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प्रणय को लहू-लुहान देख दूसरे बच्चों के साथ चीखती-पुकारती रह गई जुड़वां बहन प्राची, पता चलते ही बस छोड़ भागा चालक

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 05:11 AM IST

Rajsamand News - अंकुर स्कूल का ड्राइवर राजेश उर्फ राजू पानेरी सुखाड़िया नगर से ही मोबाइल पर बात करते हुए बस चला रहा था। करीब तीन सौ...

Nathdwara News - rajasthan news pranayi looked at blood and laughing with other children cried cried twin sister prachi only after leaving the bus driver
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अंकुर स्कूल का ड्राइवर राजेश उर्फ राजू पानेरी सुखाड़िया नगर से ही मोबाइल पर बात करते हुए बस चला रहा था। करीब तीन सौ मीटर दूर नई हवेली सरकारी स्क्ूल के सामने पहुंचने तक उसका ध्यान मोबाइल पर ही था। बस में कंडक्टर तथा अध्यापिका तक नहीं थे। ऐसे में प्रणय तथा उसकी बहन प्राची के साथ दूसरे बच्चे खुद ही गेट खोलकर उतरे थे। तब तक भी ड्राइवर मोबाइल पर ही बात कर रहा था।

भाई-बहन को उतारने के बाद उसने देखे बिना ही बस को पीछे ले लिया। पीछे खड़ा प्रणय टक्कर लगने से दूर खड़ी बहन प्राची चिल्लाई, ड्राइवर अंकल बस रोको..., लेकिन उसकी बात ड्राइवर तक नहीं पहुंच पाई। प्रणय को टक्कर लगने पर बस में सवार बच्चे भी चिल्लाए और बस रोकने की बात कही, लेकिन मोबाइल पर मशगूल ड्राइवर ने बस के अंदर से भी बच्चों की आवाज नहीं सुनी। नीचे गिरते ही खलासी साइड के पीछे वाला पहिया प्रणय का सिर कुचलते हुए निकल गया। यह देखकर प्राची जोर-जोर से रोने लग गई। प्रणय और प्राची जुड़वां भाई-बहन हैं।

स्कूल संचालक पर बिफरे लाेग

स्कूल की संचालिका किरण कौशिक अस्पताल की मोर्चरी पर पहुंचीं। यहां परिवार के लोग बिफर पड़े। प्रणय के ताऊ अशोक विजयवर्गीय ने बस में खलासी नहीं होने के बावजूद बस को रवाना कर देने पर सवाल किए। उनका सवाल था, आज हमारा बच्चा गया, कल दूसरा जाएगा। परिजनों का कहना था कि घटना के बाद बस पर लिखे नंबर पर सात बार कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। प्रिंसिपल को भी कॉल किया, लेकिन उन्होंने कॉल उठाकर तुरंत फोन बंद कर दिया।

ड्राइवर, स्कूल संचालक पर केस दर्ज

पुलिस ने बस ड्राइवर तथा स्कूल संचालक के खिलाफ आईपीसी की धारा 304 ए में लापरवाही पूर्वक वाहन चलाकर दुर्घटना कारित करने की धारा में केस दर्ज किया है। इस धारा में दो साल की जेल या जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान है। बस अंकुर स्कूल के नाम पर रजिस्टर्ड है।

ड्राइवर राजेश पानेरी

घटना की आंखों देखी

बच्चे बोले, हम चिल्लाए, काफी शोर किया, ड्राइवर ने नहीं सुना

प्रत्यक्षदर्शी याेगेश यादव ने बताया कि ड्राइवर राजेश उर्फ राजू पानेरी मोबाइल पर बात करते हुए बस चला रहा था। नई हवेली स्कूल के यहां पहुंचने पर प्रणय तथा प्राची के उतरने के बाद भी ड्राइवर मोबाइल पर बात करते हुए ही बस को पीछे ले रहा था। बच्चों ने कहा, हम सबने आवाज लगाई, लेकिन उन्होंने नहीं सुना और बस चलाते रहे। बाद में पता चलने पर बस रोककर नीचे उतरे। बाद में सभी बच्चे नीचे उतरे और पैदल ही अपने घर चले गए। बस गोविंद चौक, सुखाड़िया नगर और गणेश टेकरी के बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने के लिए लगी थी।

प्रत्यक्षदर्शी योगेश यादव

छात्र प्रणय के चाचा बोले-हमारी जिंदगी भर की पूंजी चली गई

घटनास्थल से प्रणय का घर करीब डेढ़ सौ-दो सौ मीटर दूर है। कुछ ही देर में प्रणय के माता-पिता भी मौके पर पहुंच गए। बेटे का शव देखकर ये दहाड़े मारकर रोने लगे। लोगों ने इन्हें संभाला। प्रणय के चाचा नरेश ने कहा कि उनकी जिंदगी भर की पूंजी चली गई। स्कूल प्रबंधन बच्चे की गलती पर तो अभिभावकों को तुरंत स्कूल बुला लेते हैं, लेकिन बस को बिना कंडक्टर के ही बच्चों को घर छोड़ने के लिए भेज दिया। स्कूल प्रबंधन अब अपनी गलती मान भी ले तो क्या होगा। हमारा बच्चा तो चला गया...।

भाई-बहन में एक घंटे का फर्क

मृतक प्रणय और उसकी बहन प्राची जुड़वां हैं। दोनों के जन्म में सिर्फ एक घंटे का फर्क है। परिवार में भी प्रणय के पिता सहित तीन भाई हैं। तीनों के तीन बच्चे ही हैैं। प्रणय परिवार में सबका लाड़ला था। उसके पिता रामनिवास विजयवर्गीय की नाथद्वारा सब्जी मार्केट में खिलौने की दुकान है। प्रणय भी कभी-कभार खिलौने की दुकान पर बैठता था। वह दुकान का काम संभाल लेता था।

ड्राइवर तीन सौ मीटर दूर से मोबाइल पर बात करते आ रहा था, हादसा होने तक मोबाइल पर ही व्यस्त था

हादसे के बाद बच्चों के शोर पर ड्राइवर ने बस रोकी और नीचे उतरा तो प्रणय का सिर कुचला दिखा। बहन प्राची बोली-अंकल आपने यह क्या कर दिया...। यह सुनते ही आरोपी ड्राइवर बस में सवार 38 बच्चों को छोड़कर भाग गया।

जिले में 750 बाल वाहिनियां, रजिस्ट्रेशन सिर्फ 210 का ही

राजसमंद| जिलेभर में 460 प्राइवेट स्कूलों और 12 कॉलेजों में 750 बाल वाहिनियां हैं। इनमें से सिर्फ 210 का ही रजिस्ट्रेशन है। शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते स्कूल संचालक न तो बाल वाहिनियों को नियमानुसार रखते हैं, न ही बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई कार्रवाई करते हैं। पैसा बचाने के फेर में कई स्कूलों की बाल वाहिनियों पर कंडक्टर तक नहीं है तो कई बसों का फिटनेस तक नहीं है। खस्ताहाल बसों में ही मासूम सफर करने को मजबूर हैं। 22 फरवरी को करौली बाल वाहिनी की फर्श टूटी होने से एक स्कूली बच्चे की उसी बस से कुचलकर मौत हो गई थी। इस घटना से परिवहन और पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर 60 नियम विरुद्ध चलने वाली बाल वाहिनी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए साढ़े तीन लाख रुपए का जुर्माना वसूल किया। इसके बाद कार्रवाई को बंद कर दिया। 26 फरवरी को सभी निजी संचालकों की बैठक कर एसपी भुवन भूषण यादव और डीटीओ अनिल पांडया ने सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार बाल वाहिनियों का संचालन करने के निर्देश दिए थे, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। 23 फरवरी को आमेट के आरके सैकंडरी स्कूल की 8 की क्षमता वाली वैन में 20 बच्चे बैठाने पर शिक्षा विभाग को कार्रवाई के लिए लिखा था। लेकिन शिक्षा विभाग ने संबंधित स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। रेलमगरा में भी नवप्रभात स्कूल की वैन में ऐसी ही घटना हुई थी। परिवहन विभाग के इंसपेक्टर ने वैन की फाटक खोली थी तो 4 बच्चे ऐसे ही सड़क पर गिर पड़े। विभाग ने वैन तो जब्त कर ली, लेकिन चालान भरकर स्कूल संचालक वापस गाड़ी ले गया।

ड्राइवर नियम विरुद्ध ड्राइविंग करे तो लाइसेंस निलंबन हो सकता है : डीटीओ


नाथद्वारा। दुर्घटना के बाद माैके पर जमा लोग तथा खड़ी स्कूल की बस।

नियमों का पालना नही करने वाले स्कूलों की मान्यता खारिज करेंगे : डीईओ

बाल वाहिनियों को नियमानुसार चलाने के संबंध में स्कूल प्रबंधकों को चेतावनी पत्र जारी किए जाएंगे। सभी स्कूलों के प्रबंधक को बाल वाहिनियों के संचालन में राजकीय नियमों की पालना करने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके साथ ही जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक और जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक के माध्यम से सभी स्कूलों को पाबंद किया जाएगा। पालना नहीं करने वाले स्कूलों की मान्यता खारिज करने के लिए शिक्षा विभाग के डायरेक्टर को लिखा जाएगा। मधुसूदन व्यास, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, राजसमंद


नाथद्वारा। अाक्राेश जताते परिजन तथा समझाते पुलिसकर्मी।

बाल वाहिनियों में सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस तो दूर, कंडक्टर तक नहीं रहते हैं, अधिकांश स्कूलों में लगे हैं ऑटो

जिम्मेदारों के ऐसे जवाब : मोबाइल पर बात कर वाहन चलाने वालों पर अब शुरू करेंगे कार्रवाई


खलासी बिना बताए ही चला गया था : संचालिका

खलासी की प|ी की तबीयत खराब थी। वह सुबह आया था, बाद में बिना बताए ही अस्पताल चला गया। मैं छुट्टी पर थी। घटना का मुझे भी अफसोस है। मैं कुछ बोलने की स्थिति में भी नहीं हूं। इतने समय तक बच्चा हमारे पास पढ़ा तो दुख हमें भी होता है। किरण कौशिक, संचालिका, अंकुर स्कूल, नाथद्वारा

ड्राइवर, स्कूल प्रबंधन के खिलाफ केस दर्ज किया है, नियम विरुद्ध वाहन चलाने पर सख्ती होगी


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