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छोटे शहरों के विकास की भी चिंता करें सरकार : किरण माहेश्वरी

एक वर्ष पहले
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विधायक किरण माहेश्वरी ने नगर सुधार संशोधन विधेयक पर चर्चा में कहा कि एक लाख से कम जनसंख्या वाले छोटे शहरों के नियोजित विकास के बारे में सरकार की कोई दृष्टि नहीं है। छोटे शहरों में भी नियोजित विकास भविष्य की कई समस्याओं से हमें बचाएगा। किरण ने कहा कि सरकार कोई भी विधेयक लाने के पहले व्यापक चर्चा करें। क्षेत्रीय विकास योजना के लिए पहले ही प्रावधान है, फिर यह विधेयक क्यों लाया गया। यह राजस्थान उच्च न्यायालय में मास्टर प्लान महायोजना के प्रकरण में दिए निर्देशों की काट करने से बचने की गली निकालने का प्रयास है। किरण ने कहा कि ऐसी कोई गंभीर या आपात स्थिति नहीं है, इसके लिए यह संशोधन विधेयक लाना पड़ा।

न्याय देना व्यवसाय नहीं, सरकार का दायित्व

विधायक ने राजस्थान न्यायालय शुल्क तथा वाद मूल्यांकन संशोधन विधेयक पर चर्चा में कहा कि राज्य में न्यायालय शुल्क बहुत अधिक हैं। इससे मध्यम एवं निम्न वर्ग के व्यक्ति न्यायालय में जाने से वंचित रह जाते हैं। किरण ने कहा कि अधिनियम की अनुसूची में जहां मूल्यानुसार दरें दी है, वहां अधिकतम सीमा 5000 रु. की जाए। न्यायालय शुल्क सरकार की राजस्व आय का माध्यम नहीं हो सकता।

मानहानि प्रकरणों में देय शुल्क की अधिकतम सीमा 25000 रुपए करना एक छोटा कदम है। इसे भी घटाकर 10000 की जाए। किरण ने कहा कि वर्ष 1958 में विधि आयोग ने अपने प्रतिवेदन मे सरकारों से न्यायालय में वाद प्रस्तुति पर शुल्क लेने को पूर्णतया अनुचित बताया था। नागरिक अधिकारों की वैश्विक घोषणा में भी विधि के समक्ष समानता एवं विधि की सुरक्षा प्राप्त करने को नागरिकों का मूल अधिकार बताया गया है। किरण ने सरकार से न्यायालय में वाद प्रस्तुति पर लगने वाले शुल्कों की समग्र समीक्षा करने और शुल्क की अधिकतम सीमा 5000 रु. करने की
मांग की।

गृह रक्षकों को नहीं मिल रहे नियोजन के समान अवसर

विधायक किरण माहेश्वरी ने होम गार्डस (गृहरक्षा स्वयंसेवक) को नियोजन एवं सेवा के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने एवं नियोजन में भेदभाव का विषय अतारांकित प्रश्न से उठाया। उदयपुर संभाग में गृह रक्षकों के 3595 पुरुष एवं 205 महिला पद स्वीकृत हैं। लेकिन वर्तमान में 3141 पुरुष एवं 205 महिलाएं ही सेवारत हैं। गृह रक्षकों को कार्य सेवा अवसर कार्य की उपलब्धता पर मिलता है। पिछले वर्ष में 3346 गृह रक्षकों में से 1391 वास्तव में कार्य कर रहे थे। 1322 व्यक्तियों को वर्षभर में 120 दिनों से अधिक कार्य अवसर दिया गया। जबकि 2000 से अधिक गृह रक्षकों को 50 दिनों से कम दिया। किरण माहेश्वरी ने कहा कि विधि व्यवस्था एवं महत्वपूर्ण स्थलों की सुरक्षा में गृह रक्षकों की बड़ी भूमिका रही है। सभी गृह रक्षकों को समान अधिकार पर कार्य देने, भेदभाव एवं कार्य आवंटन में भ्रष्टाचार दूर करने के लिए राज्य सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए। किरण माहेश्वरी ने गृह रक्षकों को कार्य मिले या नहीं मिले, राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम 10000 रुपए प्रतिमाह का मानदेय देने की भी मांग की।

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