रों में डाॅक्टर तो दूर की बात है नर्सिंग स्टाफ तक नहीं है। एेसे में लोगों को मजबूरी में झोलाछाप के पास जाना पड़ रहा है। इसके साथ ही जिलेभर के सीएचसी और पीएचसी में भी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी होने से लोगों को झोलाछाप डॉक्टरों से दवाई करवानी पड़ रही है। इससे कई बार मरीज खतरे में भी पड़ जाते हैं।

राजसमंद पुलिस ने पिछले दनों राज्यावास के समीर सरकार, गोमती चौराहा से हरदन बाला, बडारड़ा पर सपन सरकार सहित अन्य बंगाली डाॅक्टरों को गिरफ्तार किया था। लेकिन जमानत पर छूटते ही ये अपने निजी क्लीनिक पर मरीजों का उपचार कर रहे हैं।


इनको किया था गिरफ्तार, जमानत पर छूटते ही कर रहे उपचार


राजसमंद सीएमएचअो डाॅ. जेपी बुनकर के अादेश से सापोल के दीपंकर विश्वास, केलवाड़ा के मीरीनाल कांति विश्वास, चारभुजा में सेवंत्री बापी बिश्वास, थूरावड़ में रामकृष्ण बिश्वास, पीपरड़ा से मनीकांत सरकार, सरदारगढ़ से सुबल बिश्वास, पुठोल से प्रदूत मंडल, नाराणा से उत्तम कुमार, अामेट के मेरड़ा से गौतम कुमार बिश्वास, गोमती चौराहे से हरधन बाला, नाथद्वारा गुंजोल से दीपक राॅय, राजनगर से मोनीमोहन मंडल, जूणदा से दिबाकर हल्दर, केलवा से उत्पल बिश्वास, राज्यावास से साहेब सरकार, समीर सरकार वणाई से सुरजन सरकार, अात्मा परितोष बिश्वास, बामणहेड़ा से पंकज बिश्वास, मादडी देवस्थान से शंकर बिश्वास, चारभुजा के अमली का भागल से कुशीनाथ राॅय, रीछेड़ प्रदुत्त कुमार बिश्वास, बिजनोल निवासी बिसेन कुमार मंडल, एमडी से शुबांकर तहवीलवार अौर रेलमगरा के सिंदेसरकला निवासी सोमेन बिश्वास को प्राथमिक उपचार के लिए अधिकृत किया है।


राजसमंद. राज्यावास में जमानत पर छूटने के बाद बंगाली डाॅक्टर ने क्लिनिक पर उपचार शुरू किया।
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