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श्रीजी प्रभु की हवेली में गुलाल कुंड मनोरथ, छज्जावाली पाग में सजे श्रीजी, गुलाल-अबीर के संग रसिया की धूम
फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी रविवार को श्रीजी प्रभु की हवेली में फागोत्सव के भाव से बाल स्वरूपों को गुलाल कुंड का मनोरथ धरा कर राग, भोग, सेवा के लाड़ लड़ाए गए। कीर्तनकारों ने विभिन्न राग के पदों का गान कर श्रीजी प्रभु को रिझाया। ग्वाल-बालों ने फाग की मस्ती में विविध रसियाओं का गान कर श्रीजी हवेली परिसर में ब्रज सा माहौल कर दिया। शृंगार की झांकी में श्रीजी प्रभु को श्रीचरणों में नूपुर धराए गए। श्रीअंग पर धवल सुथन के संग घेरदार वागा, चोली अंगीकार कराई गई। श्रीमस्तक पर छज्जा वाली पाग, पाग पर केरी भात का कतरा, शीशफूल सुशोभित किया गया। श्रीकर्ण में कर्णफूल, मेघश्याम ठाढ़े वस्त्र तथा लाल, हरे मीना के धराए गए। कंदराखंड में धवल पिछवाई सुशोभित कर गुलाल अबीर से चिड़िया उकेरित की गई। राजभोग झांकी में फूल, फाग, सेवा के लाड़ लड़ाकर आरती उतारी। फाग के भाव से प्रभु के सम्मुख गुलाल कुंड बनाया गया। इसमें गुलाल, अबीर, चंदन इत्यादि सामग्री पधराई गई। कीर्तनकारों ने विविध राग में फाग के पदों का गानकर श्रीठाकुरजी को रिझाया।
निज बगीचे में पधारे युगल स्वरूप, पुष्प का मुकुट, छड़ी, गेंद और छोगा-छड़ी धराई
द्वितीय गृह पीठ विट्ठलनाथजी मंदिर में रविवार को ठाकुरजी निज बगीचे में पधारे। प्राचीन तिबारी में प्रभु को विराजित किया गया। प्रभु को पुष्प का मुकुट, पुष्प की छड़ी, पुष्प की गेंद, पुष्प के छोगा-छड़ी धराई गई। पांच रंग केसरिया, पीला, हरा, गुलाबी, नीला ललिता, विशाखा और अष्ठ सखी के भाव से अंगीकार कराए गए। द्वितीय पीठाधीश्वर कल्याणराज महाराज ने सपरिवार प्रभु को लाड़ लड़ा कर आरती उतारी। फेट भर गुलाल, अबीर, केसरिया, पीला और नीला रंग उड़ाया गया। कान्हा धरयो रे मुकुट, खेले होरी..., ब्रज की तोहे लाज मुकुट वारे... का रसिया गान हुआ। रसिया गान ब्रजवासी रसिया मंडल ने किया। पुनः निज मंदिर में ठाकुरजी को पधरा कर वहां भी होली का खेल हुआ। इसमें होली के ख्याल नृत्य, स्वांग नृत्य, सखी नृत्य किए गए। राग जैतश्री में शोभा सकल शिरोमणि, झुलत डोल... का कीर्तन किया गया।
उड़ के भमर मेरी छतिया पे बैठ्यो, कैसे बोझ संभालूंगी...
नाथद्वारा | फाल्गुन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी रविवार को श्रीजी प्रभु को अनूठा शृंगार धराकर राग, भोग, सेवा के लाड़ लड़ाए गए। गुलाल, अबीर की महक, ढप, चंग, झांझ की थाप पर रसिया पदों का गान हुआ। उड़ जा रे भमर, तो कूं मारुंगी, उड़ के भमर मेरी छतिया पे बैठ्यो, कैसे बोझ संभालूंगी..., एक भमर से प्रीत हमारी, दूजो न नैन नेक निहारुंगी, पुरुषोत्तम प्रभु भमर हमारे, वा पे तन मन धन सब वारुंगी...। होरी ना है, मेरे यार हुरंगा, गोवर्धन के बीच तलहटी भरी है, मानसी गंगा....। बरस दिनां में फागुन आवे, बाजे ढोल ढफंगा...। यू ही जाएगो जोबन अलबेली को, गौरी तो बनी है मथुराजी का पेड़ा, रसिया ऐ टूक जलेबी कौ... ले चल यार बगीचे में...। राजभोग की झांकी में ग्वाल-बालों ने चल रहे होलाष्टक में गार, धमार के साथ रसिया पदों का गान किया। ग्वाल-बालों ने कई रसिया पदों का गान कर श्रद्धालु, वैष्णवों को खूब झुमाया। शहर के गुर्जरपुरा स्थित लालाजी महाराज मंदिर में पाटोत्सव मनाया गया। पाटोत्सव पर मंदिर के ललित वैरागी ने लालाजी महाराज को अनूठा शृंगार धराकर लाड़ लड़ाए। आसपास के माेहल्ले वासियों ने दर्शनों का लाभ लिया। देर शाम रसिया का गान किया गया।
द्वितीय गृह पीठ विट्ठलनाथजी मंदिर में रविवार को ठाकुरजी निज बगीचे में पधारे। प्राचीन तिबारी में प्रभु को विराजित किया गया। प्रभु को पुष्प का मुकुट, पुष्प की छड़ी, पुष्प की गेंद, पुष्प के छोगा-छड़ी धराई गई। पांच रंग केसरिया, पीला, हरा, गुलाबी, नीला ललिता, विशाखा और अष्ठ सखी के भाव से अंगीकार कराए गए। द्वितीय पीठाधीश्वर कल्याणराज महाराज ने सपरिवार प्रभु को लाड़ लड़ा कर आरती उतारी। फेट भर गुलाल, अबीर, केसरिया, पीला और नीला रंग उड़ाया गया। कान्हा धरयो रे मुकुट, खेले होरी..., ब्रज की तोहे लाज मुकुट वारे... का रसिया गान हुआ। रसिया गान ब्रजवासी रसिया मंडल ने किया। पुनः निज मंदिर में ठाकुरजी को पधरा कर वहां भी होली का खेल हुआ। इसमें होली के ख्याल नृत्य, स्वांग नृत्य, सखी नृत्य किए गए। राग जैतश्री में शोभा सकल शिरोमणि, झुलत डोल... का कीर्तन किया गया।
श्रीनाथजी मंदिर की होली में डाली मथारिया : शहर के होली मगरा क्षेत्र में मंदिर की होली का दहन शाम 6 बजकर 40 मिनट पर किया जाएगा। रविवार को श्रमिक श्रीजी प्रभु की होली को अंतिम रूप देने में लगे रहे। बता दें कि श्रीजी प्रभु की होली को कांटों की करीब 1 हजार मथारियों से तैयार करते हैं। नाथूवास सहित आस-पास के क्षेत्रों से महिलाएं सिर पर कांटों की मथारियां लाती हैं। इस साल मजदूर एक मथारी की कीमत 75 रुपए के करीब ले रहे हैं। शहर के लगभग हर घर से श्रीजी प्रभु की होली दिखाई देती है।
आज रंगी जाएगी युगलस्वरूप की दाढ़ी : युगल स्वरूप विट्ठलनाथजी मंदिर में सोमवार को प्रभु को होली खेलाने के बाद गुलाल से दाढ़ी रंगने की परंपरा निभाई जाएगी। इसके बाद मुखियाजी, महाराज, गोस्वामी बालकों तथा सेवादारों से गुलाल के साथ होली का उत्सव मनाएंगे।
राजसमंद | द्वारिकाधीश मंदिर में रविवार को इस साल की अंतिम राल उड़ाई गई। तृतीय पीठाधीश्वर गोस्वामी बृजेश कुमार महाराज के सानिध्य में शयन के दर्शनों में प्रभु के सम्मुख राल उड़ाई। इससे पहले भोग आरती दर्शन के बाद द्वारकाधीश मंदिर के कमल चौक में बृजवासी ग्वाल बालों ने रसिया गान किया।
राजसमंद. प्रभु द्वारकाधीश मंदिर में होली दहन की पूर्व संध्या पर अंतिम राल के दर्शन हुए के बाद गुलाल उड़ाते हुए। इस दौरान मौजूद श्रद्धालु।